Hanuman Bhajan

आगे बजरंगी नाचे पीछे भैरव झूम झूम नाचे लिरिक्स (Aage Bajarangi Nache Pichhe Bhairav Jhum Jhum Nache Lyrics in Hindi) - SHAHNAZ AKHTAR - Bhaktilok

1,577 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:
Bhajan Lyrics & Devotional Guide

आगे बजरंगी नाचे पीछे भैरव झूम झूम नाचे लिरिक्स (Aage Bajarangi Nache Pichhe Bhairav Jhum Jhum Nache Lyrics in Hindi) - SHAHNAZ AKHTAR

भक्ति की अद्भुत और अनूठी परंपरा में संकटमोचन हनुमान जी और बटुक भैरव जी की युगल उपासना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। प्रसिद्ध लोक गायिका शहनाज अख्तर (Shahnaz Akhtar) की सुमधुर वाणी में गाया गया यह लोकप्रिय भजन "आगे बजरंगी नाचे पीछे भैरव झूम झूम नाचे" बजरंगबली और भैरव बाबा के अगाध प्रेम, उनकी अलौकिक शक्ति और उनके भक्तों पर कृपा बरसाने के स्वरूप का सजीव चित्रण करता है। हिंदू सनातन संस्कृति में, विशेषकर मंगलवार, शनिवार, अष्टमी और अमावस्या के पावन अवसरों पर हनुमान जी और भैरव बाबा की पूजा एक साथ करने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त पवनसुत हनुमान जी की शरण में जाता है, उसकी रक्षा स्वयं महाकाल के रुद्र अवतार काल भैरव करते हैं। इस भजन के माध्यम से लेखिका ने दोनों महान देवताओं के नर्तक स्वरूप, उनके श्रृंगार, उनकी सवारी और उनके दिव्य मंदिरों के परिवेश का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, गायन की विधि, इसके धार्मिक महत्व और जीवन में इसके प्रासंगिक संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (Mukhda):

आगे बजरंगी नाचे, पीछे भैरव झूम झूम नाचे,
सिंघ पे सवार हुई दुर्गा भवानी,
दोनों के बिच सजी मूरत सुहानी,
आगे बजरंगी नाचे, पीछे भैरव झूम झूम नाचे...

अंतररा 1:

लाल लाल सिंदूर तन में लगाना, जी बजरंगी बाला,
मन में रखे ना जरा भेद भैरवजी, तन है जो काला,
काली लंगोटी में भैरव सुहाए, लाल लंगोटा हनुमान भाए,
आगे बजरंगी नाचे, पीछे भैरव झूम झूम नाचे...

अंतररा 2:

ऊँची ऊचाई उड़े झूमे कूदे, है बजरंगी बाला,
स्वान पे करते सवारी जो, देखो जी भैरव निराला,
गोल गोल बजरंगी गदा घुमाये, भैरव के हाथो में मुघधर सुहाए,
आगे बजरंगी नाचे, पीछे भैरव झूम झूम नाचे...

अंतररा 3 (अंतिम भाग):

मैया की मढिया में आगे बिराजे है बजरंगी बाला,
पीछे है भैरव का मंदिर मनोहर जो, फल देने वाला,
ध्वजा चढ़ाके लो बजरंग मनाये, सेंदुर तेल दियो भैरव चढ़ाये,
आगे बजरंगी नाचे, पीछे भैरव झूम झूम नाचे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल एक संगीतिक रचना नहीं है, बल्कि यह शक्ति पीठों और हनुमान मंदिरों की उस सनातन व्यवस्था का वर्णन है जहाँ माता दुर्गा, बजरंगबली और काल भैरव की संयुक्त रूप से आराधना की जाती है। भजन की पहली पंक्ति "आगे बजरंगी नाचे पीछे भैरव झूम झूम नाचे" भक्तों के मन में एक अत्यंत दिव्य दृश्य उत्पन्न करती है जहाँ दोनों महान शक्तियां अपनी आराध्य माँ जगदम्बा की प्रसन्नता के लिए आनंद में मग्न होकर नृत्य कर रहे हैं।

मध्य भाग में शहनाज अख्तर जी गाती हैं कि हनुमान जी के शरीर पर लाल सिंदूर सुशोभित है जो उनके पराक्रम और माता सीता के प्रति प्रेम का प्रतीक है, वहीं भैरव बाबा का स्वरूप भले ही श्यामल (काला) वर्ण का हो, किंतु उनके मन में किसी भी प्रकार का छल, कपट या भेद नहीं है। वे परम निर्मल और अपने भक्तों के रक्षक हैं। दोनों ही देवता लंगोटा धारण करते हैं और धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

भजन के अंतिम चरणों में उनके अस्त्र-शस्त्रों जैसे हनुमान जी की स्वर्ण गदा और भैरव जी के हाथों में सुशोभित मुगदर का वर्णन है। यह स्पष्ट करता है कि ये दोनों देवता नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर, बाधाओं और शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। मैया की मढ़िया (मंदिर) में आगे हनुमान जी का पहरा और पीछे भैरव जी का मंदिर इस बात का प्रतीक है कि भक्त चारों ओर से अभय हो जाता है। जो व्यक्ति हनुमान जी को लाल ध्वजा और सिंदूर अर्पित करता है तथा भैरव बाबा को तेल और सिंदूर चढ़ाता है, उसके जीवन के सभी संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • युगल शक्ति की आराधना: यह भजन हनुमान जी और भैरव बाबा की संयुक्त महिमा का गुणगान करने वाला दुर्लभ भजन है।
  • लोक गायिका शहनाज अख्तर की शैली: शहनाज अख्तर की ऊर्जावान और भक्तिमय आवाज इस भजन को जागरण, चौकी और भंडारों में अत्यंत लोकप्रिय बनाती है।
  • संकट मोचन प्रभाव: इस भजन के निरंतर श्रवण या गायन से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
  • शक्तिपीठों की संस्कृति: यह भजन भारत के प्राचीन शक्तिपीठों और भैरव मंदिरों की परंपरा से सीधा जुड़ा हुआ है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस ऊर्जावान भजन को विशेष अवसरों पर सच्चे मन से गाना या सुनना चाहिए:

  • मंगलवार और शनिवार: हनुमान जी और शनि/भैरव देव के वार पर संध्या आरती के समय इसे विशेष रूप से बजाया जा सकता है।
  • माता के जागरण और चौकी में: चूंकि भजन में माँ दुर्गा का भी उल्लेख है, इसलिए किसी भी देवी जागरण के प्रारंभ में यह एक बेहतरीन स्वागत भजन है।
  • अष्टमी और चौदस (चतुर्दशी): भैरव अष्टमी या मासिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन इस भजन का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • मानसिक शक्ति के लिए: जब भी जीवन में अज्ञात भय या बाधाएं आएं, तब इस भजन को सुनकर आत्मबल बढ़ाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य संकटमोचन हनुमान जी और महाकाल भैरव जी हैं, जिनके साथ जगत जननी माँ दुर्गा (भवानी) का सान्निध्य है। सनातन धर्म में हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना गया है और भैरव बाबा को भी शिव का ही अत्यंत उग्र और रक्षक स्वरूप माना जाता है। दोनों ही देवता अपने भक्तों के सबसे निकट माने गए हैं जो थोड़ी सी ही सच्ची आराधना से प्रसन्न होकर साधक के सभी कष्ट हर लेते हैं। प्रसिद्ध लोक गायिका शहनाज अख्तर ने अपनी अनूठी गायकी से इस धार्मिक भाव को जन-जन तक पहुँचाया है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
बजरंगी बजरंगबली हनुमान जिनका शरीर वज्र के समान मजबूत है
भैरव काल भैरव / बटुक भैरव भगवान शिव का रुद्र रूप, जो भय का नाश करते हैं
सिंघ पे सवार शेर पर विराजमान माँ दुर्गा का दिव्य वाहन
मुघधर मुगदर / गदा जैसी भारी गदा भैरव बाबा का पारंपरिक अस्त्र
सेंदुर तेल सिंदूर और चमेली का तेल हनुमान जी और भैरव जी को अर्पित किया जाने वाला लेप

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात निम्नलिखित पावन मंत्रों का स्मरण करना चाहिए:

ॐ हं हनुमते नमः

अथवा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।

ॐ बं बटुक भैरवाय नमः

भैरव बाबा की प्रसन्नता और भय मुक्ति का महामंत्र।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम आगे बजरंगी नाचे पीछे भैरव झूम झूम नाचे (Aage Bajarangi Nache Pichhe Bhairav Nache)
गायिका शहनाज अख्तर (SHAHNAZ AKHTAR)
मुख्य आराध्य संकटमोचन हनुमान जी एवं काल भैरव जी
संगीत शैली लोक भजन / माता की चौकी और जागरण गीत
भाषा हिंदी / लोक भाषा
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, जागरण, भंडारा, शक्ति पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: आगे बजरंगी नाचे पीछे भैरव झूम झूम नाचे भजन की गायिका कौन हैं?

इस प्रसिद्ध और ऊर्जावान भजन को लोकप्रिय लोक गायिका शहनाज अख्तर (Shahnaz Akhtar) ने अपनी सुमधुर आवाज में गाया है।

Q2: यह भजन मुख्य रूप से किस देवता या देवी को समर्पित है?

यह भजन मुख्य रूप से भगवान हनुमान और काल भैरव को समर्पित है, जिसमें माँ दुर्गा के सान्निध्य का भी सुंदर वर्णन है।

Q3: इस भजन को किस दिन और समय सुनना सबसे अच्छा होता है?

इस भजन को मंगलवार, शनिवार, और नवरात्रि के दिनों में तथा संध्या आरती या जागरण के समय सुनना सबसे उत्तम माना जाता है।

Q4: हनुमान जी और भैरव जी की पूजा एक साथ क्यों की जाती है?

सनातन परंपरा के अनुसार, हनुमान जी और भैरव जी दोनों ही भगवान शिव के अंश और रुद्र रूप हैं। इनकी एक साथ पूजा करने से सभी प्रकार के भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।

Q5: क्या इस भजन को घर पर आयोजित होने वाले जागरण में गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन माता की चौकी, सुंदरकांड पाठ के बाद या किसी भी धार्मिक जागरण में समा बांधने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

Q6: भजन में 'सिंघ पे सवार हुई दुर्गा भवानी' का क्या तात्पर्य है?

इसका तात्पर्य यह है कि हनुमान जी और भैरव जी दोनों ही शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की सेवा और उनकी सुरक्षा में तत्पर रहते हैं।

Q7: भैरव बाबा को क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?

भैरव बाबा को सिंदूर, तेल, मीठी रोटी, उड़द के पकौड़े और मदिरा (स्थानिय परंपरा अनुसार) या दूध का भोग लगाया जाता है।

Q8: इस भजन को पढ़कर जीवन में क्या प्रेरणा मिलती है?

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की शरण में जाने पर सारे अहंकार और भेद मिट जाते हैं तथा भक्त पूरी तरह से निर्भय हो जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख पारंपरिक लोक संगीत, पौराणिक कथाओं और भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें शहनाज अख्तर द्वारा गाए गए लोकप्रिय भजन के बोलों को शुद्ध देवनागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों और भक्तों को उच्चारण में कोई असुविधा न हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • शहनाज अख्तर भक्ति एलबम एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग
  • सनातन धर्म के पौरूष एवं शक्ति उपासना ग्रंथ

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!