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वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ भजन लिरिक्स (Vo Nazar Hame Mil Jaaye Tere Darshan Paa Jaaye Lyrics in Hindi) - Anjali Sagar Shyam Bhajan - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ" (Vo Nazar Hame Mil Jaaye Tere Darshan Paa Jaaye) एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण श्याम भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायिका अंजलि सागर ने अपने मधुर स्वरों से सजाया है। यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य भक्ति, विरह, और पूर्ण शरणागति के भाव को प्रदर्शित करता है। सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा में इस भजन का एक विशेष स्थान है, क्योंकि यह जीवात्मा की उस तड़प को दर्शाता है जो अपने आराध्य परमात्मा के दर्शन के लिए व्याकुल है। इस भजन का मुख्य स्वर 'विनय' और 'समर्पण' है, जहाँ भक्त भगवान से किसी भौतिक वस्तु की कामना न करके केवल उस दिव्य दृष्टि (नज़र) की याचना करता है जिससे ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार हो सके। इसे विशेष रूप से एकादशी, श्याम संकीर्तन, और दैनिक पूजा के समय गाया जाता है, जो साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ

॥ कोरस ॥
वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ।
तेरी चौखट पे आकर हम शीश झुका जाएँ॥
वो नज़र हमें मिल जाए...

॥ अंतरा - १ ॥
तुम दाता हो जग के, हम याचक द्वारे हैं।
तेरी रहमत के बाबा, हम सब सहारे हैं॥
एक बार दया कर दो, बिगड़ी को बना जाओ।
वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ॥

॥ अंतरा - २ ॥
हारे का सहारा तुम, खाटू के नरेश हो।
भक्तों के संकट हरते, तुम विष्णु महेश हो॥
इस दुखिया के दिल की, पीड़ा को मिटा जाओ।
वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ॥

॥ अंतरा - ३ ॥
चरणों में जगह दे दो, दासी को अपनी तुम।
इस जीवन की नैया, पार लगा दो तुम॥
अंजलि की पुकार सुनके, खाटू से चले आओ।
वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ॥

तेरी चौखट पे आकर हम शीश झुका जाएँ।
वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के मधुर संबंध को रेखांकित करता है। यहाँ भक्त (अंजलि सागर के माध्यम से) भगवान श्री खाटू श्याम जी से प्रार्थना कर रहा है कि हे प्रभु! मुझे वह दिव्य दृष्टि प्रदान करें जिससे मैं आपके अलौकिक रूप का दर्शन कर सकूं। इस संसार में हमारी चर्म चक्षु (भौतिक आँखें) केवल मायावी संसार को देख पाती हैं। जब तक ईश्वर की कृपा से हमें 'दिव्य चक्षु' या 'वह नज़र' नहीं मिलती, तब तक हम परमात्मा के वास्तविक सौंदर्य और उनकी उपस्थिति को महसूस नहीं कर सकते।

भजन के प्रथम भाग में भक्त स्वयं को एक याचक (भिखारी) और भगवान को संपूर्ण जगत का दाता (दाता) स्वीकार करता है। यह भाव जीव के अहंकार को नष्ट करता है। जब मनुष्य का अहंकार समाप्त होता है, तभी ईश्वर की करुणा का प्रवाह उसके जीवन में होता है। द्वितीय भाग में भगवान श्याम को 'हारे का सहारा' और 'खाटू नरेश' कहकर संबोधित किया गया है, जो महाभारत कालीन बर्बरीक के त्याग और कृष्ण द्वारा दिए गए वरदान की याद दिलाता है। अंतिम भाग में भक्त अपनी जीवन रूपी नैया को संसार सागर से पार लगाने की गुहार लगाता है, जो कि सनातन दर्शन के मोक्ष मार्ग का प्रतीक है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • दिव्य दृष्टि की याचना: यह भजन भौतिक सुखों के बजाय आध्यात्मिक जागृति और ईश्वर के दर्शन की मांग करता है।
  • शरणागति का भाव: "हारे का सहारा" के रूप में भगवान श्याम की शरण में जाने का संदेश देता है, जो कलयुग में सबसे सुलभ साधना है।
  • अहंकार का विसर्जन: स्वयं को 'याचक' और प्रभु को 'दाता' मानकर भक्त अपने भीतर के सूक्ष्म अहंकार को समाप्त करता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण और कीर्तन से मन को असीम शांति मिलती है और तनाव दूर होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • शुभ समय: संध्या काल में जब घर या मंदिर में आरती की जाती है, तब इस भजन का गायन अत्यंत मधुर और प्रभावी लगता है। इसके अतिरिक्त, खाटू श्याम जी की प्रिय तिथि 'एकादशी' (विशेषकर शुक्ल पक्ष की एकादशी) को इसका गायन विशेष पुण्यदायी होता है।
  • गायन विधि: शांत चित्त होकर, खाटू श्याम जी की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक प्रज्वलित करें। हाथों में करताल या मंजीरा लेकर पूर्ण श्रद्धा और भाव के साथ इस भजन को गाएं।
  • श्रवण विधि: यदि आप इसे सुन रहे हैं, तो आँखें बंद करके इसके शब्दों के अर्थ को अपने अंतर्मन में महसूस करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। वे अत्यंत वीर और धनुर्विद्या में निपुण थे। महाभारत युद्ध के समय उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि जो पक्ष हारेगा, वे उसकी ओर से लड़ेंगे। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी इस प्रतिज्ञा और उनके पास मौजूद तीन अमोघ बाणों की शक्ति को देखते हुए, उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश दान कर दिया। उनकी इस महान आहुति से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और जो भी सच्चे मन से उनकी शरण में आएगा, उसका कल्याण होगा।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक श्याम भक्ति परंपरा के अंतर्गत हुई है। इसे सुप्रसिद्ध गायिका अंजलि सागर ने गाया है। समकालीन समय में खाटू श्याम जी के भजनों का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम आज करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस भजन की पृष्ठभूमि भी इसी जन-आस्था और भक्तों के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है, जहाँ भक्त अपनी बिगड़ी बनाने के लिए खाटू नरेश के दरबार में अर्जी लगाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली 'गीतिका' और 'पद' शैली पर आधारित है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और बिंब अत्यंत सहज हैं, जैसे "जीवन की नैया" में रूपक अलंकार का प्रयोग किया गया है। लय और ताल का संयोजन ऐसा है कि यह सुनने वाले को तुरंत ही भक्ति के सागर में सराबोर कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  • धैर्य और विश्वास: जीवन में जब सभी मार्ग बंद हो जाएं, तब भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए, क्योंकि वे 'हारे का सहारा' हैं।
  • विनम्रता: ईश्वर के दरबार में हमेशा विनम्र होकर जाना चाहिए। हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा या धन-दौलत वहाँ कोई मायने नहीं रखती।
  • सच्ची प्रार्थना: प्रार्थना में शब्दों से अधिक भावों का महत्व होता है। जब पुकार सच्चे दिल से होती है, तो भगवान अवश्य सुनते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
नज़र (Nazar) दृष्टि / दिव्य चक्षु वह आंतरिक दृष्टि जिससे ईश्वर की अनुभूति होती है।
दर्शन (Darshan) साक्षात्कार / देखना प्रभु के अलौकिक स्वरूप को अपनी आँखों में बसाना।
चौखट (Choukhat) द्वार / देहरी ईश्वर का पावन दरबार जहाँ भक्त शरण लेता है।
दाता (Data) देने वाला / दानवीर परमात्मा जो संपूर्ण सृष्टि का पालनहार है।
याचक (Yachak) भिखारी / प्रार्थना करने वाला जीवात्मा जो प्रभु से कृपा की भीख मांगती है।
रहमत (Rehmat) कृपा / दया ईश्वर का अनुग्रह जो भक्त के पापों का नाश करता है।
नैया (Naiya) नाव मनुष्य का जीवन जो संसार रूपी सागर में तैर रहा है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ..."
भक्त प्रार्थना करता है कि हे श्याम बाबा! मुझे वह दृष्टि प्रदान करें जिससे मैं आपके दिव्य स्वरूप को देख सकूं और मेरी आँखें आपके दर्शन पाकर धन्य हो जाएं।

"तेरी चौखट पे आकर हम शीश झुका जाएँ..."
मैं आपके पावन द्वार पर आकर अपना सर्वस्व (अहंकार सहित) आपके चरणों में समर्पित कर देना चाहता हूँ।

"तुम दाता हो जग के, हम याचक द्वारे हैं..."
आप इस पूरे ब्रह्मांड के स्वामी और सबको देने वाले हैं, और हम आपके द्वार पर खड़े साधारण याचक हैं जो केवल आपकी कृपा के अभिलाषी हैं।

"तेरी रहमत के बाबा, हम सब सहारे हैं..."
हमारा अपना कोई अस्तित्व नहीं है, हम केवल आपकी दया और करुणा के सहारे ही इस संसार में जीवन यापन कर रहे हैं।

"हारे का सहारा तुम, खाटू के नरेश हो..."
जब पूरी दुनिया किसी थके-हारे व्यक्ति का साथ छोड़ देती है, तब आप उसे सहारा देते हैं। आप खाटू धाम के राजा हैं जो सबके रक्षक हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम साधना के समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः॥

हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।

इसके साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक जो दिव्य दृष्टि के महत्व को दर्शाता है, यहाँ प्रासंगिक है:

"न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम्॥" (गीता ११.८)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ
मुख्य आराध्य भगवान श्री खाटू श्याम जी (श्री कृष्ण)
गायिका अंजलि सागर (Anjali Sagar)
भाषा हिंदी (सरल खड़ी बोली)
भक्ति भाव विनय, समर्पण, विरह और करुणा भाव
उपयुक्त अवसर खाटू श्याम एकादशी, श्याम संध्या, दैनिक संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"वो नज़र हमें मिल जाए" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका अंजलि सागर ने गाया है, जिनकी आवाज ने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन में 'नज़र' शब्द का क्या अर्थ है?

यहाँ 'नज़र' का अर्थ उस दिव्य और आध्यात्मिक दृष्टि (दिव्य चक्षु) से है, जिसके माध्यम से भक्त ईश्वर के वास्तविक और अलौकिक स्वरूप का अनुभव कर पाता है।

खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?

महाभारत काल में बर्बरीक को श्री कृष्ण ने वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति जीवन में पूरी तरह हार मान चुका होगा और उनकी शरण में आएगा, वे उसका उद्धार करेंगे। इसी कारण उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय संध्या काल की आरती या एकादशी के दिन श्याम संकीर्तन के दौरान होता है।

क्या यह भजन दैनिक पूजा में गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन दैनिक पूजा में गाया जा सकता है। यह मन को शांत करता है और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव को बढ़ाता है।

अंजलि सागर के इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया को छोड़कर ईश्वर की शरण में जाना चाहिए और केवल उनके दर्शन की कामना करनी चाहिए।

खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है।

इस भजन में 'याचक' और 'दाता' का क्या संबंध है?

यह संबंध भक्त और भगवान के बीच के परम सत्य को दर्शाता है, जहाँ भगवान सर्वशक्तिमान दाता हैं और मनुष्य उनकी कृपा का आकांक्षी याचक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस भजन के बोल और इसके भावार्थ को सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा और श्रीमद्भगवद्गीता के भक्ति योग के सिद्धांतों के आलोक में विश्लेषित किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि भजन के मूल शब्दों की पवित्रता बनी रहे और पाठकों को इसका सही आध्यात्मिक अर्थ प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय ११ - विश्वरूपदर्शनयोग)
  • महाभारत - बर्बरीक की कथा और शीश दान का प्रसंग
  • पारंपरिक खाटू श्याम भजन संग्रह एवं संकीर्तन पद्धतियां

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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