इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे उधर दशरथ घर भगवान जन्मे लिरिक्स (Idhar anjani ghar hanuman janme Lyrics in Hindi) -
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे
महलों में खुशियाँ अयोध्या में आनंद
इधर पवन पिता झूम रहें मन में
हनुमान के रूप में खुद त्रिलोकी
राम के रूप में खुद श्री विष्णु
हनुमान खेलेंगे कुटिया में
श्रीराम खेलेंगे आँगन में
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे..||
सोने के पालने में श्री राम झूले
मैया की बहियाँ में हनुमान झूले
वहाँ कौशल्या लोरी सुनाये
अंजनी दिखाए यहां मोह हनुमत में
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे..||
महलों में रघुवर की बाल लीला
जंगल में मंगल करे मंगलकारी
देवों के हित को जनम दोनों का
दोनों की रूचि हरी के भजन में
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे..||
दोनों के चरनन चूमे भक्त मंडल
एक गुरु एक चेला अलबेला
श्री राम बिन हनुमान अधूरे
हनुमान बिन श्री राम उलझन में
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे..||
Singer - Narender Kaushik
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे उधर दशरथ घर भगवान जन्मे लिरिक्स (Idhar anjani ghar hanuman janme Lyrics in Hindi) - Narender Kaushik Hanuman Bhajan - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।
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