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तुझ संग लगी है कैसी लगन (Tujh Sang Lagi Hai Kaisi Lagan Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan SHEKHAR JAISWAL - Bhaktilok

153 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तुझ संग लगी है कैसी लगन: महादेव की भक्ति में सराबोर एक आध्यात्मिक प्रस्तुति

भक्ति और संगीत का संगम जब देवों के देव महादेव की आराधना के साथ जुड़ता है, तो अंतःकरण में एक अद्भुत ऊर्जा और शांति का संचार होता है। 'तुझ संग लगी है कैसी लगन' (Tujh Sang Lagi Hai Kaisi Lagan Lyrics in Hindi) शेखर जायसवाल द्वारा स्वरबद्ध एक अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान भोलेनाथ भजन है। यह भजन भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम, समर्पण और डमरू की पावन ध्वनि पर मग्न होकर नाचने वाले शिव भक्तों के अद्वितीय भाव को व्यक्त करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के सम्पूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, भगवान शिव की महिमा, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे। शिव भक्ति की इस पावन धारा में गोता लगाने के लिए आप हमारे अन्य पृष्ठों पर शिव तांडव स्तोत्र और अन्य प्रमुख भोलेनाथ भजन भी पढ़ सकते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


तुझ संग लगी है कैसी लगन।
डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन।
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी

भक्ति में तेरी हां रम जाऊं मैं
एक जहां बस तुझे पाऊं में।
जब तक सांस चलेगी मेरी
भोले तेरी महिमा के गुण गाऊं में
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।

तुझ संग लगी है कैसी लगन।
डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन।
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी
जय भोले भोले भंडारी

तुझसे ही ज्योति तुझी से है नूर।
दिल में है छाया तेरा ही सुरूर।
तुझसे ही ज्योति तुझी से है नूर।
दिल में है छाया तेरा ही सुरूर।
अपनी दुआओं में मांगू यही
करना कभी मुझे अपने से दूर।
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।

तुझ संग लगी है कैसी लगन।
डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन।
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।
ओ मेरे भोले शंकरा
आदि शिव शंकरा।
(Song - TUJH SANG LAGI LAGAN | Singer - SHEKHAR JAISWAL)

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्य के बीच के अगाध प्रेम और अनन्य भक्ति को दर्शाता है। भजन की पहली पंक्तियाँ—"तुझ संग लगी है कैसी लगन, डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन"—यह दर्शाती हैं कि जब भक्त का मन भगवान शिव से जुड़ जाता है, तो उसे संसार की सुध-बुध नहीं रहती। वह शिव के डमरू की गूंज में ब्रह्मांड के संगीत को महसूस करता है और आनंद विभोरे होकर नाचने लगता है। 'आदि शिव शंकरा' कहकर इस बात का स्मरण कराया गया है कि भगवान शिव ही सृष्टि के आरंभ, पालन और संहार के मूल स्रोत हैं।

अगले चरणों में गायक कहता है कि उसकी एकमात्र इच्छा भगवान की भक्ति में लीन रहना और उन्हीं को अपने जीवन का सर्वस्व मानना है। जब तक शरीर में श्वास है, तब तक वह केवल शिव महिमा का गान करता रहेगा। "तुझसे ही ज्योति तुझी से है नूर, दिल में है छाया तेरा ही सुरूर"—यह पंक्तियाँ वेदांत के इस सत्य को सरल शब्दों में प्रकट करती हैं कि संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना और दिव्यता शिव से ही उद्भूत है। भक्त अंत में अत्यंत करुणा और विनय के साथ प्रार्थना करता है कि हे भोलेनाथ! मुझे कभी भी अपने चरणों से दूर मत करना, क्योंकि आपकी कृपा ही मेरा वास्तविक संबल है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भगवान शिव को देवों के देव 'महादेव' कहा जाता है, जो अत्यंत भोले और अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले 'आशुतोष' हैं। यह भजन शिव की इसी सुलभता और करुणा को केंद्र में रखकर रचा गया है। इसकी लयबद्धता और कर्णप्रिय संगीत श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस भजन को सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सोमवार के विशेष दिनों में गाना या सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति भाव का संचार करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजनों का आनंद और आध्यात्मिक लाभ किसी भी समय लिया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्ममुहूर्त एवं प्रातःकाल: दिन की शुरुआत शिव स्मरण और इस भजन के श्रवण से करने से मन में पूरे दिन सकारात्मकता बनी रहती है।
  • प्रदोष काल एवं संध्या समय: प्रदोष काल (संध्या का समय) भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • सावन मास एवं महाशिवरात्रि: श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि के रात्रि जागरण में इस भजन का सामूहिक संकीर्तन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।
  • सत्संग एवं अनुष्ठान: घर पर होने वाले रुद्राभिषेक, सत्यनारायण कथा या शिव सत्संग के दौरान इसे विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में सर्वेश्वर भगवान शिव (भोलेनाथ, शंकरा, भोले भंडारी) हैं। शिव हिंदू त्रिमूर्ति में संहार और पुनरुत्थान के देवता हैं, साथ ही वे आदि गुरु और योगियों के आराध्य भी हैं। इस भजन को स्वर देने वाले कलाकार शेखर जायसवाल हैं, जिन्होंने अपनी मधुर एवं ऊर्जावान आवाज से शिव भक्तों के बीच इसे अत्यंत लोकप्रिय बनाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

'तुझ संग लगी है कैसी लगन' आधुनिक भक्ति संगीत शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे युवा पीढ़ी और पारंपरिक शिव भक्तों दोनों द्वारा समान रूप से सराहा गया है। समकालीन वाद्ययंत्रों और पारंपरिक लोक धुनों के मिश्रण से तैयार यह रचना शिव बारात, कांवड़ यात्रा और विभिन्न धार्मिक आयोजनों की शान बनती है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य आधुनिक परिवेश में युवाओं को शिव भक्ति से जोड़ना और उन्हें आनंद व समर्पण का मार्ग दिखाना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें ब्रज और खड़ी बोली के सहज शब्दों का सुंदर प्रयोग किया गया है। काव्यात्मक शैली में तुकबंदी (Rhyming) का विशेष ध्यान रखा गया है जैसे—'लगन-मगन', 'शंकरा-आदि शंकरा', 'नूर-सुरूर', जो इसे गाने में अत्यंत सरल और कर्णप्रिय बनाती है। रूपक और उपमा अलंकारों के माध्यम से शिव की दिव्यता को सहज ही हृदयंगम कराया गया है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक सत्य सिखाता है:

  • अनन्य समर्पण: भगवान के प्रति प्रेम ऐसा होना चाहिए जिसमें संसार के दुखों और प्रलोभनों का प्रभाव न पड़े।
  • निरंतरता: "जब तक सांस चलेगी मेरी" पंक्ति यह सिखाती है कि भक्ति और सत्कर्म जीवन के अंतिम क्षण तक रुकने नहीं चाहिए।
  • विनम्रता और आश्रय: "करना कभी मुझे अपने से दूर" यह सिखाता है कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर हमेशा ईश्वर के चरणों में शरण मांगनी चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
लगन धुन, तीव्र प्रेम या लगन ईश्वर प्राप्ति के प्रति अटूट निष्ठा
मगन प्रसन्न, आनंदित, तल्लीन भक्ति रस में डूबा हुआ मन
शंकरा कल्याण करने वाले भगवान शिव का एक नाम जो सबका मंगल करते हैं
आदि शिव सृष्टि के मूल वह सत्ता जो समय और काल से परे है
नूर प्रकाश, दिव्यता आत्मा और परमात्मा की अलौकिक चमक
सुरूर नशा, आत्मीय आनंद भक्ति का दिव्य नशा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: तुझ संग लगी है कैसी लगन, डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन।
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे शिव! मेरी आपसे ऐसी प्रीत लग गई है कि अब मुझे आपके डमरू की नाद में ही संपूर्ण ब्रह्मांड का आनंद मिल रहा है और मैं उसमें सुध-बुध खोकर नाच रहा हूँ।

पंक्ति: भक्ति में तेरी हां रम जाऊं मैं, एक जहां बस तुझे पाऊं में।
भावार्थ: मेरी यही अभिलाषा है कि मैं आपकी भक्ति में पूरी तरह रंग जाऊँ और इस पूरी दुनिया में मुझे केवल आप ही आपके दर्शन हों।

पंक्ति: तुझसे ही ज्योति तुझी से है नूर, दिल में है छाया तेरा ही सुरूर।
भावार्थ: हे प्रभु! इस संसार में जो भी प्रकाश और चेतना है, वह सब आपसे ही है। मेरे हृदय पर आपकी भक्ति का ही नशा छाया हुआ है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन का पाठ करने या सुनने के साथ निम्नलिखित महामृत्युंजय मंत्र या शिव पंचाक्षर मंत्र का स्मरण करने से साधना पूर्ण होती है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

ॐ नमः शिवाय॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम तुझ संग लगी है कैसी लगन (Tujh Sang Lagi Hai Kaisi Lagan)
आराध्य देवता भगवान शिव / भोलेनाथ / शंकरा
गायक (Singer) शेखर जायसवाल (Shekhar Jaiswal)
भाषा हिंदी / सरल ब्रज-प्रभावित काव्य
मुख्य भाव (Bhava) भक्ति, प्रेम, समर्पण और आनंद
उपयुक्त अवसर सावन मास, महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत, सत्संग
श्रेणी Bholenath Bhajan / शिव भक्ति गीत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भोलेनाथ भजन के गायक शेखर जायसवाल (Shekhar Jaiswal) हैं, जिन्होंने इसे अपनी मधुर आवाज से सजाया है।

यह भजन देवों के देव महादेव, भगवान शिव, भोलेनाथ और भोले भंडारी को समर्पित है।

इस भजन को सावन सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत, कांवड़ यात्रा और किसी भी शिव सत्संग के दौरान विशेष रूप से गाया व सुना जा सकता है।

भजन की मुख्य पंक्तियाँ हैं: "तुझ संग लगी है कैसी लगन। डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन। ओ मेरे भोले शंकरा, आदि शिव शंकरा।"

शिव भक्ति और स्मरण से मन शांत होता है, मानसिक तनाव कम होता है, अहंकार का नाश होता है और व्यक्ति में धैर्य व परोपकार की भावना विकसित होती है।

हाँ, आप इसे घर पर दैनिक पूजा, संध्या आरती के बाद या रुद्राभिषेक के दौरान आसानी से गा सकते हैं।

'आदि शिव' का अर्थ है वह परमेश्वर जो इस सृष्टि के आरंभ से भी पहले विद्यमान हैं और जिनका कोई आदि या अंत नहीं है।

इस लेख में हमने आपको देवनागरी हिंदी लिपि में शुद्ध और सम्पूर्ण भजन के बोल उपलब्ध कराए हैं ताकि उच्चारण बिल्कुल सटीक हो सके।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री शिव भक्ति साहित्य, समकालीन भजन परंपरा और पारंपरिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। भजन के शब्दों का संकलन शुद्धता और प्रामाणिकता को ध्यान में रखकर किया गया है। यह संपूर्ण सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित की जाती है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सटीक और भक्तिमय जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण एवं पारंपरिक स्तोत्र ग्रंथ
  • भक्तिकालिन संत साहित्य एवं आधुनिक लोक भजन परंपरा
  • शेखर जायसवाल द्वारा प्रस्तुत संगीत और ऑडियो रिकॉर्डिंग संदर्भ
  • सनातन धर्म संस्कृति और शिवाराधना पद्धतियाँ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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