Parvati Stotram

पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा भजन(Pata Nhi Kis Roop Me Aakar Narayan Mil Jayega Lyrics In Hindi) - By Prakash Gandhi Bhaktilok

422 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

नारायण के दर्शन: भक्ति का आलंबन

यह भजन हमें सिखाता है कि नारायण की कृपा हर रूप में प्राप्त हो सकती है।

पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा भजन(Pata Nhi Kis Roop Me Aakar Narayan Mil Jayega Lyrics In Hindi)- प्रकाश गांधी :- राम नाम के साबुन से जोमन का मेल छुड़ाएगानिर्मल मन के दर्पण में वहराम का दर्शन पायेगाराम नाम के साबुन से।झूठ कपट निंदा को त्यागोहर इक से तुम प्यार करोघर आये अतिथि कोई तोयथा शक्ति सत्कार करोपता नहीं किस रूप में आकरनारायण मिल जाएगा राम नाम के साबुन से।नर शरीर अनमोल रे प्राणीप्रभु कृपा से पाया हैझूठे जग प्रपंच में पड़करजो प्रभु को बिसराया हैसमय हाथ से निकल गया तोसर धुन धुन पछताएगानिर्मल मन के दर्पण में वहराम का दर्शन पायेगाराम नाम के साबुन से।साधना तेरा कच्चा है जब तकप्रभु पर विश्वास नहींमंजिल कर पाना है क्याजब दीपक में प्रकाश नहींनिश्चय है तो भव सागर सेबेड़ा पार हो जाएगानिर्मल मन के दर्पण में वहराम का दर्शन पायेगाराम नाम के साबुन से।दौलत का अभिमान का झूठाये तो आनी जानी हैराजा रंग अनेक हुएकितनों की सुनी कहानी हैराम नाम प्रिय महामंत्र हीसाथ तुम्हारे जाएगानिर्मल मन के दर्पण में वहराम का दर्शन पायेगाराम नाम के साबुन से।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय यह है कि नारायण केवल एक रूप में नहीं, बल्कि अनेक रूपों में भक्तों के सामने आ सकते हैं। पहले छंद में यह संदेश दिया गया है कि 'राम नाम के साबुन' से मन के मलिनता को धोकर 'निर्मल मन के दर्पण' में भगवान का दर्शन पाया जा सकता है। इसे आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जा सकता है। जब भक्त अपने मन को स्वच्छ करता है और भगवान की शरण में जाता है, तभी उसे उनके अदृश्य रूप का अनुभव होता है। अगले छंद में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि मन में झूठ, कपट और निंदा नहीं होगी, तो भक्त को भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होगी। यहाँ भक्त को व्यक्तिगत रिश्तों, घर के अतिथियों के सम्मान और आपसी प्रेम का संदेश दिया गया है। यह जीवन में सच्चाई और पारस्परिक प्रेम का महत्व दर्शाता है।

भजन में एक गहरा भावार्थ छिपा है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा मानव जीवन अनमोल है और इसे भगवान की कृपा से ही प्राप्त किया गया है। उधृत पंक्तियों में ‘झूठे जग प्रपंच’ का स्तवन करके यह बताया गया है कि यदि हम प्रभु को भूल जाते हैं और इस भौतिक संसार में उलझकर रहते हैं, तो समय हमारे हाथ से फिसल सकता है। यह भजन हमें जागरूक करते हुए कहता है कि समय की कद्र करें, अन्यथा पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा। यह भावनाएँ भक्तों को उस आध्यात्मिक यात्रा की याद दिलाती हैं जो उन्हें खाली धरती पर नहीं, बल्कि सच्चाई और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।

इस भजन का दार्शनिक ढाँचा अधिराज राम नाम पर आधारित है, जो भगवत भक्ति का सर्वोत्तम रूप माना जाता है। यहाँ भक्ति मार्ग का तत्वज्ञान प्रकट होता है, जहाँ साधक को यह ज्ञान दिया गया है कि साधना उस समय तक अधूरी है जब तक प्रभु पर पूर्ण विश्वास न हो। दीपक के प्रकाश के बिना लक्ष्य की प्राप्ति असंभव है, इसलिये विश्वास ही भक्ति का मुख्य आधार है। अंततः, यह भजन हमें सिखाता है कि धन, बल और राजसी वर्चस्व केवल भौतिक वस्तुएँ हैं, लेकिन सच्चा अध्यात्म केवल ‘राम नाम’ में निहित है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृतियों में भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति भाव को उजागर करता है। रामायण में भगवान श्रीराम को सर्वशक्तिमान और करुणामयी बताया गया है। ओम मनोहर राम नाम का जाप करने का उपदेश मिलता है। इसके माध्यम से भक्त अपने जीवन की समस्याओं को समाधान कर सकते हैं और भावनात्मक संतुलन भी बनाए रख सकते हैं। यह भजन एक धार्मिक अभिभावक का कार्य करता है, जो भक्तों को राम जी की कृपा की ओर अग्रसर करता है। यही कारण है कि इस भजन का पाठ समाज में बड़े अर्थ में संतोष और सुख लाने का कार्य करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक तनाव कम होता है और आंतरिक शांति की अनुभूति होती है। यह भजन सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे जीवन में संतुलन और समृद्धि आती है। आध्यात्मिक दृष्टि से, नारायण का ध्यान करने से भक्त को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन सुबह या शाम के समय भक्ति भावना से गाया जाना चाहिए। भजन गाते समय ध्यान लगाते हुए एक दीपक जलाना और फूलों की अर्पित करना शुभ माना जाता है। साधक को ध्यान की मुद्रा में बैठकर स्वच्छ मन से गाने की कोशिश करनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य भक्त को यह सिखाना है कि भगवान नारायण विभिन्न रूपों में उपस्थित होते हैं और हमें उनकी कृपा की प्राप्ति हेतु मन को निर्मल करना चाहिए।

राम नाम का महत्व क्या है?

राम नाम का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह भक्ति का महामंत्र है, जो भक्त के जीवन में शांति, संतोष, और आध्यात्मिक जागरण लाता है।

भजन का पाठ कब करना चाहिए?

यह भजन सुबह-सुबह या शाम के समय ध्यानपूर्वक गाना चाहिए, जब मन शांत हो और भगवान के प्रति जुड़ाव महसूस हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!