Chhath Puja Geet

अइली मोर शीतली मईया (Aili Mor Shitali Maiya ) - Mona Singh devigeet Bhakti Song Mata Bhajan - BhaktiLok

58 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

शीतली माता की आराधना: भक्ति का अनूठा पाठ

माँ शीतली की कृपा से जीवन में सुख और शांति का अनुभव करें। इस भजन का गान करें और मन को शीतल करें।

अइली मोर शीतली मईया, अइली मोर शीतली मईया। अइली मोर शीतली मईया, अइली मोर शीतली मईया। तू है मेरी सच्ची सांवली, तू है मेरी सच्ची सांवली। नगिन की तरह मुझ पे कर दे, नगिन की तरह मुझ पे कर दे। प्यार की मूरत तो दिखा दे, प्यार की मूरत तो दिखा दे। अइली मोर शीतली मईया, अइली मोर शीतली मईया। तेरे संग मुरली की धुन है, तेरा संग मुरली की धुन है। गोपियों से घिरी तू जहां भी हो, गोपियों से घिरी तू जहां भी हो। कृष्ण के संग ही तेरा रंग है, कृष्ण के संग ही तेरा रंग है। आ तभी तो खुशियों की है बुनाई, आ तभी तो खुशियों की है बुनाई। अइली मोर शीतली मईया, अइली मोर शीतली मईया। तू है मेरी सच्ची प्यारी, तू है मेरी सच्ची प्यारी। आ तू मेरी दर पर आकर, आ तू मेरी दर पर आकर। कहे अनकही बातों से प्यारी, कहे अनकही बातों से प्यारी। अइली मोर शीतली मईया, अइली मोर शीतली मईया।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ शीतली की महिमा का वर्णन किया गया है। 'अइली मोर शीतली मईया' का अर्थ है कि माँ शीतली, जो सभी दुखों का नाश करने वाली हैं, हमारे पास आईं हैं। यह भक्ति गीत हमें आमंत्रित करता है कि हम माँ के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम को प्रकट करें। माँ शीतली को हर जगह आनंद और शांति की देवी के रूप में पूजा जाता है। भजन में कहा गया है कि माँ का स्वरूप सुंदर और सांवला है, जो सच्चे प्रेम की मूरत है। भजन के दूसरे हिस्से में, कृष्ण के संग माँ की उपस्थिति को दर्शाया गया है, जो उनके प्रेम की गहराई को बताता है। इससे भक्त को यह संदेश मिलता है कि जब हम माँ शीतली का ध्यान करते हैं, तब हमारे जीवन में प्रेम और आनंद का संचार होता है।

भावार्थ की दृष्टि से, 'अइली मोर शीतली मईया' भक्त की आत्मा की पुकार है, जो अपने जीवन में शांति और आनंद की तलाश में है। जब भक्त माँ से विनती करता है कि वह प्यार की मूरत दिखा दें, तो यह संकेत है कि भक्त अपनी भावनाओं और इच्छाओं को माँ के चरणों में अर्पित करता है। यह भजन भक्ति और समर्पण के मार्ग को दर्शाता है, जिसमें भक्त अपनी सभी इच्छाओं को माँ के प्रति समर्पित कर देता है। यहाँ 'नगिन की तरह मुझ पे कर दे' पंक्ति भक्त की माँ के प्रति अपने गहरे प्रेम को प्रदर्शित करती है। यह माँ से मनःस्थिति को शीतल करने की प्रार्थना है, जिससे भक्त का मन शांत और प्रसन्न हो सके।

इस भजन में मुख्यतः भक्ति मार्ग का दर्शन होता है। भक्ति सिद्धांत के अनुसार, श्रद्धा और प्रेम के माध्यम से माँ की कृपा प्राप्त की जा सकती है। माँ शीतली का गुण है कि वह अपने भक्तों के सभी दुखों को समाप्त कर देती हैं। जब भक्त सच्चे मन से माँ को आमंत्रित करता है, तो यही उसकी भक्ति का प्रमाण होता है। भगवान कृष्ण के संग माँ की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संबंध है जो प्रेम और समर्पण से परिभाषित होता है। इस प्रकार, शीतली माता की इस आराधना में, भक्त की भक्ति केवल स्वार्थ से मुक्त और आत्मिक शांति का साधन बन जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ शीतली की महिमा भारतीय संस्कृति और पुराणों में गहराई से विद्यमान है। उन्हें संकट मोचन और सुखों की दाता माना गया है। शीतला सप्तमी के दिन विशेष रूप से उनकी पूजा की जाती है। पुराणों में वर्णित हैं कि जब धरती पर महामारी फैलती थी, तब माँ ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। उनकी आराधना से भीतर के विकार समाप्त होते हैं और भक्त के जीवन में सुख और शांति का संचार होता है। माँ शीतली की आराधना से भक्त की आयु, स्वास्थ्य और यश में वृद्ध‍ि होती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है और मन में शांति का अनुभव होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, इस भजन का जाप करने से भक्तों को आंतरिक संतोष, सुकून और मानसिक ऊर्जा मिलती है। यह भगवान की कृपा को आकर्षित करने का एक प्रभावी साधन है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समर्पण का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। विधिपूर्वक दीप जलाकर, माँ के चित्र के सामने बैठकर ध्यान करना चाहिए। मन में श्रद्धा और प्रेम के भावों के साथ भजन करना आवश्यक है, ताकि पूजा का सम्पूर्ण अनुभव हो सके। इस दौरान शांति और एकाग्रता बनाए रखना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

माँ शीतली की पूजा का महत्व क्या है?

माँ शीतली की पूजा से भक्तों के सभी दुख और कष्ट समाप्त होते हैं, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होता है।

इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को किया जाना चाहिए, ताकि मन में शांति और सुकून प्राप्त किया जा सके।

माँ शीतली के क्या विशेष गुण हैं?

माँ शीतली संकट मोचन और स्वास्थ्य की देवी मानी जाती हैं, जो अपने भक्तों को सभी आध्यात्मिक और शारीरिक समस्याओं से मुक्त करती हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!