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महाकाल आरती लिरिक्स (Mahakal Aarti Lyrics in Hindi) - Karo Re Mangal Aarti Mrityunjay Mahakal Ki ANURADHA PAUDWAL - Bhaktilok

473 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महाकाल आरती लिरिक्स (Mahakal Aarti Lyrics in Hindi) - एक पावन परिचय

महाकाल की पावन आरती "करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की" भगवान शिव के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर स्वरूप को समर्पित अत्यंत भावपूर्ण और ऊर्जावान भजन है। अनुराधा पौडवाल जी की सुमधुर वाणी में यह आरती शिव भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इस आरती का गान करने से काल के भय से मुक्ति मिलती है और मन में अगाध आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। उज्जैन के राजा महाकाल त्रिकालदर्शी हैं, जो तीनों लोकों के स्वामी और प्रलय के देवता होने के साथ-साथ अपने भक्तों के लिए अत्यंत कृपालु और भोले भंडारी हैं। संध्या काल में इस आरती का श्रवण व गान करने से साधक को मोक्ष, आरोग्य और परम शांति की प्राप्ति होती है। यह लेख आपको महाकाल आरती के संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराएगा।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics

काल की विक्राल की
त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की
भोले शिव कृपाल की
करो रे मंगल आरती
मृत्युंजय महाकाल की

करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की
बाबा महाकाल की
ओ मेरे महाकाल की
करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की | (2)

पीत पुष्प बाघम्बर धारी
नंदी तेरी सवारी
पीत पुष्प बाघम्बर धारी
नंदी तेरी सवारी
त्रिपुंडधारी हे त्रिपुरारी
भोले भव भैहारी
शंभु दिन दयाल की
तीन लोग दीगपाल की
कैलाशी शशिभाल की
करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की | (2)

डमरू बाजे बांध बांध बांध
नाचे शंकर भोला
डमरू बाजे बांध बांध बांध
नाचे शंकर भोला
बम भोले शिव बंबम बंबम
चड्ढा भांग का गोला
जय जय हृदय विशाल की
आशुतोष प्रतिपाल की
नैना धक धक ज्वाल की
करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की | (2)

आरत हरि पालनहारी
तू है मंगलकारी
आरत हरि पालनहारी
तू है मंगलकारी
मंगल आरती करे नर नारी
पाए पदरथ चारी
कालरूप महाकाल की
कृपासिंधु महाकाल की
उज्जैनी महाकाल की
करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की | (2)

काल की विक्राल की
त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की
भोले शिव कृपाल की
करो रे मंगल आरती
मृत्युंजय महाकाल की
करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

महाकाल आरती के प्रत्येक चरण में भगवान शिव के महाकालेश्वर स्वरूप की विराटता का वर्णन किया गया है। प्रथम चरण में महाकाल को काल के भी काल, विकराल रूप वाले, त्रिलोकी के स्वामी और तीनों कालों (भूत, भविष्य, वर्तमान) के ज्ञाता के रूप में संबोधित किया गया है। भक्त सभी से आग्रह करते हैं कि ऐसे कृपालु भोलेनाथ की मंगल आरती का गान करें जो मृत्यु को भी जीत लेते हैं।

द्वितीय चरण में बाबा महाकाल के श्रृंगार और स्वरूप का चित्रण है। वे पीले पुष्पों की माला धारण करते हैं, बाघ की खाल (व्याघ्र चर्म) पहनते हैं और नंदी उनकी सवारी है। उनके मस्तक पर त्रिपुंड सुशोभित है और वे त्रिपुरासुर का संहार करने वाले त्रिपुरारी हैं। वे दीन-दुखियों पर दया करने वाले और संसार के सभी भयों को हरने वाले शंभू हैं। वे कैलाश पर निवास करने वाले और मस्तक पर चंद्रमा (शशिभाल) धारण करने वाले दीगपाल हैं।

तृतीय चरण में भगवान शिव के तांडव और मस्ती भरे स्वरूप का वर्णन है। डमरू की 'बांध बांध' धुन पर भगवान शंकर आनंदित होकर नृत्य करते हैं। भक्त 'बम भोले' और 'बंबम' का जयकारा लगाते हुए उन्हें भांग का गोला अर्पित करते हैं। उनका हृदय अत्यंत विशाल है, वे आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं और उनकी तीसरी आँख से प्रलय की धक-धक करती हुई ज्वाला निकलती है।

चतुर्थ चरण में आरती के फल और महाकाल की कृपा का वर्णन है। महाकाल ही समस्त सृष्टि के पालनहार और अमंगल का नाश करने वाले मंगलकारी हैं। जो स्त्री-पुरुष श्रद्धापूर्वक इस मंगल आरती को करते हैं, उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—ये चारों पुरुषार्थ (पदरथ चारी) प्राप्त होते हैं। वे उज्जैन नगरी के अधिपति, कृपा के सिंधु और साक्षात काल रूप महाकाल हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
मृत्युंजय मृत्यु को जीतने वाले भगवान शिव का नाम
बाघम्बर बाघ की खाल (व्याघ्र चर्म) शिवजी का वस्त्र
त्रिपुंड माथे पर तीन रेखाएं शिव भक्तों एवं शिवजी का श्रृंगार
त्रिपुरारी त्रिपुर असुर का वध करने वाले शिवजी का विशेष नाम
शशिभाल मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले शिवजी की विशेषता
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव का स्वभाव
पदरथ चारी चारों पदार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) आरती का फल

आरती में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity

भगवान महाकालेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और मध्य प्रदेश के पवित्र शहर उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर विराजमान हैं। महाकाल ही एकमात्र ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं जिनका मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जो उन्हें मृत्यु और तंत्र साधना का अधिपति बनाता है। काल स्वयं इनसे भय खाता है, इसीलिए इनका नाम 'महाकाल' है। इनकी आराधना करने से मनुष्य के सभी प्रकार के भय, संकट और अकाल मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है। उज्जैन की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ चिता की भस्म से महाकाल का श्रृंगार किया जाता है, जो इस संसार की नश्वरता और शिव की सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक है।

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Traditional Benefits

संध्या अथवा प्रातः काल के समय महाकाल की इस मंगल आरती का गान या श्रवण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। सनातन धर्म में आरती को भगवान के प्रति समर्पण और उनकी ज्योति में अपने अहंकार को विलीन करने का माध्यम माना जाता है। इस भजन को गाने से साधक को मानसिक शांति, आंतरिक बल और अटूट आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। अनुराधा पौडवाल जी की स्वरबद्ध यह कृति भक्तों को साक्षात महाकाल के दरबार में होने का अनुभव कराती है। शिव भक्तों के लिए यह स्तुति किसी महामंत्र से कम नहीं है।

आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation

भगवान महाकाल की आरती करते समय थाली की उचित सज्जा का विशेष महत्व होता है। आरती की थाली में चांदी, पीतल या तांबे की थाली का प्रयोग करें। थाली में घी का दीपक (अखंड ज्योति या कपूर के लिए), धूप या अगरबत्ती, ताजे फूल (विशेषकर पीले या सफेद पुष्प), कुमकुम, चंदन, और अक्षत (चावल) रखें। इसके साथ ही भगवान को अर्पण करने के लिए मिष्ठान या फलाहार का भोग रखें। आरती की थाली को प्रज्वलित करने के बाद सर्वप्रथम अपने इष्टदेव का ध्यान करें और फिर पूरी श्रद्धा व लय के साथ आरती गाएं।

आरती करने का सही समय, दिशा एवं दीप घुमाने की विधि | Best Time & Movement

महाकाल की आरती मुख्यतः प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय) और प्रदोष काल (संध्या के समय) में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आरती करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। दीप घुमाने की विधि में, भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार और समस्त अंगों की सात बार आरती घुमाई जाती है। इसके पश्चात शंख और घंटी बजाकर आरती को पूर्ण किया जाता है और अंत में भक्त अपने हाथों को जलती हुई ज्योति के ऊपर फेरकर अपनी आँखों और मस्तक पर लगाते हैं।

आरती के दौरान घंटी, शंख एवं दीप का महत्व | Bell, Conch & Lamp Symbolism

आरती के समय उपयोग होने वाले प्रत्येक उपकरण का गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। घंटी (घंटा) बजाने से उत्पन्न होने वाली ध्वनि से मन के विकार दूर होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख की ध्वनि से ब्रह्मांडीय नाद 'ॐ' का कंपन उत्पन्न होता है, जो वातावरण को शुद्ध करता है। दीप (दीपक) ज्ञान और चेतना का प्रतीक है, जो हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर दिव्यता का प्रकाश फैलाता है।

घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti & Rules

घर में महाकाल की आरती करते समय पवित्रता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें। आरती करते समय मन में किसी प्रकार का द्वेष या नकारात्मक विचार न रखें। दीपक और कपूर जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें। भोग हमेशा सात्विक होना चाहिए। भगवान शिव को कभी भी केतकी के फूल या तुलसी दल अर्पित न करें, उनके पूजन में बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल का विशेष महत्व है।

आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

महाकाल की आरती हमें यह सिखाती है कि यह जीवन और संसार नश्वर है, और केवल महाकाल ही शाश्वत सत्य हैं। काल के भय से मुक्त होने के लिए हमें अपने अहंकार का त्याग कर भगवान की शरण में जाना चाहिए। जिस प्रकार महाकाल ने विषपान कर संसार की रक्षा की, उसी प्रकार हमें भी जीवन के संघर्षों का सामना धैर्य और साहस के साथ करना चाहिए। नियमित रूप से शिव आराधना करने से मनुष्य अनुशासित, विनम्र और परोपकारी बनता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम महाकाल आरती (करो रे मंगल आरती मृत्युंजय महाकाल की)
गायक / गायिका अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
आराध्य देवता भगवान महाकाल (शिवजी), उज्जैन
भाषा हिंदी / ब्रज मिश्रित अवधी
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, निर्भीकता और शिव कृपा
उपयुक्त अवसर प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि, सावन मास और दैनिक संध्या वंदन
संबंधित पावन स्थल श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन (शिव तांडव स्तोत्र भी पढ़ें)

मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways

  • महाकाल की शरण में जाने से मृत्यु और काल का भय समाप्त हो जाता है।
  • नियमित आरती और पूजा से जीवन में अनुशासन और मानसिक शांति आती है।
  • शिवजी की आराधना में सादगी (बेलपत्र, धतूरा) और सच्चा भाव सबसे महत्वपूर्ण है।
  • भगवान शिव सभी कष्टों को हरने वाले और आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं।
  • संसार के सभी भौतिक सुखों और मोक्ष की प्राप्ति के लिए महाकाल की कृपा अनिवार्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध महाकाल आरती सुप्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा पौडवाल जी की मधुर वाणी में गाई गई है, जिसे शिव भक्तों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है।

महाकाल आरती का गान प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या काल (प्रदोष काल) के समय करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और पवित्र शहर उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है।

इस आरती को करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, मानसिक शांति मिलती है और साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हाँ, आप अपने घर के पूजा स्थल पर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग के समक्ष विधि-विधान से यह आरती कर सकते हैं।

'मृत्युंजय' का अर्थ है जो मृत्यु को जीत चुका हो अर्थात भगवान शिव, जो महाकाल के रूप में काल पर भी विजय प्राप्त किए हुए हैं।

शिव पूजा में बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, चंदन, गंगाजल और घी के दीपक का विशेष महत्व होता है।

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में विशेष दर्शन और अनुष्ठान होते हैं, जिनका फल अनंत गुना प्राप्त होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत महाकाल आरती के लिरिक्स, शब्दार्थ और धार्मिक मान्यताओं को पारंपरिक स्रोतों और सनातन भक्ति परंपराओं के आधार पर सत्यापित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों को त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्तापूर्ण devotional सामग्री उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, उज्जैन की आधिकारिक परंपराएं एवं ग्रंथ
  • सनातन पौराणिक कथाएं एवं शिव पुराण
  • भक्ति संगीत संग्रह एवं पारंपरिक आरती संकलन

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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