मंगलाष्टक संपूर्ण मराठी लिरिक्स (Mangalashtak Lyrics In Marathi) - Sampurna Mangalashtake -
मंगलाष्टक संपूर्ण मराठी लिरिक्स (Mangalashtak Sampurn Lyrics in Marathi):-
Song - Sampurna Mangalashtake | संपूर्ण मंगलाष्टका
Singer - Arjun Patil
Music - Arjun Patil
ALbam - Mangalashtke
Lebal - Naina music
हिंदूंमध्ये माता (Hindumadhye Mata):-
पित्यांच्या संमतीने होत असलेल्या धार्मिक पद्धतीच्या विवाहाप्रसंगी म्हटल्या जाणार्या पद्य रचनांना मंगलाष्टक असे म्हणतात. मंगलाष्टकाची प्रथा विशेषकरून महाराष्ट्रीय समाजात प्रचलित आहे. विवाह समारंभात वधूवरांवर फुले आणि अक्षतांचा वर्षाव करून त्यांना आशीर्वाद देण्याच्या प्रथेचा हा एक भाग आहे.||
मंगलाष्टकांचे मूळ विवाहप्रसंगी ज्येष्ठांनी वधूवरांना त्यांच्या दांपत्यजीवनासाठी द्यावयाच्या आशीर्वचनात आहे. पारंपरिकरीत्या मंगलाष्टक ही आठ ओळींचा चरण असलेली, विशिष्ट सुरांत म्हणण्याची पद्यरचना असते. तिचा एक चरण संपल्यानंतर जमलेली मंडळी वधूवरांवर फुले आणि अक्षतांचा वर्षाव करतात. ही पद्यरचना मराठी किंवा संस्कृतमध्ये असते. मात्र विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धापासून मंगलाष्टके स्वरचित म्हणण्याचा परिपाठही वधू वराचे नातेवाईक आणि निकटवर्तीयांनी सुरू केला आहे. वधू आणि वराला त्यांच्या दांपत्यजीवनासाठी शुभेच्छा आणि आशीर्वाद हा या रचनांचा मुख्य गाभा मात्र टिकून आहे.
मंगलाष्टक संपूर्ण मराठी लिरिक्स (Mangalashtak Lyrics In Marathi) -
स्वस्ति श्री गणनायकं
गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदं
बल्लाळो मुरुडं विनायकमहं
विनायकमहं चिन्तामणि स्थेवरं
लेण्याद्रिं गिरिजात्मकं
सुरवरदं विघ्नेश्वरम् ओज़रम्
ग्रामे रांजण संस्थितम्
गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलं
गंगा सिंधु सरस्वती च
यमुना गोदावरी नर्मदा
कावेरी शरयू महेंद्रतनया
शर्मण्वती वेदिका
क्षिप्रा वेत्रवती महासुर
नदी ख्याता गया गंडकी
पूर्णा पूर्ण जलैः समुद्र
सरिता कुर्यातसदा मंगलम
राजा भीमक रुख्मिणीस
नयनी देखोनी चिंता करी
ही कन्या सगुणा वरा
नृपवरा कवणासि म्यां देईजे
आतां एक विचार कृष्ण
नवरा त्यासी समर्पू म्हणे
रुख्मी पुत्र वडील त्यासि
पुसणे कुर्यात सदा मंगलम
लाभो संतति संपदा बहु
तुम्हां लाभोतही सद्गुण
साधोनि स्थिर कर्मयोग
अपुल्या व्हा बांधवां भूषण
सारे राष्ट्र्धुरीण हेचि
कथिती कीर्ती करा उज्ज्वल
गा गार्हस्थाश्रम हा तुम्हां
वधुवऱां देवो सदा मंगलम
आली लग्नघडी समीप
नवरा घेऊनि यावा घरा
गृह्योत्के मधुपर्कपूजन
करा अन्तःपटाते धारा
दृष्टादृष्ट वधुवरा न
करितां दोघे करावी उभी
वाजंत्रे बहु गलबला न
करणे लक्ष्मीपते मंगलम
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मंगलाष्टक संपूर्ण मराठी लिरिक्स (Mangalashtak Lyrics In Marathi) - Sampurna Mangalashtake - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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