Hanuman Bhajan

मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु (Mera Koi Nhin Eak Tere Sivay Hey Prabhu Lyrics in Hindi) - by Uma Lahari Hanuman Bhajan - Bhaktilok

101 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान भक्ति परंपरा में भजनों का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। "मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु" एक ऐसा हृदयस्पर्शी हनुमान भजन है जो साधक के भीतर शरणागति, आत्मसमर्पण और अनन्य भक्ति का भाव जागृत करता है। उमा लहरी द्वारा प्रस्तुत यह भजन संकटमोचन हनुमान जी की महिमा का सजीव चित्रण करता है। इस भजन की आत्मा यह संदेश है कि जब जीव संसार के सभी सहारों से टूट जाता है, तब प्रभु ही उसका एकमात्र आश्रय बनते हैं। भजन की लय, भाव और शब्दावली में जो भक्ति-रस बहता है, वह श्रोता को भावविभोर कर देता है। यह भजन मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिरों में, संकटमोचन हनुमान चालीसा के साथ, तथा राम भक्ति परंपरा के सत्संगों में विशेष रूप से गाया जाता है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है — यही इस भजन की मूल भावना है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु ॥

मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु,
मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु।

संकट में तू ही सहारा, दुख में तू ही सहारा,
तेरे चरणों में मिले जगत को किनारा।
मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु।

तू ही माता, तू ही पिता है,
तू ही बंधु, तू ही सखा है,
तेरी कृपा से हर कष्ट मिटता,
तेरे नाम से हर भय छूटता।
मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु।

लंका जलाई तूने प्रभु, संजीवनी ले आया,
राम नाम की महिमा से जग को तारा।
तेरे बल से बलवान कोई नहीं,
तेरे ज्ञान से ज्ञानवान कोई नहीं।
मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु।

भवसागर से तार दे प्रभु,
अपने चरणों में लगा दे प्रभु,
जन्म-जन्म का साथ निभाना,
भक्त जन का दुखड़ा मिटाना।
मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु।

तू दयालु, तू कृपालु, तू ही रखवाला,
तेरे द्वारे पे आया हूँ मैं भरोसा लगा कर,
अब तो दर्शन दे दे प्रभु,
मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु।

जय श्री राम, जय हनुमान,
जय श्री राम, जय हनुमान।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का केंद्रीय भाव शरणागति और अनन्य भक्ति है। "मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु" पंक्ति में साधक अपने जीवन की समस्त आसक्तियों, सांसारिक संबंधों और भौतिक आधारों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। यह केवल एक भावुक कथन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सत्य की घोषणा है — जीव का वास्तविक संबंध केवल परमात्मा से है, शेष सब संबंध माया के बंधन हैं।

भजन में हनुमान जी को माता, पिता, बंधु और सखा — चारों रूपों में स्मरण किया गया है। यह भाव भक्ति शास्त्रों के 'चतुर्विध पुरुषार्थ' और 'नवधा भक्ति' के सिद्धांतों से जुड़ा है। जब भक्त हनुमान जी को माता कहता है तो वह उनकी वात्सल्यमयी कृपा का आश्रय लेता है; जब पिता कहता है तो उनकी रक्षा-शक्ति में विश्वास करता है; जब बंधु कहता है तो उनके सहयोग पर निर्भर होता है; और जब सखा कहता है तो उनके साथ भावनात्मक एकात्मता अनुभव करता है।

"लंका जलाई तूने प्रभु, संजीवनी ले आया" पंक्ति में हनुमान जी के दो महान पराक्रमों का स्मरण है — लंका दहन और संजीवनी बूटी का आनयन। यह केवल ऐतिहासिक वर्णन नहीं, बल्कि यह संकेत है कि हनुमान जी असंभव को संभव करने वाले हैं। जब भक्त के जीवन में संकट रूपी लंका जलती है, तब हनुमान जी संजीवनी रूपी समाधान लेकर आते हैं। भजन का यह भाग साधक में आत्मविश्वास और प्रभु-कृपा पर अटूट भरोसा जगाता है।

"भवसागर से तार दे प्रभु" पंक्ति में जीवन के संसार-सागर से पार उतरने की प्रार्थना है। यह भाव गीता के 'संसार सागर' और 'भवसागर' के प्रतीक से मेल खाता है, जहाँ भक्ति ही एकमात्र नौका है। भजन का समापन "जय श्री राम, जय हनुमान" के उद्घोष से होता है, जो राम-हनुमान की युगल भक्ति की परंपरा को दर्शाता है — हनुमान जी की महिमा राम नाम से अभिन्न है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन हनुमान भक्ति परंपरा की एक अनमोल कड़ी है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • शरणागति का भाव: भजन का केंद्रीय स्वर पूर्ण समर्पण है, जो भक्ति मार्ग की प्रथम सीढ़ी मानी जाती है।
  • हनुमान जी की महिमा: लंका दहन, संजीवनी आनयन और राम-भक्ति के प्रसंगों से हनुमान जी की दिव्य शक्ति का बोध होता है।
  • भय-निवारण: भजन के नियमित श्रवण से मानसिक भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है।
  • भक्ति-रस: उमा लहरी की स्वर-लहरी में भक्ति का जो रस बहता है, वह हृदय को द्रवित कर देता है।
  • सार्वभौमिक संदेश: यह भजन किसी एक संप्रदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सभी साधकों के लिए है।

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता माना गया है। इस भजन के माध्यम से साधक उनकी कृपा का आह्वान करता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से इस भजन को गाता है, उसके जीवन से संकट दूर होते हैं और आत्मबल बढ़ता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

हनुमान भजनों के गायन का अपना विशेष महत्व है। इस भजन को निम्न अवसरों पर गाया और सुना जा सकता है:

  • मंगलवार एवं शनिवार: ये दिन हनुमान जी को समर्पित हैं। इन दिनों प्रातःकाल स्नान के बाद इस भजन का गायन विशेष फलदायी माना जाता है।
  • हनुमान जयंती: चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती पर यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • संकटमोचन मंदिर: हनुमान मंदिरों में संध्या आरती के समय इस भजन का गायन होता है।
  • दैनिक साधना: प्रातः या संध्या के समय, दीपक जलाकर, शुद्ध वस्त्र धारण करके इस भजन का गायन किया जा सकता है।
  • सत्संग एवं कीर्तन: राम भक्ति परंपरा के सत्संगों में यह भजन भक्तों के साथ मिलकर गाया जाता है।

गायन की विधि सरल है — पहले हनुमान जी का ध्यान करें, फिर 'श्री राम जय राम जय जय राम' का स्मरण करें, और तत्पश्चात भक्तिभाव से भजन गाएं। भजन के साथ ताली या मंजीरा बजाना भक्ति-रस को बढ़ाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "मेरा कोई नहीं एक तेरे सिवाय हे प्रभु" भजन किसने लिखा है?

यह भजन पारंपरिक हनुमान भक्ति परंपरा का भजन है, जिसे उमा लहरी के स्वर में प्रस्तुत किया गया है। इसका मूल भाव पारंपरिक शरणागति भक्ति से प्रेरित है।

प्रश्न 2: इस भजन को कब गाना चाहिए?

मंगलवार और शनिवार को प्रातःकाल, तथा हनुमान जयंती और संकटमोचन मंदिरों की आरती के समय इस भजन का गायन विशेष शुभ माना जाता है।

प्रश्न 3: क्या इस भजन के गायन से संकट दूर होते हैं?

हनुमान भक्ति परंपरा में यह विश्वास है कि श्रद्धा और भक्तिभाव से इस भजन का गायन करने पर हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट कम होते हैं। यह भक्ति और आत्मविश्वास का विषय है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन को सुनना और गाना दोनों समान हैं?

श्रवण और गायन दोनों ही भक्ति के अंग हैं। श्रवण से भाव जागृत होता है और गायन से भाव गहरा होता है। दोनों का अपना महत्व है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन का कोई विशेष नियम है?

कोई कठोर नियम नहीं है। शुद्धता, श्रद्धा और भक्तिभाव ही मुख्य हैं। हनुमान जी को सिंदूर, चोला और बूंदी के लड्डू का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।

प्रश्न 6: क्या यह भजन हनुमान चालीसा के समान फलदायी है?

हनुमान चालीसा और भजन दोनों भक्ति के साधन हैं। चालीसा में शास्त्रीय संरचना है, जबकि भजन में भाव-प्रधानता अधिक है। दोनों का अपना विशिष्ट स्थान है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें हनुमान भक्ति परंपरा के प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक भजन संग्रहों और शास्त्रीय भक्ति साहित्य के आधार पर भजन का अर्थ, भावार्थ और महत्व प्रस्तुत किया गया है। भजन की पंक्तियाँ पारंपरिक रूप में संकलित हैं और उनका व्याख्या-सहित विवेचन किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन को श्रद्धा और भक्तिभाव से ग्रहण करें।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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