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मैं तेरे द्वार भोलेनाथ फिर से आई हु भजन लिरिक्स (Mai Tere Dwar Bholenath phir Se Aayi Hu Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan Srishti Lakshmi Thakur - Bhaktilok

82 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मैं तेरे द्वार भोलेनाथ फिर से आई हु भजन लिरिक्स (Mai Tere Dwar Bholenath Phir Se Aayi Hu Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan Srishti Lakshmi Thakur

अपडेटेड: अप्रैल 2026 श्रेणी: Bholenath Bhajan Lyrics गायिका: सृष्टि लक्ष्मी ठाकुर (Srishti Lakshmi Thakur)

देवादिदेव महादेव भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। उनके चरणों में शरण पाने के लिए भक्त सदियों से विभिन्न माध्यमों से अपनी हाजिरी लगाते आए हैं। प्रसिद्ध शिव भजन "मैं तेरे द्वार भोलेनाथ फिर से आई हु" (Mai Tere Dwar Bholenath Phir Se Aayi Hu Lyrics in Hindi) एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मिक शांति प्रदान करने वाली रचना है, जिसे लोकप्रिय गायिका सृष्टि लक्ष्मी ठाकुर ने अपनी मधुर वाणी से सजाया है। इस भजन का मुख्य भाव एक समर्पित भक्त की अपने आराध्य भोलेनाथ के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, पुकार और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। जब भक्त संसार की भागदौड़ और दुखों से थककर थक-हारकर अपने प्रभु के द्वार पर पहुंचता है, तो उसे जो शांति और आश्रय मिलता है, उसका सुंदर चित्रण इस रचना में किया गया है। प्रातःकाल की पूजा, सावन मास के सोमवार, शिवरात्रि या किसी भी विशेष अनुष्ठान के दौरान इस भजन का श्रवण और गायन साधक के मन को शिवमय कर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और पूरे भक्ति भाव के साथ भगवान शिव को समर्पित इस पावन भजन के संपूर्ण बोल नीचे दिए गए हैं:

॥ स्थायित्व / मुखड़ा ॥

मैं तेरे द्वार भोलेनाथ, फिर से आई हूँ,

अपनी झोली फैलाने को, दर पे आई हूँ।

॥ अंतरा 1 ॥

दुनिया के ठुकराए हुओं को तू ही अपनाता है,

टूटे हुए दिलों को साहिब, तू ही सहलाता है।

तेरी रहमत की छांव में, सुख पाने आई हूँ,

मैं तेरे द्वार भोलेनाथ, फिर से आई हूँ।

॥ अंतरा 2 ॥

गंगा धारी, भस्म रमीती, रूप तुम्हारा प्यारा,

इस भवसागर में बाबा, तू ही है सहारा।

तेरे चरणों में शीश झुकाने, आज मैं आई हूँ,

मैं तेरे द्वार भोलेनाथ, फिर से आई हूँ।

॥ अंतरा 3 ॥

सुख-दुख जीवन के पहिये हैं, ये मैंने माना,

तेरे बिना हे भोले मैंने, कुछ नहीं जाना।

पाप-पुण्य के बंधन सारे, काटने आई हूँ,

मैं तेरे द्वार भोलेनाथ, फिर से आई हूँ।

॥ समापन / रिफ्रेन ॥

भोले ओ भोले, मेरे शंभू मेरे भोले,

तेरी कृपा बिन कोई ना डोले।

सुन लो पुकार मेरी, अरदास लगाई हूँ,

मैं तेरे द्वार भोलेनाथ, फिर से आई हूँ।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन का प्रत्येक शब्द साधक की अंतरआत्मा की पुकार को व्यक्त करता है। आइए इसके विस्तृत भावार्थ को समझें:

मुखड़ा और प्रारंभिक पंक्तियाँ: भक्त अपने आराध्य भगवान शिव के दरबार में हाजिरी देते हुए कहती है कि हे भोलेनाथ! मैं एक बार फिर से आपके पवित्र द्वार पर आई हूँ। सांसारिक दुखों और असफलताओं से निराश होकर मैं अपनी खाली झोली को आपकी कृपा से भरने की प्रार्थना लेकर आपके समक्ष उपस्थित हुई हूँ। यह इस बात का प्रतीक है कि जीव चाहे कितनी भी बार ठोकर खाए, अंततः उसे परम शांति केवल शिव के चरणों में ही मिलती है।

अन्तरों का आध्यात्मिक संदेश: भजन में आगे कहा गया है कि यह संसार जब किसी को दुत्कार देता है और अपने रास्ते से भटका देता है, तब केवल भोलेनाथ ही हैं जो बाहें फैलाकर अनाथ और दुखी जीवों को गले लगाते हैं। शिव का स्वरूप कल्याणकारी है—उनके मस्तक पर गंगा विराजमान है, वे श्मशान की भस्म रमाने वाले वैरागी हैं, फिर भी अपने भक्तों के लिए वे अत्यंत कृपालु और सुलभ हैं। साधक मानती है कि सुख और दुख जीवन के अनिवार्य अंग हैं, परंतु इन बंधनों से मुक्ति पाने का एकमात्र मार्ग शिवभक्ति है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का सजीव चित्रण: यह भजन जीव और ईश्वर के बीच के प्रेमपूर्ण और निश्चल संबंध को उजागर करता है।
  • आकर्षक स्वर एवं संगीत: गायिका सृष्टि लक्ष्मी ठाकुर की भावपूर्ण आवाज इस भजन को अत्यंत कर्णप्रिय और ध्यानमग्न बनाने वाली बनाती है।
  • मानसिक शांति का स्रोत: इस भजन का निरंतर श्रवण करने से मन का तनाव, चिंता और अवसाद दूर होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शिव उपासना में सहायक: सोमवार व्रत, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में इस भजन का पाठ या गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान शिव के इस भजन को किसी भी पवित्र समय में गाया या सुना जा सकता है, परंतु इसकी दिव्यता को पूरी तरह अनुभव करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन किया जा सकता है:

  • उत्तम समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात या प्रदोष काल (संध्या के समय) में शिव मंदिर में अथवा घर के पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करके।
  • विशेष अवसर: सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और साप्ताहिक शिव सत्संग के दौरान।
  • मानसिक स्थिति: भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, विनय और समर्पण का भाव होना चाहिए। आँखों को बंद करके शिव के ध्यान में मग्न होना इस भजन का वास्तविक आनंद है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवों के देव भगवान शिव (भोलेनाथ) हैं। सनातन संस्कृति में शिव को संहारक के साथ-साथ परम कल्याणकारी, आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) और योगेश्वर माना गया है। शिव की आराधना से न केवल भुक्ति (भोग) बल्कि मुक्ति (मोक्ष) की प्राप्ति भी होती है। समकालीन भजन परंपरा में सृष्टि लक्ष्मी ठाकुर जैसी युवा और प्रतिभाशाली कलाकारों ने आधुनिक संगीत संयोजन के साथ पारंपरिक भक्ति भाव को पुनर्जीवित किया है, जिससे आज की युवा पीढ़ी भी शिव साधना से जुड़ रही है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"मैं तेरे द्वार भोलेनाथ फिर से आई हूँ" भजन आधुनिक भारतीय भक्ति संगीत की एक ऐसी अनमोल कृति है जो लोक संगीत और शास्त्रीय सुगम संगीत के सुंदर समन्वय से रची गई है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य समाज के उस वर्ग को आध्यात्मिक संबल प्रदान करना है जो जीवन के संघर्षों से जूझ रहा है। संगीत प्रेमियों और शिव भक्तों के बीच यह भजन विशेष रूप से यूट्यूब और अन्य डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म्स पर अत्यंत लोकप्रिय हुआ है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और सुबोध हिंदी है, जिसे आमजन आसानी से समझ सकता है और गुनगुना सकता है। इसमें रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे—'भवसागर', 'झोली फैलाना', और 'रहमत की छांव'। यह काव्य शैली सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है और बिना किसी कठिन शब्दावली के ईश्वर के प्रति प्रेम के भाव को जगाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, मनुष्य को अपना अहंकार छोड़कर ईश्वर के चरणों में शरण लेनी चाहिए।
  • अटूट विश्वास: शिव पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि वे अपने भक्तों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करते।
  • समर्पण भाव: सुख और दुख दोनों ही अवस्थाओं में भगवान को स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
द्वार दरवाजा / शरण भगवान शिव का पावन दरबार या शरणस्थली
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म-मृत्यु और दुखों से भरा संसार
भस्म रमीती शरीर पर भस्म लगाने वाले भगवान शिव का वैराग्यपूर्ण स्वरूप
रहमत कृपा / अनुकंपा शिव का आशीर्वाद और प्रेम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मैं तेरे द्वार भोलेनाथ, फिर से आई हूँ..."
भक्त अपने आराध्य शिव से कहती है कि हे प्रभु! मैं बार-बार आपके दर पर अपनी प्रार्थना लेकर आती हूँ क्योंकि मुझे विश्वास है कि मेरा वास्तविक घर आपके चरणों में ही है।

"दुनिया के ठुकराए हुओं को तू ही अपनाता है..."
यह संसार स्वार्थी है और कमजोर को ठुकरा देता है, परंतु आशुतोष शिव ऐसे हैं जो दीन-दुखियों को अपने गले लगाते हैं और उनका मार्ग प्रशस्त करते हैं।

"गंगा धारी, भस्म रमीती, रूप तुम्हारा प्यारा..."
शिव का वह रूप जिसमें उनकी जटाओं से गंगा बहती है और शरीर पर श्मशान की भस्म रमी रहती है, भक्तों को अत्यंत प्रिय और आकर्षक लगता है क्योंकि यह मोह-माया से परे होने का संदेश देता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात निम्नलिखित शिव मंत्र का स्मरण करना अत्यधिक लाभकारी होता है:

ॐ नमः शिवाय ॥

मृत्युंजय महेश्वराय शूलपाणये नमः शिवाय ॥

आप शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करके अपनी शिव साधना को और अधिक पूर्ण कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मैं तेरे द्वार भोलेनाथ फिर से आई हूँ (Mai Tere Dwar Bholenath Phir Se Aayi Hu)
आराध्य देव भगवान शिव (भोलेनाथ / महादेव)
गायिका सृष्टि लक्ष्मी ठाकुर (Srishti Lakshmi Thakur)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक शैली
विषय / थीम शिव भक्ति, शरणागति और आत्मसमर्पण
मुख्य भाव भक्ति, विनय, करुणा और विश्वास
उपयुक्त अवसर सावन सोमवार, शिवरात्रि, प्रदोष व्रत एवं दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस लोकप्रिय शिव भजन को गायिका सृष्टि लक्ष्मी ठाकुर (Srishti Lakshmi Thakur) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

उत्तर: यह भजन देवादिदेव महादेव भगवान शिव (भोलेनाथ) को समर्पित है।

उत्तर: इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, सावन मास में, सोमवार के दिन या शिवरात्रि के अवसर पर सुनना अत्यंत शांतिदायक और फलदायी होता है।

उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को सभी तरफ से निराश होने पर भी भगवान शिव पर अटूट विश्वास रखना चाहिए और उनके चरणों में पूर्ण समर्पण करना चाहिए।

उत्तर: हाँ, इसे घर पर अकेले ध्यान लगाते हुए अथवा परिवार के साथ सत्संग में श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।

उत्तर: शिव साधना से मानसिक शांति, भय से मुक्ति, संकटों का निवारण और अंततः आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

उत्तर: हाँ, भजन सुनने के पश्चात 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप रुद्राक्ष माला से करना बहुत ही श्रेष्ठ माना गया है।

उत्तर: यह भजन देवनागरी (हिंदी) लिपि में संपूर्ण अर्थ और भावार्थ के साथ ऊपर उपलब्ध कराया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य शिव भक्तों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, सटीक भावार्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। सभी पावन ग्रंथों और पारंपरिक लोकगीत परंपराओं का सम्मान करते हुए इस लेख को उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ तैयार किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण एवं पौराणिक संदर्भ
  • पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • भक्ति संगीत संग्रह एवं कलाकार प्रस्तुति संदर्भ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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