Parvati Stotram

जयकारा शेरावाली का बोलो जयकारा लिरिक्स (Jaikara sherawali ka bolo jaikara Lyrics in Hindi) - Sherawali Ma Bhajan - Bhaktilok

1,190 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जयकारा शेरावाली का बोलो जयकारा - Sherawali Ma Bhajan

माँ भगवती शेरावाली, आदिशक्ति जगदम्बा भवानी के चरणों में अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण और अगाध भक्ति से ओत-प्रोत यह पावन भजन 'जयकारा शेरावाली का बोलो जयकारा' भक्तों के अंतःकरण को दिव्यता और ऊर्जा से भर देने वाला एक अत्यंत सुंदर संकीर्तन है। नवरात्रि हो, जागरण हो, माता की चौकी हो या दैनिक संध्या वंदना—जब भी भक्तगण मिलकर माँ के जयकारे लगाते हैं, तो संपूर्ण वातावरण चैतन्य और सकारात्मक स्पंदनों से गुंजायमान हो उठता है। इस भजन में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों—गौरी, लक्ष्मी, ब्राह्मणी और वैष्णो शक्ति—का अत्यंत सुंदर तादात्म्य स्थापित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि चराचर जगत में जो कुछ भी शक्ति, गति और चेतना है, वह सब उन्हीं महाशक्ति का ही स्वरूप है। भक्तिलोकत (Bhaktilok.in) के इस पावन मंच पर हम इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और गायन की विधि प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे साधक माँ के चरणों में अपनी निष्ठा को और अधिक प्रगाढ़ कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जयकारा जयकारा जयकारा
शेरावाली का बोलो जयकारा…..

हो माँ तेरे अंग अंग में
शिव शक्ति माँ शिव शक्ति
ले डाला ले डाला ले डाला
माँ ने गौरा का रूप ले डाला
जयकारा जयकारा जयकारा
शेरावाली का बोलो जयकारा…..

हो माँ तेरे अंग अंग में
विष्णु शक्ति माँ विष्णु शक्ति
ले डाला ले डाला ले डाला
माँ ने लक्ष्मी का रूप ले डाला
जयकारा जयकारा जयकारा
शेरावाली का बोलो जयकारा…..

हो माँ तेरे अंग अंग में
ब्रह्मा शक्ति माँ ब्रह्मा शक्ति
ले डाला ले डाला ले डाला
माँ ने ब्राह्मणी का रूप ले डाला
जयकारा जयकारा जयकारा
शेरावाली का बोलो जयकारा…..

हो माँ तेरे अंग अंग में
वैष्णो शक्ति माँ वैष्णो शक्ति
ले डाला ले डाला ले डाला
माँ ने कंजकों का रूप ले डाला
जयकारा जयकारा जयकारा
शेरावाली का बोलो जयकारा…..

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह सनातन वैदिक दर्शन के उस मूल सिद्धांत का काव्यात्मक रूप है जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा को एकमात्र आदिशक्ति का ही विस्तार माना गया है। भजन का मुखड़ा ‘जयकारा शेरावाली का बोलो जयकारा’ भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि वे अपने अहंकार और चिंताओं को त्यागकर उच्च स्वर में माँ की जयकार करें, क्योंकि देवी की जयकार करने से मन के सभी विकार और भय स्वतः नष्ट हो जाते हैं।

प्रथम अंतरे में माँ को 'शिव शक्ति' के रूप में स्मरण करते हुए कहा गया है कि उन्होंने ही 'गौरा का रूप' धारण किया है। यहाँ माँ पार्वती और भगवान शिव का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप व शक्ति का समन्वय झलकता है। दूसरे अंतरे में माँ को 'विष्णु शक्ति' बताते हुए 'लक्ष्मी का रूप' धारण करने का प्रसंग है, जो पालन और समृद्धि का प्रतीक है। तीसरे अंतरे में 'ब्रह्मा शक्ति' के रूप में 'ब्राह्मणी' का रूप लेकर सृजन की शक्ति को दर्शाया गया है। चतुर्थ और अत्यंत भावुक अंतरे में माँ की 'वैष्णो शक्ति' का बखान करते हुए उनके 'कंजकों (कन्याओं) का रूप' लेने का वर्णन है। सनातन धर्म में कन्याओं को माँ दुर्गा का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया है। इस प्रकार यह भजन हमें यह सिखाता है कि जगत की समस्त देवियाँ और शक्तियाँ वस्तुतः उसी एक माँ महाशक्ति के भिन्न-भिन्न विलास हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलयुक्त लयात्मकता और गूढ़ दार्शनिक संदेश है। इसे बिना किसी कठिन संगीत साधना के आम जनमानस द्वारा आसानी से गाया जा सकता है। धार्मिक दृष्टिकोण से, जब भक्तगण सामूहिक रूप से इस भजन का गान करते हैं, तो वहाँ सामूहिक ऊर्जा (Collective Consciousness) का सृजन होता है। नवरात्रि के दिनों में, मंगलवार या शुक्रवार को माता की चौकी और जागरण के समय इस भजन को गाने से विशेष मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भजन साधक को यह याद दिलाता है कि संसार के हर रूप में केवल और केवल मातृत्व की ही ऊर्जा प्रवाहित हो रही है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन गायन के लिए प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या संध्या बेला का समय अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इसके अतिरिक्त:

  • शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से।
  • माता के जागरण, चौकी या कीर्तन के आरंभ में माहौल को ऊर्जावान बनाने के लिए।
  • शुक्रवार के व्रत एवं पूजन के दौरान।
  • जब भी मन विचलित हो या जीवन में कठिनाइयों का अनुभव हो, तब इस भजन का मानसिक स्मरण किया जा सकता है।

इसे ताली बजाकर, ढोलक-मंजीरे के साथ या सामूहिक स्वर में पूरी तल्लीनता के साथ गाना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी 'माँ शेरावाली' यानी माँ दुर्गा, आदिशक्ति भवानी हैं। सनातन परंपरा में उन्हें सर्वोच्च शक्ति (Paramashakti) के रूप में पूजा जाता है। इस भजन की रचना पारंपरिक लोक-भक्ति धाराओं से प्रेरित है, जिसे भारत के विभिन्न संत कवियों और लोक-गायकों ने अपनी अनूठी शैली में जन-जन तक पहुँचाया है। माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों का यह स्मरण मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गा सप्तशती के उस दार्शनिक आधार से जुड़ा है जिसमें देवी को संपूर्ण ब्रह्मांड की आदि कारण बताया गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन लोक-साहित्य और पारंपरिक माता के भजनों (Mata Ke Bhajan) की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। पारंपरिक गीत अक्सर पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से और लोक-उत्सवों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। इस भजन के रचनाकार ने अत्यंत सहज शब्दों में त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) और उनकी शक्तियों (ब्राह्मणी, लक्ष्मी, गौरा/पार्वती) के साथ-साथ कन्या रूप (कंजक) को एक ही सूत्र में पिरोकर भारतीय संस्कृति की अद्वैत भावना को उजागर किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी और लोक-बोली का सहज मिश्रण है। इसमें 'ले डाला ले डाला' और 'जयकारा जयकारा' जैसी आवृत्तियों (Repetitions) का प्रयोग किया गया है, जो श्रोताओं और गायकों के मन में एक विशेष लय और सम्मोहन पैदा करती हैं। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक आशु-गीत या संकीर्तन शैली का भजन है, जिसमें भगवान के गुणों और रूपों का बार-बार स्मरण कर आनंद की अनुभूति की जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • समन्वय की भावना: संसार के सभी देवी-देवता और उनकी शक्तियाँ एक ही मूल शक्ति के अलग-अलग आयाम हैं।
  • स्त्री शक्ति का सम्मान: भजन में कन्याओं ('कंजकों') को साक्षात माता का रूप बताकर स्त्री जाति के प्रति सर्वोच्च आदर का संदेश दिया गया है।
  • उत्साह और सकारात्मकता: जीवन की बाधाओं को पार करने के लिए उत्साह रूपी 'जयकारा' आवश्यक है।
  • पूर्ण शरणागति: माँ के अंग-अंग में शक्ति का दर्शन करना ही वास्तविक द्रष्टा भाव है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भावार्थ
जयकारा जय-जयकार करना, उद्घोष भगवान या देवी के प्रति उल्लास और विजय का उद्घोष।
शेरावाली शेर पर सवारी करने वाली माँ दुर्गा का प्रसिद्ध संबोधन।
शिव शक्ति भगवान शिव की अर्धांगिनी / शक्ति माँ पार्वती या गौरा का स्वरूप।
विष्णु शक्ति भगवान विष्णु की शक्ति माँ लक्ष्मी का स्वरूप।
ब्रह्मा शक्ति ब्रह्माजी की शक्ति माँ ब्राह्मणी का स्वरूप।
कंजक कुंवारी कन्याएं नवरात्रि में पूजी जाने वाली बालिकाएं जो देवी का रूप मानी जाती हैं।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जयकारा जयकारा जयकारा, शेरावाली का बोलो जयकारा..."
यहाँ कवि आह्वान कर रहा है कि हे भक्तों! अपने सभी दुखों को भुलाकर सिंह पर विराजमान माँ शेरावाली की जय का उच्च स्वर में गान करो। यह जयकारा भीतर की सुप्त ऊर्जा को जाग्रत करता है।

"हो माँ तेरे अंग-अंग में शिव शक्ति माँ शिव शक्ति, ले डाला ले डाला, माँ ने गौरा का रूप ले डाला..."
इस पंक्ति का भाव है कि हे माँ! तुम्हारे एक-एक अंग में भगवान शिव की शक्ति समाहित है और तुमने ही सृष्टि के कल्याण के लिए माता गौरा (पार्वती) का रूप धारण किया है।

इसी प्रकार विष्णु शक्ति से लक्ष्मी रूप, ब्रह्मा शक्ति से ब्राह्मणी रूप और वैष्णो शक्ति से कन्याओं (कंजकों) का रूप धारण करने का प्रसंग यह सिद्ध करता है कि संपूर्ण सृजन, पालन और संहार की धुरी एकमात्र आदिशक्ति ही हैं। आप ओम जय जगदीश आरती के माध्यम से भगवान विष्णु की महिमा का भी स्मरण कर सकते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन या स्मरण के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इसके साथ ही आप भगवती की स्तुति के लिए पार्वती स्तोत्र और कृष्ण स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं जो भक्ति के विविध आयामों को स्पर्ष करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जयकारा शेरावाली का बोलो जयकारा लिरिक्स (Jaikara Sherawali Ka Bolo Jaikara)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली / आदिशक्ति भवानी
रचना परंपरा पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य थीम भक्ति, शक्ति के विविध रूप और शरणागति
भाव उल्लास, आनंद, समर्पण और अद्वैत भक्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, संध्या वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि संपूर्ण ब्रह्मांड की समस्त शक्तियाँ (शिव शक्ति, विष्णु शक्ति, ब्रह्मा शक्ति) और कंजकों (कन्याओं) के रूप में पूजी जाने वाली ऊर्जा वास्तव में एक ही आदिशक्ति महामाता का स्वरूप हैं।

यह भजन नवरात्रि उत्सव, माता के जागरण, कन्या पूजन (कंजक पूजन), और दैनिक संध्या आरती के समय गाने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।

भजन में मुख्य रूप से माँ गौरा (पार्वती), लक्ष्मी, ब्राह्मणी और कंजकों (कन्याओं) के रूपों का वर्णन किया गया है।

हाँ, इसे घर पर अकेले पूजा के समय या सामूहिक रूप से सत्संग और जागरण में भी अत्यंत भाव के साथ गाया जा सकता है।

माता की जयकार करने से मन का भय, अविश्वास और नकारात्मकता दूर होती है तथा साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।

हाँ, इसकी लय बेहद सरल और तालबद्ध है, जिसके कारण इसे कोई भी आसानी से याद करके गा सकता है।

जी हाँ, भक्तलोक पर आपको विभिन्न देवी-देवताओं के स्तोत्र, चालीसा, आरती और पारंपरिक भजन प्रचुर मात्रा में मिल जाएंगे।

सनातन परंपरा में कन्याओं को माँ दुर्गा का सीधा स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि में उनकी पूजा करने से माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक (Bhaktilok.in) पर प्रस्तुत यह आलेख सनातन भक्ति परंपरा, लोक-साहित्य और पारंपरिक संकीर्तन शैलियों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स के साथ-साथ उसके आध्यात्मिक और दार्शनिक पक्षों से अवगत कराना है। यह सामग्री पूरी तरह से श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपराओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक-भजन संकलन एवं माता के जागरण की गीत परंपरा।
  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती (आदिशक्ति महिमा)।
  • वैदिक एवं तांत्रिक दर्शन में शक्ति के विविध स्वरूपों की व्याख्या।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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