Hanuman Bhajan

बेगी हरो हनुमान महाप्रभु लिरिक्स (Vegi Haro Hanuman Mahaprabhu Lyrics In Hindi) - Hanuman Bhajan - Bhaktilok

534 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बेगी हरो हनुमान महाप्रभु लिरिक्स (Vegi Haro Hanuman Mahaprabhu Lyrics In Hindi) - एक परिचय

हनुमान महाप्रभु की कृपा और उनके असीम करुणा भाव का स्मरण कराते हुए 'बेगी हरो हनुमान महाप्रभु' एक अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और हृदय को झकझोर देने वाला प्रसिद्ध हनुमान भजन है। सनातन हिंदू धर्म और भक्ति परंपरा में संकट मोचन हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता के रूप में पूजा जाता है। जब भी भक्त के जीवन में कोई भी भौतिक, मानसिक या आध्यात्मिक संकट उपस्थित होता है, तब वह अपनी संपूर्ण श्रद्धा और विनय के साथ पवनपुत्र की शरण में जाता है। इस भजन का मुख्य भाव (Mood/Bhava) पूर्ण समर्पण, आर्त पुकार और अनन्य निष्ठा का है, जो साधक के मन में अगाध विश्वास जगाता है कि संकट के समय महाप्रभु अतिशीघ्र (बेगी) आकर सारे दुखों का निवारण कर देंगे। इस दिव्य रचना का गायन विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ के उपरांत, रात्रिकालन सत्संग, और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसके श्रवण मात्र से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, मन को शांति मिलती है और साधक के भीतर अद्भुत आत्मबल का संचार होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

बेगी हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो।


बेगी हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो,
कौन से संकट मोर गरीब को जो तुम से नहीं जात है टारो।
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो महाराज,
तन मे तुम्हरे शक्ति विराजे, मन भक्ति से भीना।

जो जन तुम्हरी शरण मे आये, दुःख दरद हर लीना,
महावीर प्रभु हम दुखियन के तुम हो गरीब नवाज।
राम लखन वैदेही तुम पर सदा रहे हर्षाये,
हृदय चीर के सारे जग को, राम सीय दर्शाए।

दोऊ कर जोड़ अरज हनुमंता कहिओ प्रबु से आज,
राम भजन के तुम हो रसिया, हनुमत मंगलकारी।
अर्चन वंदन करते तेरा दुनिया के नर नारी,
राम नाम जप के हनुमंता बने भगतन सरताज।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन हनुमान जी के प्रति अनन्य प्रेम, दीनता और पूर्ण विश्वास का एक अद्भुत संगम है। भजन की शुरुआत अत्यंत मार्मिक पुकार के साथ होती है, जिसमें भक्त अपने आराध्य महाप्रभु हनुमान जी से निवेदन करता है कि हे प्रभु! मेरे जीवन में जो भी छोटे-बड़े संकट या कष्ट हैं, उन्हें आप अतिशीघ्र (बेगी) हर लीजिए। भक्त पूछता है कि ऐसा कौन सा संकट या विपत्ति है, जिसे मेरे इस दीन-हीन शरीर पर देखकर आप टाल नहीं सकते? अर्थात् आपकी शक्ति और करुणा इतनी असीम है कि संसार का कोई भी कष्ट आपके लिए असाध्य नहीं है।

आगे की पंक्तियों में भक्त हनुमान जी की जयकार करते हुए उनकी महिमा का गुणगान करता है। वह कहता है कि आपके तन में अष्ट-सिद्धि और नौ-निधि जैसी अनंत शक्तियां विराजमान हैं और आपका मन सदा भगवान श्रीराम की भक्ति से सराबोर (भीना) रहता है। जो भी मनुष्य आपकी शरण में आता है, आप उसके समस्त दुखों और दर्दों को तुरंत हर लेते हैं। आप दुखियों के सच्चे रक्षक और 'गरीब नवाज' हैं, जो बिना किसी भेदभाव के हर आर्त जन की पुकार सुनते हैं।

भजन के अंतिम चरणों में हनुमान जी के भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के प्रति अगाध प्रेम का वर्णन है। माता सीता और प्रभु श्रीराम आप पर सदा प्रसन्न रहते हैं। आपने अपनी छाती चीरकर संपूर्ण संसार को यह दिखा दिया कि आपके रोम-रोम में केवल सिया-राम बसते हैं। भक्त अपने दोनों हाथ जोड़कर हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि हे हनुमत! आप भगवान श्रीराम से हमारी अरज कहें। आप राम नाम के सबसे बड़े रसिया और मंगल करने वाले हैं। संसार के समस्त नर-नारी आपका अर्चन और वंदन करते हैं। राम नाम का निरंतर जप करके ही आप भक्तों के सिरताज बने हैं। इस प्रकार यह भजन साधक को यह सिखाता है कि संकट के समय अपनी बुद्धि पर भरोसा करने के बजाय हनुमान जी की शरण में जाने से सभी कष्टों का स्वतः निवारण हो जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • संकट निवारण की शक्ति: यह भजन विशेष रूप से संकट मोचन रूप की स्तुति करता है, जिससे मानसिक और शारीरिक भय दूर होता है।
  • श्रीराम भक्ति का प्रतीक: हनुमान जी के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरणों में प्रीति जोड़ने का संदेश देता है।
  • भक्ति रस और समर्पण: इसमें आर्त भाव (संकटग्रस्त भक्त की पुकार) और दास्य भक्ति का सुंदर समन्वय है।
  • मानसिक शांति: इसके नियमित गायन या श्रवण से साधक को अगाध मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
  • सार्वभौमिक स्वीकार्यता: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग, बच्चे, युवा और वृद्ध बड़े ही सरल सुर में गा सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को प्रातः काल स्नान के पश्चात हनुमान जी के विग्रह या चित्र के समक्ष बैठकर गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा संध्या वंदन के समय, मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा के दौरान, तथा सुंदरकांड या हनुमान चाليसा के पाठ के उपरांत इस भजन का गान करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसे मंदिर में सामूहिक सत्संग के दौरान ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम के साथ भी पूरी तन्मयता से गाया जा सकता है। भजन शुरू करने से पहले शुद्ध आसन पर बैठकर आचमन करें, दीप प्रज्वलित करें और हनुमान जी को सिंदूर, चोला तथा बूंदी के प्रसाद का भोग लगाएं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के प्रमुख आराध्य भगवान श्री हनुमान जी हैं, जिन्हें भगवान शिव का रुद्रावतार, केसरी नंदन और अंजनी पुत्र कहा जाता है। हनुमान जी को अमरत्व का वरदान प्राप्त है और वे कलयुग में जागृत देवताओं में सर्वोपरि माने जाते हैं। उनके साथ ही इस भजन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी का भी पावन स्मरण किया गया है, जिनके स्मरण के बिना हनुमान जी की कोई भी उपासना पूर्ण नहीं मानी जाती।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक (Traditional) लोक-भक्ति धाराओं से प्रेरित है, जिसे संतों और लोक-गायकों ने पीढ़ियों से सहेज कर रखा है। लोक-कवि ने इसमें तुलसीदास जी की रामचरितमानस और हनुमान बाहुक के उस भाव को पिरोया है जिसमें संकट के समय हनुमान जी को पुकारा जाता है। मौखिक परंपरा से होते हुए यह भजन आज डिजिटल युग में भी भक्तों के बीच उतना ही लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल अवधि, ब्रज और हिंदी का मिश्रित लोक-स्वरूप है, जिसे जनसाधारण आसानी से समझ सकता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। इसकी लयबद्धता और तुकबंदी (Rhyme Scheme) ऐसी है कि एक बार सुनने के बाद ही यह जुबान पर चढ़ जाती है और मन में गूंजती रहती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • शरणागति का महत्व: जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा आए, भगवान की शरण में जाने से मार्ग प्रशस्त होता है।
  • नियमित स्मरण: भगवान का नाम और संतों का सत्संग जीवन के हर अंधकार को दूर कर सकता है।
  • अहंकार का त्याग: 'मोर गरीब को' कहकर भक्त अपनी दीनता स्वीकार करता है, जो ईश्वर प्राप्ति का प्रथम सोपान है।
  • सेवा और निष्ठा: हनुमान जी की तरह निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों और राम-सेवा में लीन रहना चाहिए।
शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
बेगी अतिशीघ्र, जल्दी से संकट निवारण की त्वरित प्रार्थना में
हरो दूर करो, नष्ट करो दुख और कष्टों को हरने के अर्थ में
गोसाईं स्वामी, प्रभु, भगवान हनुमान जी के संबोधन के रूप में
गरीब नवाज गरीबों और दुखियों पर दया करने वाला हनुमान जी के करुणावान स्वभाव हेतु
सरताज सिर का ताज, सर्वोच्च, श्रेष्ठ भक्तों में श्रेष्ठ होने के अर्थ में

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बेगी हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो" - भक्त प्रार्थना करता है कि हे हनुमान महाप्रभु! मेरे जीवन में जो भी छोटे-बड़े संकट हों, उन्हें आप तुरंत दूर कर दीजिए।

"कौन से संकट मोर गरीब को जो तुम से नहीं जात है टारो" - भक्त अपनी दीनता प्रकट करते हुए कहता है कि मुझ जैसे दीन के ऐसे कौन से संकट हैं जिन्हें आप अपनी कृपा से टाल नहीं सकते?

"जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो महाराज" - हे हनुमान स्वामी! आपकी जय हो, मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखिए।

"तन मे तुम्हरे शक्ति विराजे, मन भक्ति से भीना" - आपके शरीर में असीम बल और शक्ति का निवास है और आपका हृदय राम भक्ति से सराबोर है।

भजन से जुड़े संबंधित मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ साधक निम्नलिखित प्रसिद्ध हनुमान मंत्र का भी जाप कर सकते हैं:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम बेगी हरो हनुमान महाप्रभु लिरिक्स (Vegi Haro Hanuman Mahaprabhu Lyrics)
आराध्य देव संकट मोचन श्री हनुमान जी एवं श्री राम
रचना परंपरा पारंपरिक लोक भजन / भक्ति साहित्य
भाषा सरल हिंदी / अवधी मिश्रित
मुख्य विषय संकट निवारण और शरणागति
मुख्य भाव विनय, प्रेम, समर्पण और विश्वास
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'बेगी हरो हनुमान महाप्रभु' भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन संकट मोचन भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित है, जिसमें उनके करुणावान और संकट हरने वाले स्वरूप का गुणगान किया गया है।

इस भजन का पाठ किस दिन करना सबसे उत्तम माना जाता है?

इस भजन का पाठ मंगलवार और शनिवार को करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दोनों दिन हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष हैं।

क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को आप घर पर अकेले या परिवार के साथ सामूहिक रूप से पूरी श्रद्धा और स्वच्छता के साथ गा सकते हैं।

'बेगी' शब्द का क्या अर्थ है?

भक्ति साहित्य और ब्रज/अवधी भाषा में 'बेगी' शब्द का अर्थ 'शीघ्र', 'जल्दी' या 'तत्काल' होता है।

इस भजन के श्रवण से क्या लाभ मिलता है?

इसके नियमित श्रवण और गान से मानसिक तनाव दूर होता है, भय से मुक्ति मिलती है और हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

क्या इस भजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं?

निश्चित रूप से, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण के पाठ के साथ इस भजन को गाने से साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

क्या बच्चों को यह भजन सिखाया जा सकता है?

हाँ, इसकी सरल शब्दावली और लयबद्धता के कारण बच्चे इसे बहुत जल्दी सीख सकते हैं और उनमें संस्कार व धार्मिक भावना जागृत होती है।

क्या इस भजन के गायन के कोई विशेष नियम हैं?

इसके लिए कोई कठिन नियम नहीं है, बस मन में पवित्रता, स्वच्छता और हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास होना आवश्यक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासा और प्रामाणिक devotional content की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें भजन के लिरिक्स, उसका विस्तृत भावार्थ, और उसके आध्यात्मिक महत्व को सरल हिंदी में प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से जनहित और भक्ति प्रचार को समर्पित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक हनुमान भक्ति संगीत एवं लोक-साहित्य संग्रह
  • श्री हनुमान चालीसा एवं संकट मोचन स्तोत्र परंपरा
  • सनातन धर्म के पौराणिक ग्रंथ एवं वाल्मीकि रामायण प्रसंग

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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