Parvati Stotram

तेरा रूप है प्रचंड तू ही आरंभ तू ही अंत लिरिक्स (Tera Roop Hai Prachand Lyrics in Hindi) - Har har Shambhu Hashtag pandit Abhilipsa panda - Bhaktilok

690 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री शिव की महिमा: प्रचंड रूप का उद्घाटन

इस भजन में हम शिव की अद्वितीय महिमा का अनुभव करते हैं, जो आरंभ और अंत के समान हैं।

तेरा रूप है प्रचंड तू ही आरंभ तू ही अंत हर हर शंभु महादेव, तेरा नाम लूं सदा श्री गणेश, तुझको प्रणाम, जीव मेरे तेरा संज्ञान हर हर शंभु महादेव, तू ही अर्थ जीवन का शांति का ज्ञान तेरा रूप है प्रचंड, तू ही आरंभ तू ही अंत तैर के संग चलता जो, वो ही पार करता है जीवन का संकट हर हर शंभु महादेव, सत्य मार्ग पर जो कदम बढ़ाएं तू तो है, जीवन का गीत, अरे दुखों से मुक्ति दिलाने वाला तेरा रूप है प्रचंड, तू ही आरंभ तू ही अंत हर हर शंभु, हर हर शंभु, तू ही आरंभ, तू ही अंत।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान शिव के प्रचंड रूप की चर्चा की गई है, जो सृष्टि के आरंभ और अंत के रूप में प्रतिष्ठित हैं। यहाँ 'तेरा रूप है प्रचंड' का अर्थ है कि भगवान शिव की शक्ति और उनकी स्थिति जबर्दस्त और अपार है। वे सृष्टि के संहारक और सृष्टिकर्ता दोनों हैं। शिव का नाम संकीर्तन करना ही भक्ति का सर्वोत्तम साधन है। जब हम कहते हैं 'हर हर शंभु', तो हम उनकी करुणा और उनकी कृपा को अपने जीवन में आमंत्रित कर रहे होते हैं। इस भजन में भगवान शिव की महिमा को गाते समय, हमें उनके प्रति एक संपूर्ण श्रद्धा और प्रेम से भरी भावना का अनुभव होता है।

इस भजन के भावार्थ में एक गहन भावना मौजूद है। जब हम यह कहते हैं कि 'श्री गणेश, तुझको प्रणाम', तो हम श्री गणेश की कृपा भी मांग रहे हैं, जो कि विघ्नहर्ता हैं। भगवान शिव और भगवान गणेश का यह संयोजन भक्तों को यह सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयों से पार पाने के लिए भगवान का स्मरण और भक्ति आवश्यक है। 'तेरा रूप है प्रचंड' यह शब्द केवल शिव के बाह्य स्वरुप की बात नहीं कर रहे, बल्कि उनकी अंतर्दृष्टि, उनकी बुद्धि, और उनके अदृश्य गुणों की भी व्याख्या कर रहे हैं। इस यात्रा में, भक्त की साधना और भगवान की कृपा का अद्वितीय मेल होता है।

श्रीमद् भगवद गीता और उपनिषदों में भगवान शिव की महिमा का बखान मिलता है। शिव, जो सृष्टि के सर्जक हैं और संहारक भी, उनकी भूमिका भक्ति मार्ग में महत्वपूर्ण है। इस भजन में इसे दर्शाते हुए 'तू ही आरंभ, तू ही अंत' बताता है कि शिव का प्रयोजन ही सब कुछ है। भक्त के लिए यह संदेश है कि उस परम सत्य को पहचानें जो इस शरीर, मन और आत्मा से परे है। शिव की भक्ति करना, आत्मा की मुक्ति की ओर अग्रसर होने की एक उत्कृष्ट साधना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान शिव की उपासना का महत्व हमारे ग्रंथों में निहित है। महाभारत और पुराणों में शिव की शक्ति और उनके आदर्शों का उल्लेख है। भजन में 'हर हर शंभु' कहकर भक्त हृदय से महादेव को स्मरण करता है। यह सुनिश्चित करता है कि जहाँ भक्ति, प्रेम और श्रद्धा हो, वहीं भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है। यह संपूर्ण मंत्र यह सिखाता है कि हर संकट का समाधान शक्ति और भक्ति में निहित है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का उच्चारण करने से मानसिक शांति और स्थिरता का अनुभव होता है। इसे गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कठिनाईयों और मानसिक तनाव को दूर करने में मदद करती है। भक्ति से मनुष्य के नैतिक और आध्यात्मिक जीवन में सुधार होता है, और यह आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक कदम है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का समर्पण प्रात: के समय या शाम को करना विशेष लाभकारी है। भगवान शिव को गंगा जल या गंधद्रव्य अर्पित करें और दीप जलाएं। सही मुद्रा में बैठकर ध्यान लगाएं और भावनात्मक रूप से शिव का नाम लेते हुए गाएँ। यह मन को स्थिर करने और भक्ति की भावना को मजबूत करने में सहायक होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में 'तेरा रूप है प्रचंड' का क्या अर्थ है?

यह वाक्यांश भगवान शिव की अपार शक्ति और उनके अद्वितीय स्वरूप को दर्शाता है। वे सृष्टि के आरंभ से लेकर अंत तक विद्यमान हैं, जो उनके शाश्वत स्वरूप को रेखांकित करता है।

भजन में 'हर हर शंभु' का जप करने का महत्व क्या है?

यह भगवान शिव की कृपा को प्राप्त करने का एक माध्यम है। जब भक्त इस नाम का उच्चारण करते हैं, तो ऊर्जा का संचार होता है, जिससे समस्त नकारात्मकता दूर होती है।

इस भजन को गाने का सबसे सही समय क्या है?

सुबह और शाम के समय इस भजन का उच्चारण करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस समय की शांति और ऊर्जा भक्ति को सशक्त बनाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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