वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में भजन | Welcome Ganesha Tera Mere Pariwar Me Bhajan
भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य, नए व्यापार, गृह प्रवेश, विवाह अथवा परीक्षा के आरंभ में सर्वप्रथम गणपति बप्पा का ही स्मरण किया जाता है। "वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में" एक अत्यंत ही मधुर, भावपूर्ण और प्रसिद्ध गणेश भजन है, जिसे प्रसिद्ध भजन गायक पंकज नागिया (Pankaj Nagia) जी ने अपनी मधुर वाणी में प्रस्तुत किया है। यह भजन भगवान गणेश के स्वागत, उनकी महिमा और उनके आशीर्वाद की कामना से ओत-प्रोत है। इस भजन में भक्त अपने घर और परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और बुद्धि की प्राप्ति के लिए गणपति बप्पा का आह्वान करता है। इस भजन की भक्ति भावना अत्यंत ही सरल और हृदयस्पर्शी है, जो श्रोताओं के मन को तुरंत छू लेती है। यह भजन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, विवाह, गृह प्रवेश, नवरात्रि और दीपावली के पावन अवसरों पर गाया जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
आओ गणपति बप्पा, आओ गणपति बप्पा
मेरे घर में पधारो, मंगल गीत गाओ
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
गजानन बप्पा, विघ्न विनाशक
बुद्धि के दाता, सुख के दाता
तेरे चरणों में शीश झुकाएं
तेरी महिमा अपरंपार है
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
ऋद्धि-सिद्धि के तुम हो स्वामी
शुभ-लाभ के तुम हो दाता
तेरे आने से घर में आई
खुशियों की बहार है
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
मोदक प्रिय है तुझे गणपति
दूर्वा और लड्डू का भोग लगाएं
तेरी कृपा से सब कुछ पाया
तेरा ही आधार है
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा
हे गणपति बप्पा, तेरी जय जयकार है
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
आओ गणपति बप्पा, आओ गणपति बप्पा
मेरे घर में पधारो, मंगल गीत गाओ
वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त भगवान गणेश जी का अपने परिवार में हार्दिक स्वागत करता है। "वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में" पंक्ति के माध्यम से भक्त गणपति बप्पा को अपने घर का सदस्य बनाने की कामना करता है। भक्त कहता है कि हे गणपति बप्पा, आप मेरे घर में पधारो और मंगल गीत गाओ। आपके आने से मेरे घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा।
भजन में भगवान गणेश को "गजानन" और "विघ्न विनाशक" कहा गया है। गजानन का अर्थ है हाथी के मुख वाले भगवान, जो अपनी विशाल बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। विघ्न विनाशक का अर्थ है वे देवता जो जीवन के सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं को दूर करते हैं। भक्त कहता है कि आप बुद्धि के दाता और सुख के दाता हैं। आपकी महिमा अपरंपार है।
भजन की अगली पंक्तियों में भक्त गणेश जी को "ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी" और "शुभ-लाभ के दाता" कहता है। ऋद्धि और सिद्धि भगवान गणेश की दो पत्नियाँ मानी जाती हैं, जो समृद्धि और सफलता की प्रतीक हैं। शुभ और लाभ गणेश जी के दो पुत्र हैं, जो शुभता और लाभ के प्रतीक हैं। भक्त कहता है कि आपके आने से घर में खुशियों की बहार आ गई है।
भजन में भगवान गणेश को "मोदक प्रिय" बताया गया है। मोदक, लड्डू और दूर्वा गणेश जी के प्रिय भोग हैं। भक्त कहता है कि हे गणपति, हम आपको मोदक, दूर्वा और लड्डू का भोग लगाते हैं। आपकी कृपा से हमें सब कुछ प्राप्त हुआ है। आप ही हमारे जीवन का आधार हैं।
भजन के अंत में "वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ" मंत्र का उच्चारण किया गया है। यह मंत्र भगवान गणेश का प्रसिद्ध वंदना मंत्र है, जिसका अर्थ है - हे वक्रतुंड (टेढ़ी सूंड वाले), महाकाय (विशाल शरीर वाले), सूर्य के करोड़ों गुना तेज वाले भगवान, मेरे सभी कार्यों को निर्विघ्न संपन्न करें। भक्त कहता है कि हे गणपति बप्पा, तेरी जय जयकार है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन भगवान गणेश जी की भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है। इस भजन की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- सरल भाषा: भजन की भाषा अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है, जिसे कोई भी भक्त आसानी से गा सकता है।
- भक्ति भाव: भजन में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का भाव प्रबल है।
- मंगलकारी: यह भजन मंगलकारी और शुभ फल देने वाला माना जाता है।
- पारिवारिक सुख: भजन में परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई है।
- विघ्न नाशक: भजन में भगवान गणेश से विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की गई है।
गणेश पुराण के अनुसार, भगवान गणेश की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति और समृद्धि आती है। भगवान गणेश को "विघ्नहर्ता" कहा जाता है, जो सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं को दूर करते हैं। इस भजन को नियमित रूप से सुनने और गाने से भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है। विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- गणेश चतुर्थी: भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर इस भजन का गायन विशेष महत्व रखता है।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश करते समय गणपति बप्पा का स्वागत इस भजन से किया जाता है।
- विवाह: विवाह के शुभ अवसर पर गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए।
- व्यापार आरंभ: नए व्यापार या कार्य के आरंभ में विघ्नों को दूर करने के लिए।
- प्रातःकाल: सुबह स्नान के बाद गणेश जी की पूजा करते समय इस भजन का गायन करना चाहिए।
- संध्या काल: दीपक जलाकर गणेश जी की आरती के समय भी इस भजन को गाया जा सकता है।
भजन गाने की विधि: सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गणेश जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक और अगरबत्ती जलाएं। गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। फिर हाथ जोड़कर भक्ति भाव से इस भजन का गायन करें। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "वेलकम गणेशा तेरा मेरे परिवार में" भजन किसने गाया है?
उत्तर: यह प्रसिद्ध गणेश भजन पंकज नागिया (Pankaj Nagia) जी ने अपनी मधुर वाणी में गाया है। यह भजन भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
प्रश्न 2: इस भजन को कब गाना चाहिए?
उत्तर: इस भजन को गणेश चतुर्थी, गृह प्रवेश, विवाह, नए कार्य के आरंभ, प्रातःकालीन पूजा और संध्या आरती के समय गाया जा सकता है।
प्रश्न 3: क्या इस भजन को सुनने से विघ्न दूर होते हैं?
उत्तर: हाँ, भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। इस भजन को श्रद्धा और भक्ति भाव से सुनने और गाने से जीवन के विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं।
प्रश्न 4: भगवान गणेश को कौन सा भोग प्रिय है?
उत्तर: भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, दूर्वा और केला विशेष प्रिय है। इस भजन में भी मोदक, दूर्वा और लड्डू का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 5: क्या इस भजन को गाने से परिवार में सुख-शांति आती है?
उत्तर: हाँ, इस भजन में परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई है। नियमित रूप से इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वास होता है।
प्रश्न 6: गणेश जी की पूजा में कौन सा मंत्र का उच्चारण करना चाहिए?
उत्तर: गणेश जी की पूजा में "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र और "वक्रतुंड महाकाय" मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इस भजन में भी "वक्रतुंड महाकाय" मंत्र का उल्लेख है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस भजन के लिरिक्स, अर्थ और महत्व को शास्त्रीय ग्रंथों, गणेश पुराण और पारंपरिक भक्ति परंपरा के आधार पर संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य भक्तों तक शुद्ध और सटीक भक्ति सामग्री पहुँचाना है।
संदर्भ: गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, और पारंपरिक गणेश भक्ति परंपरा।
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