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ना सोना काम आएगा ना चाँदी काम आएगी लिरिक्स (Na Sona Kaam Aayega Na Chandi Kaam Aayegi Lyrics in Hindi) - New Bhajan - Bhaktilok

486 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

धन का मोह छोड़ो, प्रभु को पहचानो

यह भजन हमें सांसारिक धन और सम्पत्ति के अस्थायी स्वरूप का ज्ञान कराता है।

ना सोना काम आएगा ना चाँदी काम आएगी लिरिक्स (Na Sona Kaam Aayega Na Chandi Kaam Aayegi Lyrics in Hindi) - सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगीना सोना काम आएगा ना चांदी आएगी।छोटो सा तू कितने बड़े अरमान तेरेमिट्टी का तु सोने के सब सामन हैं तेरे।मिट्टी की काया मिट्टी में जिस दिन समाएगीना सोना काम आएगा ना चांदी आएगी....पंछी है पर पंछी पिंजरा खोल के उड़ जामाया मो के सारे बंधन टॉर के उड़ जादिल की हर धड़कन में जिस दिन मौत गुनगुनाएगीना सोना काम आएगा ना चाँदी आएगी....अच्छे किए करम जो तुमने पाया मानुष तनपाप में क्यों भटका है रे पापी तेरा मानपाप की नया तुमको इक दिन डुबाएगीना सोना काम आएगा ना चाँदी आएगी....धन दौलत से इक दिन तेरा खाली होगा हाथअंत समय फिर प्रभु का एक भजन चलेगा साथसतगुरुओं की तब वाणी तुम्हे याद आएगीना सोना काम आएगा ना चाँदी आएगी....सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगीना सोना काम आएगा ना चाँदी आएगी।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य संदेश आत्मज्ञान और मृत्यु के अनिवार्यत्व के इर्द-गिर्द घूमता है। प्रारंभ में यह बताया गया है कि न तो सोना और न चाँदी इस जीवन के अंत में कोई उपयोगी सिद्ध होंगे। 'सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी' पंक्ति यह चेतावनी देती है कि मृत्यु के समय हमारे पास जो भी भौतिक सम्पत्ति होगी, वह हमारी आत्मिक यात्रा में सहायक नहीं होगी। 'छोटा सा तू कितने बड़े अरमान तेरे' इस पंक्ति से यह संकेत मिलता है कि मनुष्य ब्रह्मानंद की खोज में अनेक इच्छाओं और इच्छाओं से भरा होता है, परन्तु अंततः वह केवल शरीर और भौतिकता में बंधा रहता है। यह गीत हमें अपनी अस्थायी उपाधियों और संपत्तियों के प्रति जागरूक करता है ताकि हम अपने असली स्वरूप की खोज कर सकें।

भावार्थ में, भजन हमें यह समझाता है कि भौतिक वस्तुओं का संग्रह केवल एक अस्थायी संतोष दे सकता है। 'धन दौलत से इक दिन तेरा खाली होगा हाथ' यह प्रमुख विचार दर्शाता है कि संसार में धन कमाना और संचय करना हमें अंत में खाली हाथ छोड़ देगा। यहाँ परामर्श दिया गया है कि अच्छे कर्मों और भक्ति से भरी जीवन जीनी चाहिए, क्योंकि यही आत्मा की शुद्धता और मोक्ष की कुंजी है। अंत में, जब मौत का समय आएगा, तब हमें हमारे किए गए अच्छे कर्मो और गुरु वाणी का स्मरण ही सहारा देगा।

इस भजन के द्वारा हमें भावुक और आध्यात्मिक रूप से जागरूक किया जाता है। यह दर्शाता है कि ध्यान और भक्ति का मार्ग ही सच्ची सफलता और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में ले जाता है। 'अच्छे किए करम जो तुमने' इस पंक्ति के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि मानव का जीवन केवल भौतिक अभिलाषाओं तक सीमित नहीं हो सकता। व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि कर्मों के फल ही अंत में उसके साथ चलते हैं। इस प्रकार, यह भजन हमें आत्म-प्रवचन करने और सच्चे मार्ग धारण करने के लिए प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ भारतीय संस्कृति और धार्मिक विश्वासों में गहराई से निहित है। उपनिषदों और भगवद गीता जैसे ग्रंथों में भी यह विषय व्याप्त है कि वास्तविकता को पहचानना और संसार की माया को त्यागना आवश्यक है। मृत्यु के समय सभी विपुल धन और संग्रहण किसी काम का नहीं होता, बल्कि आत्मा के कर्म और भक्ति ही सद्गति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसी तरह, महाभारत में भी यह बताया गया है कि सत्य, प्रेम, और भक्ति से गहरी जुड़ाव ही जीवन का सही सार है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मन को शांति मिलती है और आत्मा की स्थिति को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। मानसिक तनाव कम करने, सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए इसे नियमित रूप से गाना लाभदायक होता है। इससे भक्ति भाव का विकास होता है, और जीवन में संतुलन आता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह-सुबह सूर्योदय के समय करना सर्वोत्तम है। इसे गाते समय एक चौकी पर दिए या दीपक जलाना चाहिए और भगवान या गुरु की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठना चाहिए। ध्यान का सही मुद्रा में बैठकर मन को शांत करना सबसे आवश्यक है। मंत्र का जप करते समय, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रशासन करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन का मुख्य उद्देश्य भौतिक धन की अस्थायीता को प्रदर्शित करना और सच्चे कर्मों और भक्ति के मूल्य को समझाना है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है जपने के लिए?

इस भजन का जप सुबह के समय या भक्ति भाव के साथ सुबह-सुबह किया जाना चाहिए, ताकि दिन की शुरुआत सकारात्मकता से हो सके।

क्या इस भजन को व्यक्तिगत रूप से किया जा सकता है?

हाँ, यह भजन व्यक्तिगत रूप से किया जा सकता है। इसे श्रद्धा से गान करने से आत्मिक शांति और एकाग्रता की प्राप्ति होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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