देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "सब तेरा महादेव मैं तेरा तू मेरा" भगवान शिव के प्रति अनन्य समर्पण, अद्वैत भाव और पूर्ण शरणागति का एक अत्यंत भावपूर्ण प्रतीक है। हंसराज रघुवंशी जी की सुरीली और भक्तिपूर्ण आवाज में गाया गया यह भजन आज के समय में शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इसमें भक्त और भगवान के उस अटूट संबंध का वर्णन है, जहाँ भक्त स्वयं को पूरी तरह से महादेव के चरणों में समर्पित कर देता है। यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि मन में शिव के प्रति प्रेम, विश्वास और शांति का संचार भी करता है। इसे विशेष रूप से शिवरात्रि, सावन के सोमवार, या किसी भी शिव सत्संग के अवसर पर गाया और सुना जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मैं तेरा तू मेरा, सब तेरा महादेव -2
चारों दिशा भोले तेरी, धरती अंबर ये जग तेरा
चंदा सूरज भोले तेरे, मैं तो बच्चा हूँ तेरा
मैं तेरा तू मेरा, सब तेरा महादेव -2
फूलों की कलियों में तू, शहरों की गलियों में तू
बस्ती और गाँव की छाँव में तू
ऊंचे पर्वत में भी तू, बहती नदियों में भी तू
सागर की गहराई से गहरा भोले तू
तेरे जैसा न कोई देखा यहां, सब देखा तू नहीं
मैं तेरा तू मेरा, सब तेरा महादेव -2
भोले तेरी ये माया -2, कोई भी समझ न पाया
मुनियों ने तुमको जाना, मुनियों ने है पहचाना
बरसों से तुम्हे ढूंढ़ता, मैं आया तेरा दीवाना
कैसे तुम दोगे दर्शन, मुझको ये बात बताना
भोले... शम्भू...
मैं तेरा तू मेरा, सब तेरा महादेव -2
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव 'आत्म-समर्पण' है। भक्त कहता है कि हे महादेव, इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब आपका ही है। मैं भी आपका हूँ और आप मेरे हैं। यह अद्वैत भाव है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का अंतर मिट जाता है। भक्त प्रकृति के कण-कण में, ऊंचे पर्वतों में, बहती नदियों में और सागर की गहराइयों में महादेव का ही स्वरूप देखता है। वह स्वीकार करता है कि महादेव की माया को समझना साधारण मनुष्य के वश की बात नहीं है। यह भजन एक ऐसे भक्त की पुकार है जो बरसों से अपने आराध्य की खोज में है और अब उनसे साक्षात दर्शन की याचना कर रहा है। यह भजन हमें सिखाता है कि अहंकार त्याग कर जब हम स्वयं को शिव को सौंप देते हैं, तभी हमें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन शिव भक्ति का एक आधुनिक और प्रभावशाली माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समर्पण का भाव: यह भजन अहंकार को त्यागने और शिव के प्रति पूर्ण विश्वास रखने का संदेश देता है।
- सर्वव्यापकता: इसमें शिव को कण-कण में व्याप्त बताया गया है, जो वेदांत के 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' के सिद्धांत को पुष्ट करता है।
- सरलता: इसके बोल अत्यंत सरल हैं, जिससे कोई भी भक्त इसे आसानी से गाकर शिव की भक्ति में लीन हो सकता है।
- मानसिक शांति: इस भजन का श्रवण मन को एकाग्र करने और तनाव मुक्त करने में सहायक है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय सुना जा सकता है, लेकिन शिव भक्ति के विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और भी अधिक होता है:
- सावन का महीना: सावन के सोमवार को शिव मंदिर में इस भजन का कीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- महाशिवरात्रि: रात्रि जागरण के समय इस भजन को गाने से शिव कृपा की प्राप्ति होती है।
- दैनिक पूजा: प्रातः काल स्नान के बाद शिव जी के समक्ष धूप-दीप जलाकर इस भजन का पाठ करना मन को पवित्र करता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| महादेव | देवों के देव, शिव | सृष्टि के रचयिता और संहारक |
| माया | संसार का भ्रम | ईश्वर की वह शक्ति जिससे संसार चलता है |
| अंबर | आकाश | शिव की व्यापकता का प्रतीक |
| दीवाना | भक्त, प्रेमी | शिव के प्रति अटूट प्रेम रखने वाला |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | सब तेरा महादेव मैं तेरा तू मेरा |
|---|---|
| गायक | हंसराज रघुवंशी |
| आराध्य देव | भगवान शिव (महादेव) |
| मुख्य भाव | समर्पण और प्रेम |
| भाषा | हिंदी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भक्ति और संगीत के समन्वय को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। भजन के बोल और भावार्थ को शिव पुराण और भक्ति परंपरा के आधार पर विश्लेषित किया गया है। यह लेख शिव भक्तों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करता है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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