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Hanuman Bhajan

संकट मोचन नाम तिहारो लिरिक्स (Sankat Mochan Naam Tiharo Lyrics in Hindi) - Sankat Mochan Hanuman Ashtak - Bhaktilok

521 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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संकट मोचन नाम तिहारो लिरिक्स (Sankat Mochan Naam Tiharo Lyrics in Hindi) - 


बाल समय रवि भक्षी लियो तब

तीनहुँ लोक भयो अंधियारों

ताहि सों त्रास भयो जग को

यह संकट काहु सों जात न टारो


देवन आनि करी विनती तब

छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

संकटमोचन नाम तिहारो


बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि

जात महाप्रभु पंथ निहारो

चौंकि महामुनि साप दियो तब

चाहिए कौन बिचार बिचारो


कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु

सो तुम दास के सोक निवारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

(संकटमोचन नाम तिहारो)


अंगद के संग लेन गए सिय

खोज कपीस यह बैन उचारो

जीवत ना बचिहौ हम सो जु

बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो


हेरी थके तट सिन्धु सबे तब

लाए सिया-सुधि प्राण उबारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

संकटमोचन नाम तिहारो


रावण त्रास दई सिय को सब

राक्षसी सों कही सोक निवारो

ताहि समय हनुमान महाप्रभु

जाए महा रजनीचर मरो


चाहत सीय असोक सों आगि सु

दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

(संकटमोचन नाम तिहारो)

(संकटमोचन नाम तिहारो)


बान लग्यो उर लछिमन के तब

प्राण तजे सूत रावन मारो

लै गृह बैद्य सुषेन समेत

तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो


आनि सजीवन हाथ दिए तब

लछिमन के तुम प्रान उबारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

संकटमोचन नाम तिहारो


रावन युद्ध अजान कियो तब

नाग कि फाँस सबै सिर डारो

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल

मोह भयो यह संकट भारो


आनि खगेस तबै हनुमान जु

बंधन काटि सुत्रास निवारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

(संकटमोचन नाम तिहारो)


बंधु समेत जबै अहिरावन

लै रघुनाथ पताल सिधारो

देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि

देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो


जाये सहाए भयो तब ही

अहिरावन सैन्य समेत संहारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

(संकटमोचन नाम तिहारो)


काज किये बड़ देवन के तुम

बीर महाप्रभु देखि बिचारो

कौन सो संकट मोर गरीब को

जो तुमसो नहिं जात है टारो


बेगि हरो हनुमान महाप्रभु

जो कछु संकट होए हमारो


को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

(संकटमोचन नाम तिहारो)


(संकटमोचन नाम तिहारो)

(संकटमोचन नाम तिहारो)



*** Singer: HARIHARAN ***



🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "संकट मोचन नाम तिहारो लिरिक्स (Sankat Mochan Naam Tiharo Lyrics in Hindi) - Sankat Mochan Hanuman Ashtak - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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