माता रानी के चरणों में समर्पित यह पावन भजन "अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी" (Ab Meri Bhi Sun Lo He Maat Bhavani Lyrics) आदिशक्ति जगदम्बा की असीम करुणा, वात्सल्य और महिमा का एक अत्यंत सुंदर और भावुक गुणगान है। सनातन धर्म में माँ भगवती को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी, पालनहार और संहारक शक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह भजन एक ऐसे भक्त की पुकार है जो अपने जीवन के दुखों, अज्ञानता और सांसारिक बंधनों से त्रस्त होकर अपनी आराध्य माँ के चरणों में शरण लेता है। माँ भवानी के विभिन्न रूपों—शारदा, लक्ष्मी, महाकाली और जगदम्बा—का इस भजन में अत्यंत सजीव और मनोहारी वर्णन किया गया है। जब कोई साधक या भक्त पूरे समर्पण भाव से इस भजन का गन करता है, तो उसके हृदय में अदम्य साहस, भक्ति और मानसिक शांति का संचार होता है। यह रचना न केवल माता के दरबार की महिमा का बखान करती है, बल्कि साधक के भीतर यह विश्वास भी जगाती है कि सच्ची पुकार कभी अनसुनी नहीं रहती। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, गायन की विधि, जीवन में इसके महत्व और माता रानी की कृपा प्राप्त करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
अस्थाई / मुखड़ा:
अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी,
मैं तेरा ही बालक हूँ जगत महारानी!
अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी...
अंतरा 1:
सिंह सवारी करने वाली तेरी शान निराली है,
तू है शारदा तू ही लक्ष्मी तू ही महाकाली है।
शुंभ-निशुम्भ पापी तूने संघारे,
महिषासुर के जैसे तुमने ही मारे!
भक्तों के सारे संकट तुमने ही टारे,
मैं भी हूँ आया मैया तेरे द्वारे।
तेरा यश है उज्जवल निर्मल ज्यूँ गंगा का पानी,
ब्रह्मा विष्णु शंकर ने भी आद्यशक्ति को माना है!
जय जगदम्बे जय जगदम्बे वेद पुराण बखाना है...
अंतरा 2:
शक्ति से ही सेवा होती शक्ति से ही मान है,
शक्ति से ही विजयी होता हर इंसान है।
शक्ति से ही भक्ति होती भक्ति में कल्याण माँ,
दे दो मुझे भी भक्ति गाऊँ गुणगान माँ!
कैसे मैं गुणगान करूँ मैं तो हूँ अज्ञानी,
कण-कण में है देखी सबने कैसे जोत समायी है!
भीड़ पड़े जब भक्तों पे माँ दौड़ी-दौड़ी आई है...
अंतरा 3:
मेरी पुकार सुन लो दर्श दिखा दो,
कर दो दया की दृष्टि गले से लगा लो।
भक्तों का मैया तुमने भाग्य सवारा,
आया शरण में लक्खा एक दुखियारा।
कर देवकीनंदन पे ओ मैया मेहरबानी,
अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी,
मैं तेरा ही बालक हूँ जगत महारानी!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस पवित्र और अटूट संबंध को दर्शाता है जहाँ संतान अपनी माता के सम्मुख अपनी निर्बलता और अज्ञानता को स्वीकार करते हुए उसकी शरण में जाती है। भजन की शुरुआत इस भाव से होती है कि हे जगत की महारानी भवानी! मैं आपकी ही संतान हूँ, अतः आप मेरी पुकार को अनसुना न करें। सिंह पर सवारी करने वाली माँ भवानी का स्वरूप संपूर्ण ब्रह्मांड में अद्वितीय और सर्वशक्तिमान है।
भजन में आगे बताया गया है कि वही माँ आदिशक्ति ज्ञान की देवी शारदा, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी तथा संहार और शक्ति की प्रतीक महाकाली हैं। माँ ने ही प्राचीन काल में शुंभ-निशुम्भ और महिषासुर जैसे भीषण असुरों का संहार करके ब्रह्मांड को भयमुक्त किया था। जब-जब भक्तों पर संकट आया, माँ ने दौड़े चले आकर उनके सभी दुखों का निवारण किया है। रचनाकार यह स्वीकार करता है कि वह स्वयं अज्ञानी है और उसके पास स्तुति करने के लिए बड़े-बड़े शब्द नहीं हैं, किंतु उसकी सच्ची भावना ही उसकी सबसे बड़ी पूजा है। अंत में, देवकीनंदन (रचियता) माँ से यह प्रार्थना करते हैं कि वे अपने इस दीन बालक पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और उसे अपनी भक्ति का वरदान दें।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
माता रानी के भजनों की श्रृंखला में इस भजन का विशेष स्थान है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समर्पण भाव: यह भजन साधक के भीतर अहंकार को त्यागकर पूर्ण शरणागति (Surrender) का भाव जागृत करता है।
- देवी के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण: इसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती—तीनों देवियों की शक्तियों का एक ही स्थान पर समन्वय दिखाया गया है।
- पौराणिक संदर्भ: भजन में महिषासुर और शुंभ-निशुम्भ वध का उल्लेख है, जो यह प्रमाणित करता है कि धर्म की रक्षा के लिए माँ हमेशा तत्पर रहती हैं।
- सुलभता एवं संगीतमयता: इसकी लय इतनी सरल और मधुर है कि इसे किसी भी मंदिर, सत्संग या घर पर होने वाले अनुष्ठान में आसानी से गाया जा सकता है।
- अधिक जानकारी और देवी स्तोत्रों के लिए आप श्री तुलजा भवानी आरती का भी पाठ कर सकते हैं, जो माता की आराधना का एक अन्य प्रमुख स्रोत है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को किसी भी पवित्र अवसर पर गाया या सुना जा सकता है:
- नित्य पूजा के समय: प्रातःकाल या संध्याकालीन माँ दुर्गा की आरती के पश्चात इस भजन का स्मरण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- नवरात्रि के दौरान: चैत्र या शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में माँ भगवती के विभिन्न स्वरूपों के पूजन के समय यह भजन विशेष रूप से प्रासंगिक है।
- जागरण और चौकी: माता के जागरण, कन्या पूजन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मंडली में इस भजन को गाने से भक्तिमय वातावरण बनता है।
- मानसिक शांति के लिए: जब भी जीवन में कठिनाइयां आएं या मन विचलित हो, इस भजन के बोलों का मानसिक पाठ करने से अद्भुत आत्मबल प्राप्त होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की केंद्र बिंदु माँ आदिशक्ति जगदम्बा, भवानी हैं। सनातन परंपरा में आदि शक्ति को ही इस संपूर्ण सृष्टि का मूल कारण माना गया है। ब्रह्म देव, भगवान विष्णु और देवों के देव महादेव ने भी अपनी लीलाओं के संचालन के लिए इसी महाशक्ति की आराधना की है। भजन के अंत में रचनाकार 'देवकीनंदन' जी ने अपनी भक्ति का परिचय देते हुए माँ के चरणों में अपनी अर्जी लगाई है। संतों और भक्तों का यह अटूट विश्वास रहा है कि माता अपने बालकों की पुकार कभी खाली नहीं जाने देतीं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भक्ति साहित्य की यह रचना लोक-संगीत और पारंपरिक भजन परंपरा से प्रेरित है। लोक कलाकारों और माता के भक्तों द्वारा इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया गया है। इसमें प्रयुक्त शब्दावली ब्रज और खड़ी बोली का एक सुंदर मिश्रण है, जो आम जनमानस के हृदय को आसानी से छू लेती है। रचनाकार ने अत्यंत सरल शब्दों में माँ के पराक्रम और वात्सल्य का जो चित्र खींचा है, वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। आप भगवान की अन्य स्तुतियों के लिए श्री सुब्रह्मण्य अष्टोत्तर शतनामवली का भी अध्ययन कर सकते हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सहज, सरल और प्रवाहित हिंदी (लोक भाषा) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग देखने को मिलता है जैसे — "सिंह सवारी करने वाली तेरी शान निराली है"। शब्दों का चयन ऐसा है कि बच्चा हो या वृद्ध, हर कोई इसे आसानी से गुनगुना सकता है। काव्यात्मक दृष्टि से यह भजन टेक (मुखड़े) और अंतरा पद्धति पर आधारित है, जो इसे संगीतबद्ध करने में अत्यंत सुगम बनाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक सत्य सिखाता है:
- अहंकार का त्याग: "मैं तो हूँ अज्ञानी" पंक्ति यह सिखाती है कि ईश्वर के सामने ज्ञान का अहंकार छोड़कर विनम्र होना चाहिए।
- विश्वास की शक्ति: संकट के समय घबराने के बजाय माता का स्मरण करना ही सबसे बड़ा उपाय है।
- माता का वात्सल्य: जैसे एक माँ अपनी संतान के दुर्गुणों को नजरअंदाज करके उसे गले लगाती है, वैसे ही जगदम्बा भी अपने भक्तों के सारे दोष क्षमा कर देती हैं।
- कर्म और भक्ति का संतुलन: शक्ति से ही मान, विजय और भक्ति संभव होती है, अतः जीवन में आत्मबल और देव-भक्ति दोनों का होना आवश्यक है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| मात भवानी | माता पार्वती / दुर्गा | ब्रह्मांड की पालक और आदिशक्ति का एक स्वरूप। |
| शारदा | माता सरस्वती | विद्या, ज्ञान, और कला की अधिष्ठात्री देवी। |
| शुंभ-निशुम्भ | पौराणिक राक्षस | असुर जिनका वध माँ दुर्गा ने अपनी शक्ति से किया था। |
| महिषासुर | भैंसे के रूप वाला असुर | अधम प्रवृत्तियों का प्रतीक जिसका संहार माँ ने किया। |
| आद्यशक्ति | मूल शक्ति | वह शक्ति जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है। |
| अज्ञानी | ज्ञानहीन / बालक | ईश्वर के समक्ष स्वयं को विनम्र रूप में प्रस्तुत करना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
1. "अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी, मैं तेरा ही बालक हूँ जगत महारानी!"
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे ब्रह्मांड की स्वामिनी माँ! इस विशाल संसार में आपके सिवा मेरा कोई अन्य सहारा नहीं है। मैं आपकी ही संतान हूँ, इसलिए कृपया मेरी पुकार सुनिए।
2. "सिंह सवारी करने वाली तेरी शान निराली है, तू है शारदा तू ही लक्ष्मी तू ही महाकाली है।"
भावार्थ: माँ सिंह पर विराजमान होती हैं और उनका वैभव अलौकिक है। वही माँ ज्ञान, धन और शक्ति—तीनों रूपों में संपूर्ण जगत को संचालित करती हैं।
3. "शक्ति से ही भक्ति होती भक्ति में कल्याण माँ, दे दो मुझे भी भक्ति गाऊँ गुणगान माँ!"
भावार्थ: बिना आंतरिक शक्ति और सामर्थ्य के ईश्वर की सच्ची भक्ति संभव नहीं है। भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसे ऐसी भक्ति प्रदान करें जिससे उसका कल्याण हो सके और वह निरंतर माँ का यशगान कर सके।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"
अर्थात: हे नारायणि! आप सब प्रकार का मंगल करने वाली हैं, कल्याणमयी हैं, सब प्रकार के पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। हे शरण में आए हुए की रक्षा करने वाली त्रिनेत्रधारी गौरी! आपको बार-बार नमस्कार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी (Ab Meri Bhi Sun Lo He Maat Bhavani) |
|---|---|
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / आदिशक्ति भवानी |
| भजन की भाषा | सरल हिंदी / ब्रज मिश्रित खड़ी बोली |
| मुख्य भाव | शरणागति, विनय, प्रेम और भक्ति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, नित्य पूजा |
| संबंधित श्रेणी | Matarani Bhajan / Devotional Songs |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और व्याख्या को सनातन धर्म की पारंपरिक मान्यताओं, देवी पुराणों और लोक-भक्ति परंपरा के आधार पर अत्यंत प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण आध्यात्मिक संतोष और सही जानकारी प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) - गीताप्रेस गोरखपुर
- पारंपरिक माता के भजन एवं लोकगीत संग्रह
- सनातन धर्म एवं शक्ति पूजा परंपरा के ग्रंथ
संबंधित भजन एवं लेख
माता रानी की महिमा से जुड़े अन्य पावन पाठ और स्तोत्र पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें