Hanuman Bhajan

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान लिरिक्स (Maine Tere Hi Bharose Hanuman Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

4,981 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मैं तेरे ही भरोसे हनुमान लिरिक्स (Maine Tere Hi Bharose Hanuman Lyrics in Hindi) - संपूर्ण भजन परिचय

संकटमोचन महाबली हनुमान जी की अगाध कृपा प्राप्त करने का माध्यम है अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन "मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान"। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अनन्य समर्पण, अगाध विश्वास और पूर्ण शरणागति (Surrender) का प्रतीक है। जब मनुष्य जीवन रूपी भवसागर के थपेड़ों से घिर जाता है, जब चारों तरफ निराशा के अंधकार छा जाते हैं, तब एक भक्त की यही पुकार होती है कि हे बजरंगबली! अब मेरी जीवन नैया आपके ही भरोसे है। इस पारंपरिक भक्ति गीत में गोस्वामी तुलसीदास जी की अमर निष्ठा और राम-भक्ति की सुगंध समाहित है। इसे विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, हनुमान जन्मोत्सव, सुंदरकांड पाठ के उपरांत अथवा दैनिक संध्या वंदन के समय अत्यंत भाव के साथ गाया जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥

काहे की या नाव बनाई, काहे की पतवार
रामा काहे की लगा दी जंजीर, सागर में नैया डार दई
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥

राम नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार
ओ रामा ज्ञान की लगा दी जंजीर, सागर में नैया डार दई
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥

कौन सखी वामें बैठनहारे, कौन है खेवनहार
रामा कौन लगाहे बेड़ा पार, सागर में नैया डार दई
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥

सीता मैया बैठनहारी, लक्ष्मण खेवनहार
मोरे राम जी लगावे बेड़ा पार, सागर में नैया डार दई
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥

तुलसीदास आस रघुवर की, चरणन में बलिहार
मोरे बालाजी लगाहे बेडा पार, सागर में नैया डार दई ॥
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन प्रश्नोत्तरी (Question-Answer) शैली में रचा गया एक अत्यंत सुंदर आध्यात्मिक काव्यात्मक संवाद है, जो जीवन के गहरे सत्यों को उजागर करता है।

भक्त अपने आराध्य श्री हनुमान जी को संबोधित करते हुए कहता है कि हे बजरंगबली! मैंने अपनी जीवन रूपी नौका को आपके ही भरोसे इस संसार रूपी अगाध सागर में उतार दिया है। अब इसकी रक्षा, संचालन और पार लगाने का संपूर्ण उत्तरदायित्व आपका ही है।

भजन के अगले चरण में जिज्ञासु मन से प्रश्न उठता है कि इस संसार रूपी सागर में तैरने वाली यह नाव किस वस्तु से बनी है? इसकी पतवार और जंजीर (बंधन) किस चीज की है? तब स्वयं उत्तर मिलता है कि यह नौका साधारण काष्ठ की नहीं, बल्कि भगवान श्री राम नाम की महिमा से रची गई है। इसमें भक्ति की पतवार लगी है और ज्ञान की अटूट जंजीर व बंधन है, जो इसे भटकने नहीं देता।

आगे के छंद में यह जिज्ञासा होती है कि इस नाव में विराजमान होने वाले और इसे खेने वाले (पुण्य कर्मों द्वारा आगे बढ़ाने वाले) कौन महान शख्सियतें हैं? इसका उत्तर देते हुए भक्त कहता है कि इस पावन नौका में जगत जननी माता सीता विराजमान हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अनुज लक्ष्मण जी इसके खेवनहार हैं और स्वयं प्रभु श्री राम इस नौका के बेड़े को पार लगाने वाले हैं।

अंत में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज कहते हैं कि उन्हें केवल और केवल श्री रघुवर की कृपा की आशा है। वे हनुमान जी के चरणों में अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हुए निवेदन करते हैं कि हे मोरे बालाजी महाराज! आप ही इस अकिंचन भक्त के जीवन की नैया को भवसागर से पार लगाइए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • समर्पण भाव (Surrender): यह भजन जीव की अहंकारहीन अवस्था और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है।
  • राम-भक्ति का समन्वय: हनुमान जी के माध्यम से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के प्रति अनन्य प्रेम प्रदर्शित किया गया है।
  • तुलसीदास जी की परंपरा: इस भजन में नाथपंथ और रामभक्ति शाखा के संतों की गहरी छाप देखने को मिलती है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण या गायन से मन का भय, चिंता और अवसाद दूर होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी पवित्र अवसर पर गाया जा सकता है, परंतु इसके पाठ और गायन के लिए कुछ विशेष समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नित्य प्रातःकाल: स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर दीप प्रज्वलित करने के पश्चात।
  • मंगलवार और शनिवार: हनुमान मंदिर में अथवा घर के पूजा स्थल पर संध्या आरती के समय।
  • सुंदरकांड पाठ के उपरांत: सामूहिक सत्संग या रामायण पाठ के समापन पर।
  • संकट के समय: जब भी जीवन में मानसिक या भौतिक कठिनाइयां आएं, तब इस भजन का आंतरिक स्मरण परम शांति प्रदान करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु संकटमोचन श्री हनुमान जी हैं, जिन्हें रुद्रावतार, केसरी नंदन और अजर-अमर वरदान प्राप्त महाबली माना गया है। साथ ही इसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और रामभक्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी का स्मरण किया गया है। इन महापुरुषों का स्मरण करने मात्र से मनुष्य के समस्त पाप और संताप क्षीण हो जाते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह लोक-भजन परंपरा (Folk Devotional Tradition) और संतवाणी का एक अद्भुत मिश्रण है। हालांकि इसके मूल रचयिता के रूप में ग्रामीण एवं पारंपरिक संतों का योगदान रहा है, परंतु अंत में तुलसीदास जी के नाम का उल्लेख यह सिद्ध करता है कि यह भजन रामभक्ति आंदोलन की लोक-संस्कृति से उपजा है, जो पीढ़ियों से मौखिक और लिखित रूप में भक्तों की जुबान पर जीवित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अवधी और ब्रज मिश्रित लोक-हिंदी (Sant Bhasha / Lok Bhasha) है, जो आम जनमानस के हृदय को आसानी से छू लेती है। इसमें रूपक अलंकार (Metaphor) का सुंदर प्रयोग किया गया है—संसार को 'सागर', जीवन को 'नैया', शरीर या मन को 'नाव', भक्ति को 'पतवार' और ज्ञान को 'जंजीर' के रूप में चित्रित किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • ईश्वर पर अटूट विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी परमात्मा और गुरु की शक्ति पर संदेह न करना।
  • अहंकार का त्याग: यह मानना कि मैं अपनी नाव का अकेला खेवनहार नहीं हूँ, बल्कि भगवान ही मेरी नैया पार लगाने वाले हैं।
  • राम नाम की महत्ता: जीवन रूपी नौका को चलाने के लिए राम नाम रूपी ईंधन और भक्ति रूपी पतवार ही एकमात्र संबल है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
भवसागर / सागर संसार रूपी समुद्र जन्म-मृत्यु और दुखों का चक्र
नैया नाव / नौका मानव शरीर या जीवन
पतवार नाव चलाने का यंत्र भक्ति और कर्म
खेवनहार नाव चलाने वाला नाविक भगवान श्री राम और हनुमान जी
बलिहार न्योछावर होना पूर्ण समर्पण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई ॥
अर्थात्, हे हनुमान जी! मैंने अपनी संपूर्ण जिंदगी और उसके उतार-चढ़ाव आपके चरणों में सौंप दिए हैं। अब इस संसार के भंवर से पार पाना मेरा नहीं, आपका दायित्व है।

2. राम नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार...
अर्थात्, जीवन की यह नाव किसी साधारण लकड़ी की नहीं बल्कि पवित्र राम नाम के स्मरण से गढ़ी गई है, जिसमें अटूट भक्ति की पतवार लगी है।

3. सीता मैया बैठनहारी, लक्ष्मण खेवनहार, मोरे राम जी लगावे बेड़ा पार...
अर्थात्, इस आध्यात्मिक यात्रा में शक्ति स्वरूपा माता सीता विराजमान हैं, संयम और पराक्रम के प्रतीक लक्ष्मण जी इसके मार्गदर्शक हैं और मेरे प्रभु श्री राम इसे अंततः मुक्ति के तट पर पहुँचाने वाले हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान (Maine Tere Hi Bharose Hanuman)
मुख्य आराध्य संकटमोचन श्री हनुमान जी एवं श्री राम परिवार
रचना शैली पारंपरिक लोक भजन / संतवाणी
भाषा अवधी / लोक हिंदी
मुख्य भाव पूर्ण शरणागति, भक्ति और विश्वास
उपयुक्त अवसर मंगलवार व्रत, सुंदरकांड, हनुमान जन्मोत्सव, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन संकटमोचन महाबली श्री हनुमान जी और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को समर्पित है।

इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में अथवा घर पर संध्या के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश जीवन की सभी कठिनाइयों और संकटों के समय भगवान हनुमान और श्री राम पर पूर्ण विश्वास रखना और अहंकार का त्याग कर खुद को ईश्वर के चरणों में समर्पित करना है।

हाँ, सुंदरकांड या हनुमान चाليसा पाठ के समापन के बाद इस भावपूर्ण भजन को गाने से विशेष मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं, लोक-साहित्य और संतों की वाणियों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति रस और सटीक भजन लिरिक्स प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं हनुमान भक्ति ग्रंथ
  • श्री रामचरितमानस एवं विनय पत्रिका - गोस्वामी तुलसीदास
  • सनातन धर्म की लोक-गायन परंपरा

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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