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श्री हनुमान गायत्री मंत्र (Shri Hanuman Gayatri Mantra in Hindi) - Abhay Jodhpurkar Hanuman Mantra - Bhaktilok

102 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री हनुमान गायत्री मंत्र | Shri Hanuman Gayatri Mantra in Hindi

श्री हनुमान गायत्री मंत्र, हनुमान उपासना परंपरा का एक अत्यंत प्रभावशाली और तेजस्वी वैदिक मंत्र है। यह मंत्र भगवान श्री राम के परम भक्त, संकटमोचन, बल-बुद्धि-विद्या के दाता और कलयुग के जागृत देवता श्री हनुमान जी को समर्पित है। गायत्री छंद में निबद्ध होने के कारण यह मंत्र साधक के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्भयता और निष्काम सेवा भाव का संचार करता है। अभय जोधपुरकर द्वारा प्रस्तुत "श्री हनुमान गायत्री मंत्र" संकीर्तन इस पवित्र मंत्र की दिव्यता को भक्ति संगीत के माध्यम से सहज और हृदयस्पर्शी बना देता है। यह भजन साधक के भीतर के भय, अशांति और नकारात्मकता को दूर कर आत्मगौरव, साहस और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम जागृत करने का माध्यम बनता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है — यही इस भजन और मंत्र की मूल भावना है।

मूल मंत्र एवं शुद्ध पाठ | Complete Mantra

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्

ॐ आंजनेयाय विद्महे महावीराय धीमहि।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

उपरोक्त दोनों पाठ परंपरा में प्रचलित हैं। प्रथम "बीज मंत्र" रूप है जो तांत्रिक एवं मंत्र शास्त्र की परंपरा में अत्यंत प्रभावी माना जाता है, तथा द्वितीय "गायत्री छंद" में निबद्ध पाठ है जिसका जप साधक विशेष रूप से करते हैं। दोनों का ही उद्देश्य हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना और साधक के भीतर दिव्य ऊर्जा का संचार करना है।

विस्तृत शब्दार्थ एवं पद-विच्छेद | Word-by-word Meaning

मंत्र पद पद-विच्छेद हिंदी अर्थ
ॐ ॐ प्रणव नाद, ब्रह्म का प्रतीक, समस्त सृष्टि का मूल स्वर
हं हं हनुमान जी का बीज अक्षर, शक्ति एवं तेज का सूचक
हनुमते हनुमत् + ए हनुमान जी को, हनुमान जी के लिए
रुद्रात्मकाय रुद्र + आत्मकाय रुद्र (शिव) के अंश से प्रकट हुए, रुद्र स्वरूप वाले
हुं हुं रक्षा एवं शत्रु नाश का बीज अक्षर
फट् फट् नाश, विदारण, बाधा-निवारण का सूचक बीज
आंजनेयाय अंजनी + एय + य माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी को
विद्महे विद् + महे हम जानते हैं, हम ज्ञान प्राप्त करते हैं
महावीराय महा + वीर + आय महान वीर, पराक्रमी हनुमान जी को
धीमहि धी + महि हम ध्यान करते हैं, हम धारण करते हैं
तन्नः तत् + नः वह हमें, वह हमारे लिए
हनुमान् हनुमान् हनुमान जी
प्रचोदयात् प्र + चोदयात् प्रेरित करें, जागृत करें, मार्गदर्शन दें

सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Hindi Meaning & Bhavarth

श्री हनुमान गायत्री मंत्र का सरल हिंदी अर्थ इस प्रकार है — "हम उन हनुमान जी का ध्यान करते हैं जो माता अंजनी के पुत्र हैं और महान वीर हैं। वे हनुमान जी हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें, हमें सद्बुद्धि एवं सद्ज्ञान प्रदान करें।" बीज मंत्र "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्" का भाव यह है कि हम रुद्र के अंश से प्रकट हुए हनुमान जी का आह्वान करते हैं, जो हमारी समस्त बाधाओं, भय एवं शत्रुओं का नाश करें।

इस मंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साधक के भीतर तीन स्तरों पर कार्य करता है — शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक। शारीरिक स्तर पर यह रोग, दुर्बलता और थकान को दूर कर साहस एवं ऊर्जा का संचार करता है। मानसिक स्तर पर यह भय, चिंता, अवसाद और नकारात्मक विचारों को समाप्त कर आत्मविश्वास एवं स्थिरता प्रदान करता है। आध्यात्मिक स्तर पर यह साधक को भक्ति, वैराग्य और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है।

हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। वे बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति — इन चारों का समन्वित स्वरूप हैं। इस मंत्र के नियमित जप से साधक के भीतर वही गुण प्रकट होने लगते हैं जो हनुमान जी के स्वभाव हैं — निर्भयता, सेवा भाव, प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का साहस। जिस प्रकार हनुमान जी ने लंका दहन किया, संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए और प्रभु श्री राम के प्रति अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया, उसी प्रकार यह मंत्र साधक को अपने जीवन के संकटों का सामना करने की शक्ति और प्रभु के प्रति समर्पण का भाव देता है।

शास्त्रीय संदर्भ, ऋषि एवं छंद | Scriptural Origin

हनुमान गायत्री मंत्र का उल्लेख अनेक तांत्रिक एवं पौराणिक ग्रंथों में मिलता है, विशेष रूप से "हनुमान तंत्र", "रुद्र यामल तंत्र", "श्री हनुमत् कवच" तथा "पराशर संहिता" जैसे ग्रंथों में इस मंत्र की महिमा वर्णित है। यह मंत्र गायत्री छंद में निबद्ध है, जो वैदिक परंपरा का सर्वाधिक पवित्र छंद माना जाता है। इसके देवता स्वयं श्री हनुमान जी हैं, जो रुद्र के अंशावतार माने जाते हैं।

परंपरा के अनुसार इस मंत्र के द्रष्टा ऋषि अगस्त्य अथवा ब्रह्मा जी माने जाते हैं, तथा बीज "हं" हनुमान जी का तेजस्वी बीजाक्षर है। "रुद्रात्मकाय" पद यह सिद्ध करता है कि हनुमान जी शिव जी के अंश से प्रकट हुए हैं, इसलिए इसमें शिव तत्व और हनुमान तत्व — दोनों की ऊर्जा समाहित है। यही कारण है कि यह मंत्र अत्यंत प्रभावी और शीघ्र फलदायी माना जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि कलियुग में हनुमान जी की उपासना सर्वाधिक सुलभ और फलदायी है। जहाँ अन्य देवताओं की उपासना में दीर्घ साधना, विधि-विधान और शुद्धता की आवश्यकता होती है, वहाँ हनुमान जी केवल भक्ति भाव और नाम स्मरण से ही प्रसन्न हो जाते हैं। हनुमान गायत्री मंत्र इसी सुलभता और शीघ्र फलदायिता का सर्वोत्तम उदाहरण है।

मंत्र जप विधि, नियम एवं शुभ मुहूर्त | Chanting Method, Rules & Vidhi

हनुमान गायत्री मंत्र का जप करने के लिए निम्नलिखित विधि एवं नियमों का पालन करना चाहिए —

जप का समय एवं मुहूर्त

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (लगभग 4 से 6 बजे) सर्वोत्तम समय माना जाता है।
  • मंगलवार एवं शनिवार का दिन हनुमान उपासना के लिए विशेष शुभ है।
  • सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय भी जप किया जा सकता है।
  • हनुमान जन्मोत्सव (चैत्र पूर्णिमा), दीपावली, रामनवमी तथा हनुमान चालीसा पाठ के साथ इस मंत्र का जप विशेष फलदायी होता है।

जप विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल रंग के वस्त्र विशेष शुभ माने जाते हैं।
  2. पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठें।
  3. सामने हनुमान जी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें, दीपक एवं धूप प्रज्वलित करें।
  4. हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल पुष्प एवं बूंदी का प्रसाद अर्पित करें।
  5. रुद्राक्ष अथवा लाल मोती की माला से मंत्र का जप करें।
  6. न्यूनतम 108 बार अथवा 11, 21, 51 माला का जप करें। विशेष प्रयोजन के लिए 108 माला (11,664 बार) का जप शास्त्रों में वर्णित है।
  7. जप के समय उच्चारण स्पष्ट, धीमा और भक्ति भाव से युक्त होना चाहिए।
  8. जप समाप्त होने पर हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें।
  9. अंत में आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।

मुख्य नियम एवं सावधानियां

  • जप के दिनों में सात्विक भोजन ग्रहण करें, मांस-मदिरा का त्याग करें।
  • ब्रह्मचर्य एवं सत्य का पालन करें।
  • मन में किसी के प्रति द्वेष अथवा बुरी भावना न रखें।
  • जप की संख्या एवं समय में नियमितता रखें।
  • मंत्र का उच्चारण शुद्ध हो, इसके लिए किसी गुरु अथवा विद्वान से दीक्षा लेना उत्तम माना जाता है।

दार्शनिक महत्व एवं लाभ | Spiritual Benefits

हनुमान गायत्री मंत्र का दार्शनिक महत्व अत्यंत गहन है। यह मंत्र साधक को यह सिखाता है कि वास्तविक बल शारीरिक नहीं, आत्मिक है। हनुमान जी का बल उनके ब्रह्मचर्य, प्रभु भक्ति और निष्काम सेवा से प्राप्त हुआ था। इसी प्रकार यह मंत्र साधक को आंतरिक शुद्धि, संयम और समर्पण की ओर प्रेरित करता है।

इस मंत्र के नियमित जप से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं —

  • भय एवं चिंता का नाश: यह मंत्र साधक के मन से समस्त भय, अशांति और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
  • बल एवं साहस की वृद्धि: शारीरिक एवं मानसिक बल में वृद्धि होती है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना सहज हो जाता है।
  • बुद्धि एवं विद्या की प्राप्ति: विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र विशेष रूप से लाभकारी है, स्मरण शक्ति एवं एकाग्रता बढ़ती है।
  • रोग एवं दुर्बलता से मुक्ति: हनुमान जी संकटमोचन हैं, इस मंत्र के जप से अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों में लाभ मिलता है।
  • शत्रु एवं बाधा निवारण: बीज मंत्र "हुं फट्" शत्रुओं एवं बाधाओं का नाश करता है।
  • आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता: साधक के भीतर आत्मगौरव और नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।
  • भक्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति: प्रभु श्री राम एवं हनुमान जी के प्रति अनन्य प्रेम जागृत होता है।
  • ग्रह दोष एवं मंगल दोष शांति: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह मंत्र मंगल ग्रह एवं शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करता है।

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान गायत्री मंत्र का भी विशेष धार्मिक महत्व है। जहाँ श्री हनुमान चालीसा भक्ति एवं स्तुति का सर्वोच्च माध्यम है, वहाँ यह गायत्री मंत्र साधना एवं ऊर्जा जागरण का माध्यम है। दोनों का समन्वित पाठ साधक के जीवन में अद्भुत परिवर्तन लाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हनुमान गायत्री मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

सामान्य साधक के लिए प्रतिदिन 108 बार (एक माला) का जप पर्याप्त है। विशेष प्रयोजन अथवा संकट काल में 11, 21 अथवा 51 माला का जप किया जा सकता है। शास्त्रों में 108 माला (11,664 बार) के जप को सिद्धि प्रदायक बताया गया है।

क्या हनुमान गायत्री मंत्र का जप बिना दीक्षा के किया जा सकता है?

हाँ, हनुमान जी की उपासना में दीक्षा अनिवार्य नहीं है। भक्ति भाव एवं श्रद्धा के साथ किया गया जप भी फलदायी होता है। हालांकि शुद्ध उच्चारण एवं विधि जानने के लिए किसी विद्वान अथवा गुरु का मार्गदर्शन लेना उत्तम रहता है।

हनुमान गायत्री मंत्र का जप किस दिन और किस समय करना श्रेष्ठ है?

मंगलवार एवं शनिवार का दिन विशेष शुभ है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय के समय जप सर्वोत्तम माना जाता है। संध्या काल में भी जप किया जा सकता है।

क्या यह मंत्र विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है?

हाँ, यह मंत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसके नियमित जप से स्मरण शक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास एवं परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है। हनुमान जी को विद्या एवं बुद्धि का दाता माना जाता है।

क्या हनुमान गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा साथ पढ़ सकते हैं?

हाँ, दोनों का समन्वित पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। पहले हनुमान गायत्री मंत्र का जप करें, तत्पश्चात श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे साधक को दोहरा लाभ मिलता है।

क्या महिलाएं हनुमान गायत्री मंत्र का जप कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा एवं शुद्धता के साथ इस मंत्र का जप कर सकती हैं। हनुमान जी की कृपा सभी भक्तों पर समान रूप से बरसती है, चाहे वे स्त्री हों अथवा पुरुष।

अभय जोधपुरकर का यह भजन कहाँ सुना जा सकता है?

अभय जोधपुरकर द्वारा प्रस्तुत "श्री हनुमान गायत्री मंत्र" संकीर्तन भक्ति संगीत के प्रमुख मंचों तथा संगीत स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। यह भजन अपनी मधुर धुन एवं भक्ति भाव के कारण श्रोताओं में अत्यंत लोकप्रिय है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे हनुमान उपासना परंपरा, गायत्री मंत्र विद्या तथा भक्ति संगीत के संदर्भों के आधार पर संकलित किया गया है। इसमें प्रस्तुत मंत्र पाठ, शब्दार्थ एवं जप विधि पारंपरिक शास्त्रीय स्रोतों — हनुमान तंत्र, रुद्र यामल तंत्र, पराशर संहिता तथा प्रचलित भक्ति परंपरा — पर आधारित है।

अभय जोधपुरकर द्वारा प्रस्तुत संकीर्तन की चर्चा भक्ति संगीत परंपरा के संदर्भ में की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे मंत्र जप एवं साधना की विधि अपने कुल परंपरा अथवा योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही अपनाएं। भक्ति में श्रद्धा एवं निष्ठा ही सर्वोपरि है।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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