Shiv Parvati Vivah Shivratri Bhajan

जय जय गिरिराज किसोरी लिरिक्स (Jay Jay Giriraj Kishori Lyrics in Hindi) - Parvati Stuti jai jai giribar raj kishor - Bhaktilok

734 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जय जय गिरिराज किसोरी लिरिक्स (Jay Jay Giriraj Kishori Lyrics in Hindi) - Parvati Stuti

सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में आदि शक्ति माता पार्वती (Giriraj Kishori) की वंदना अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और साधकों के अंतर्मन को स्निग्ध करने वाली मानी गई है। 'जय जय गिरिराज किसोरी' यह दिव्य स्तुति और भजन माता पार्वती के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माता का एक नाम 'गिरिराज किसोरी' या 'गिरिबर राज किसोर' भी प्रसिद्ध है, जो भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में संपूर्ण जगत की माता के रूप में पूजित हैं। इस पावन भजन और स्तुति का संकीर्तन करने से साधक के जीवन में सुख, शांति, सौभाग्य और शिव-पार्वती की असीम कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से शिवरात्रि, सावन मास, मंगला गौरी व्रत और माता पार्वती से जुड़े अन्य पर्वों पर इस स्तुति का गान करने से साधक के सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और दांपत्य जीवन में मधुरता एवं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन स्तुति के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ, भावार्थ, धार्मिक महत्व और इसके गायन से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय जय गिरिराज किसोरी, जय जय मंगलमयि भोरी।
जय महेश मुख चंद चकोरी, जय जय गिरिबर राज किसोरी॥


जय जय गिरिराज किसोरी,
जय जय मंगलमयि भोरी।
जय महेश मुख चंद चकोरी,
जय जय गिरिबर राज किसोरी॥

वृषभावाहन प्रियतमा भवानी,
पतिव्रता सिरमौर महानि।
अघौघ नाशिनी जग की माता,
शिव हृदयेश्वरी सब सुख दाता॥

चरण कमल में शीश झुकाऊं,
किस विधि महिमा तोहि सुनाऊं।
तुम हो आदि शक्ति जगदम्बा,
मिटाओ मन का सकल अंधम्बा॥

जो जन तुम्हरी शरण गहे हैं,
वे भवसागर सहज तरे हैं।
पति सुख सौभाग्य की दात्री,
भक्तों की हो प्राण सुहात्री॥

मंगल मूरति रूप तुम्हारा,
भक्त जनों का एक सहारा।
दीन हीन पर कृपा करो माँ,
भक्ति दान हमको भी दो माँ॥

जय जय गिरिराज किसोरी,
जय जय मंगलमयि भोरी।
पूर्ण मनोरथ सब का करना,
दुख दारिद्र दूर हरण करना॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अत्यंत मनमोहक और भक्ति रस से परिपूर्ण भजन का भावार्थ जीवात्मा की परमात्मा के प्रति गाढ़ निष्ठा को प्रदर्शित करता है। भजन की प्रथम पंक्ति "जय जय गिरिराज किसोरी" में साधक हिमालय राज की पुत्री माता पार्वती की जय-जयकार करता है। माता पार्वती अत्यंत सरल स्वभाव वाली, करुणा की सागर और भक्तों के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहने वाली 'मंगलमयि भोरी' हैं।

भगवान शिव के मुख रूपी चंद्रमा के दर्शन के लिए चकोरी के समान प्रेम करने वाली माता पार्वती संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना और शक्ति हैं। उन्हें वृषभान (नंदी) पर सवार रहने वाले देवाधिदेव महादेव की प्रियतमा और समस्त पतिव्रता नारियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त महाती कहा गया है। माता पार्वती सभी प्रकार के पापों (अघौघ) का नाश करने वाली और जगत की पालक माता हैं। वे भगवान शिव के हृदय में निवास करने वाली और सभी प्रकार के सुख प्रदान करने वाली हैं।

साधक अपने आराध्य के चरणों में नतमस्तक होकर कहता है कि हे माँ! मेरी बुद्धि इतनी सीमित है कि मैं आपकी महिमा का पूर्ण वर्णन करने में असमर्थ हूँ। आप ही इस ब्रह्मांड की आदि शक्ति और जगदंबा हैं, जो हमारे जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करती हैं। जो भी मनुष्य आपकी शरण में आता है, वह इस भवसागर से सहज ही तर जाता है। आप हमें अखंड सौभाग्य, भक्ति और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह स्तुति सनातन संस्कृति में नारी शक्ति, त्याग, तपस्या और समर्पण की प्रतिमूर्ति माता पार्वती को समर्पित है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शक्ति और शिव का समन्वय: यह भजन शिव और शक्ति के अकाट्य और शाश्वत संबंध को उजागर करता है।
  • सौभाग्य और दाम्पत्य सुख: इस स्तुति के पाठ से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
  • मन की शांति: इसके सरल और लयबद्ध शब्द मानसिक संतापों को दूर कर अंतर्मन को शांति प्रदान करते हैं।
  • संबंधित पावन पृष्ठों के रूप में आप शिव तांडव स्तोत्र और श्री हनुमान चालीसा का भी पाठ कर अपनी साधना को और अधिक बलवान बना सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी पवित्र समय गाया जा सकता है, परंतु इसका विशेष महत्व निम्नलिखित अवसरों पर बढ़ जाता है:

  • प्रातःकाल एवं संध्या वंदना: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का गान करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • सावन मास एवं प्रदोष व्रत: सावन के सोमवार और प्रदोष के दिन माता पार्वती और भगवान शिव के समक्ष बैठकर इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • शिव विवाह उत्सव और महाशिवरात्रि: विवाह के मांगलिक अवसरों और शिवरात्रि की रात्रि के जागरण में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु माँ पार्वती (गौरी, उमा, गिरिजा) हैं, जो शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका नाम 'अपर्णा' और 'तपस्विनी' भी पड़ा। वे ममता, वात्सल्य और करुणा की जीवंत मूरत हैं। उनकी वंदना करने से भगवान शिव स्वतः ही अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं, जैसा कि तुलसीदास जी और अन्य संतों ने अपने ग्रंथों में भी उल्लेख किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक परंपरा और संकीर्तन शैली पर आधारित है जिसे पीढ़ियों से संतों, भक्तों और गृहणियों द्वारा गाया जाता रहा है। रामचरितमानस और विभिन्न पुराणों में वर्णित शिव-पार्वती विवाह प्रसंगों से प्रेरणा लेकर इस प्रकार की स्तुतियों की रचना की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य सामान्य जनमानस तक माता पार्वती के सरल और करुणामयी स्वरूप को पहुँचाना है ताकि हर कोई आसानी से उनकी महिमा का गुणगान कर सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल अवधी, ब्रज और हिंदी की लोक शैली के सम्मिश्रण में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'मुख चंद चकोरी'। इसकी तुकबंदी इतनी सहज है कि एक बार सुनने मात्र से ही यह जुबान पर चढ़ जाती है। यह काव्य शैली जनसाधारण के हृदय को तुरंत स्पर्श करती है और सामूहिक संकीर्तन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न हों, सच्ची निष्ठा, तपस्या और ईश्वर पर अटूट विश्वास से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। माता पार्वती का जीवन हमें धैर्य, सहनशीलता और पतिव्रता धर्म की प्रेरणा देता है। शरणागति का भाव ही मनुष्य को भवसागर से पार उतारने की एकमात्र नौका है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
गिरिराज किसोरी पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती का संबोधन
भोरी भोले स्वभाव वाली / सरल हृदय माता की सहज करुणा के लिए
चकोरी चंद्रमा की ओर एकटक देखने वाला पक्षी शिव रूपी चंद्रमा के प्रति प्रेम
अघौघ नाशिनी समस्त पाप समूहों का नाश करने वाली भक्तों के संकट हरने वाली शक्ति
सुहात्री सुख और सौभाग्य देने वाली दंपत्य जीवन को मंगलमय बनाने वाली

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जय जय गिरिराज किसोरी, जय जय मंगलमयि भोरी।"
हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो। आप सभी का मंगल करने वाली और अत्यंत सरल व निर्मल हृदय वाली हैं।

"जय महेश मुख चंद चकोरी, जय जय गिरिबर राज किसोर।"
भगवान शिव के मुख रूपी चंद्रमा का दर्शन करने के लिए चकोरी पक्षी के समान लालायित रहने वाली हे माता! आपकी जय हो।

"चरण कमल में शीश झुकाऊं, किस विधि महिमा तोहि सुनाऊं।"
हे माँ! मैं आपके कमल रूपी चरणों में अपना मस्तक झुकाता हूँ, मेरी बुद्धि इतनी क्षीण है कि मैं आपकी महिमा का बखान कैसे करूँ?

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता पार्वती की वंदना करते समय निम्नलिखित पौराणिक श्लोक का स्मरण करना अत्यंत पुण्यदायी होता है:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम जय जय गिरिराज किसोरी लिरिक्स (Parvati Stuti)
प्रमुख आराध्य माता पार्वती एवं भगवान शिव
रचना परंपरा पारंपरिक सनातन भक्ति एवं संकीर्तन गीत
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, शरणागति और अखंड सौभाग्य
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन मास, मंगला गौरी व्रत, पूजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जय जय गिरिराज किसोरी भजन किसके लिए गाया जाता है?

यह भजन मुख्य रूप से आदि शक्ति माता पार्वती (गिरिराज किसोरी) और देवाधिदेव महादेव की स्तुति में गाया जाता है।

इस भजन का पाठ करने से क्या लाभ मिलता है?

इस पावन स्तुति के पाठ से घर में सुख-शांति, अखंड सौभाग्य और भगवान शिव-पार्वती की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है।

क्या इस भजन को किसी भी दिन गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को प्रतिदिन पूजा के समय या विशेषकर सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन अवश्य गाना चाहिए।

क्या यह भजन महाशिवरात्रि पर गाया जा सकता है?

निश्चित रूप से, महाशिवरात्रि और सावन मास के दौरान इस भजन का गान विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

गिरिराज किसोरी किसे कहा जाता है?

'गिरिराज किसोरी' पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती को कहा जाता है।

क्या इस भजन को महिलाएं और पुरुष दोनों गा सकते हैं?

हाँ, यह भजन सभी भक्तों के लिए खुला है और कोई भी इसे श्रद्धापूर्वक गा सकता है।

माता पार्वती की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय क्या है?

शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप, व्रत रखना और इस प्रकार की पवित्र स्तुतियों का नित्य पाठ करना सबसे सरल उपाय है।

इस भजन से जुड़े अन्य कौन से स्रोत पढ़े जा सकते हैं?

आप रामचरितमानस के बालकांड में वर्णित शिव-विवाह प्रसंग और देवी भागवत पुराण का अध्ययन कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथों, पारंपरिक संकीर्तन संग्रहों और लोक-साहित्य के आधार पर 'संपादकीय रूप से तैयार सामग्री' है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भक्ति साहित्य उपलब्ध कराना है ताकि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को सुगम बना सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • शिव पुराण एवं देवी भागवत पुराण
  • पारंपरिक सनातन संकीर्तन एवं लोक भजन परंपरा

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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