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ओथे अमला दे होने ने लिरिक्स लिरिक्स (Othe amla de hone ne abede kise ni teri jaat puchni Lyrics in Hindi) - New Bhakti Bhajan - Bhaktilok

965 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

पढ़ी नमाज़ ते नियाज़ ना सिखया

तेरीयां किस कम्म पढ़ियां नमाज़ा

ना घर डिठा ना घर वाला डिठा

तेरीयां किस कम्म दित्तियाँ नियाज़ा।

इल्म पढ़ेया ते अमल न कीता

तेरीयां किस कम्म कितीयां वाजां।

बुल्हे शाह पता तद लग सी

जदों चिड़ी फसी हथ बाजां।

ओथे अमलां दे होने ने नवेडे किसे नी तेरी ज़ात पुछनी

झूठे मान तेरे झूठे सब झेडेकिसे नी तेरी ज़ात पुछनी।

जो घडेया सो भज्जना एक दिन जो बनेयां सो ढहना

आखिर छड्डने महल मुनारे बैठ सदां नी रहना

चार दिन दा मेला एथे बहुती देर नी बहना

जो बीजेगा साधक झल्लेया ओही वड्डना पैनाओथे अमलां दे

कोल नी रखना भैण भरावां पल विच जा दफ़नाऊना

तुर जाना तेनू सब ने छड्ड बहुता चिर नी लाऊना

मुक जाने सब झेड़े तेरे हेठ मिट्टी जद आऊना

उस दिन साधक रूस्से नूँ तेनू किसे नी 

आउन मनाउनाओथे अमलां दे

तेनू मोडा दे के तोरना जहान ने

आउना मिट्टी थल्ले तेरी उच्ची शान ने

सुन्ने छड्ड के तूँ तुर वेहड़े किसे नी

झूठे मान ते आकड़ तेरी झूठीयां तेरीयां बातां

गल्लां नाल बनावें पल विच दिनां नूँ कालीयां रातां

झूठे महल मुनारे तेरे झूठीयां तेरीयां ज़ातां

अमलां वाजों साधक ओथे किसे नी लनीयां

बातांओथे अमलां दे

किसे कोल घड़ी पल ना खलोना ऐ

कीती अपनी नूँ सारेयां ने रोना ऐ

होने वखो वक्ख संगी साथी तेरेकिसे ना तेरी

पंछी वांगूं उड़ जाना ऐ इक दिन मार उडारी

क़दर ओहनां दी पैंदी ओथे अमल जिन्ना दे भारी

हर शै छड्डनी पैनी बंदेया जान तों जेहड़ी प्यारी

अज्ज तुरैया कोई कल तुर जाना 

साधक बारो बारीओथे अमलां दे

बे बोल जुबान तो बोल चन्ग्गामीठे 

बोल दा जग्ग आसीर हुँदा

मन्दा बोल कदी मुँहों कड़ीए 

नेमन्दा बोल सज्जना तिखा तीर हुँदा

इक बोल जहान विचों रध दिंदा 

इक बोल निरा अकसीर हुँदा

चेंज बोल दा बोलया शान उच्चाचन्ग्गे 

बोल दा चन्ग्गा आखीर हुँदाओथे अमलां दे

किसे रोंदे नूँ हँसाया ऐ तां दस्स खां

किसे भूखे नूँ राजया ऐ तां दस्स खां

राह चों रोड़े नूँ हटाया ऐ तां दस्स खां

कदी जख्मी किसे दा फट्ट नहींयों सीता

ऐवे फेरी तस्बी कख भी नी कीताओथे अमलां दे

राह छड्डया दयंकदारी 

दावल्ल दस्से चरो यारी दा

कर नाश ना नेको कारी 

दानेकां नूँ बदी सिखावें तूँओथे अमलां दे

लुक लुक के सौदे करना 

ऐ बिन मेहनत बोझे भरना ऐ

साधां नूँ चोर बनावें तूँ ना अल्लाह कोलो डरना ऐ

पहले अमलां दी खुलना किताब ने

वेखे जाने फेर सब दे हिसाब ने

साधक आपो आप होने ने नखेड़े किसे न

*** Singer – Nusrat Fateh Ali Khan ***

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "ओथे अमला दे होने ने लिरिक्स लिरिक्स (Othe amla de hone ne abede kise ni teri jaat puchni Lyrics in Hindi) - New Bhakti Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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