आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Rani Sati Dadi Bhajan

ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः (Om Shanti Shanti Shantihi Mantra In Hindi) - Bhaktilok

2,284 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

 

"ओम शांति शांति शांतिः" हिंदू धर्म में शांति के लिए एक मंत्र या आह्वान है। "ओम" शब्द को एक पवित्र ध्वनि माना जाता है, और "शांति" का अर्थ शांति है। "शांति" का तीन बार दोहराव जोर देने के लिए किया जाता है और माना जाता है कि यह तीन क्षेत्रों में शांति का आह्वान करता है: शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक।


यहाँ हिंदी लिपि में लिखा गया मंत्र है:

ॐ शांति शांति शांतिः


जब जप किया जाता है, तो इस मंत्र का उपयोग अक्सर प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों या ध्यान सत्रों को समाप्त करने के लिए किया जाता है, जो शांति और शांति की सार्वभौमिक इच्छा पर जोर देता है।

ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः (Om Shanti Shanti Shantihi Mantra In Hindi) - Bhaktilok


"ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः: एक आध्यात्मिक मंत्र"

मंत्र का अर्थ: इस मंत्र में व्यक्त किए गए तीन शान्ति शब्दों का अर्थ है - शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शान्ति। यह आध्यात्मिकता की ऊँचाइयों तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है।

मंत्र का महत्व: यह मंत्र ध्यान और मनोबल को स्थिर करने में सहायक होता है और व्यक्ति को आत्मा के साथ संबंध स्थापित करता है। इसका जाप करने से चिंता, असमंजस्य, और अशांति से मुक्ति मिलती है।

ध्यान एवं जप का मार्ग: मंत्र के नियमित ध्यान और जप से व्यक्ति आत्मा की ओर प्रगट होने की अनुभूति करता है, जिससे उसका जीवन पूर्णता, शांति, और संतुलन से भरा होता है।

आध्यात्मिक समृद्धि: इस मंत्र के माध्यम से आत्मा का संबंध बनाए रखने से व्यक्ति आध्यात्मिक समृद्धि की प्राप्ति करता है और अपने चरित्र में उदारता, शांति, और सहिष्णुता का अभास करता है।

समाप्ति: ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः का जाप करते समय व्यक्ति अपने आत्मा की गहराईयों में बसे शांति और स्वस्थता का अनुभव करता है, जिससे उसका जीवन समृद्धि से भरा होता है।


"ओम शांति मंत्र: त्रिधा शान्ति की प्राप्ति"

मंत्र का अर्थ: ओम शांति मंत्र में "ओम" एक पवित्र ध्वनि है जो सृष्टि की उत्पत्ति को सूचित करती है, और "शांति" तीन प्रकार की होती है - शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक शान्ति।

मंत्र का महत्व: इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति त्रिधा शान्ति की प्राप्ति करता है, जिससे उसका जीवन सुख-शांति से भरा होता है। यह मानव जीवन को संतुलित बनाने में मदद करता है।

त्रिधा शान्ति का अर्थ:

  1. शारीरिक शान्ति: मंत्र का जाप करने से शारीरिक बीमारियों से मुक्ति मिलती है और शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
  2. मानसिक शान्ति: मंत्र में छिपी ध्वनियों का ध्यान करने से मानसिक शांति होती है और मन को शांति और स्थिरता की अनुभूति होती है।
  3. आध्यात्मिक शान्ति: मंत्र का जाप करने से आत्मा के साथ संबंध स्थापित होता है और आध्यात्मिक ऊँचाइयों की प्राप्ति होती है।

मंत्र का जाप: त्रिधा शान्ति की प्राप्ति के लिए मंत्र का नियमित जाप करना उत्तम होता है। ध्यान और भक्ति के साथ मंत्र का जाप करने से व्यक्ति अपने जीवन को संपूर्णता की ओर अग्रसर कर सकता है।

समाप्ति: ओम शांति मंत्र का नियमित अभ्यास करते हुए, व्यक्ति अपने जीवन को एक संतुलित, सुखमय, और शांतिपूर्ण दिशा में अग्रसर करता है। इस मंत्र का साधना से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होता है।


"मानवता के लिए शांति का सन्देश: ओम शान्ति शान्ति शान्तिः"

आत्मा का समर्थन: इस मुख्याध्याय में हम आत्मा के सुदृढ़ संबंध की महत्वपूर्णता पर विचार करेंगे, और कैसे यह संबंध मानवता को शांति की ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।

मानवता के साथ शांति: मानवता के लिए शांति का सन्देश ओम शान्ति मंत्र में छिपा होता है, जो सभी मानवों को एक मानव समुदाय के रूप में एकजुट होने का संदेश देता है।

सामंजस्य और समर्थन: ओम शान्ति मंत्र का उच्चारण और समझने से लोग एक-दूसरे के साथ सामंजस्य और समर्थन की भावना बनाए रखते हैं, जिससे समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है।

सहानुभूति और साझा करना: मानवता के लिए शांति का सन्देश यह बताता है कि हमें एक दूसरे के साथ सहानुभूति करना और अपना सुख-दुःख साझा करना चाहिए। इससे समृद्धि, समर्थन, और सामंजस्य की भावना बढ़ती है।

ओम शान्ति मंत्र का अभ्यास: ओम शान्ति मंत्र का नियमित अभ्यास करने से लोग अपने मन, विचार, और क्रियाओं को संतुलित रख सकते हैं, जिससे समृद्धि और शांति का अनुभव होता है।

समाप्ति: मानवता के लिए शांति का सन्देश ओम शान्ति मंत्र में छिपा होता है, जो एक सशक्त, समृद्धि से भरा, और एकता में विश्वास रखने की भावना को उत्तेजित करता है।


"ॐ शान्ति मंत्र का आध्यात्मिक महत्व"

मंत्र का महत्व: ॐ शान्ति मंत्र का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत उच्च है, क्योंकि यह ध्यान और मानवता के उन्नति के माध्यम से जुड़ा होता है। इस मंत्र का जाप करने से आत्मा के साथ संबंध स्थापित होता है और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करता है।

ॐ का महत्व: मंत्र का पहला भाग "ॐ" ब्रह्म, परमात्मा, या अद्वितीयता का प्रतीक है। यह आत्मा को सृष्टि के साथ जोड़ता है और एक अद्वितीय सत्य की प्रतिष्ठा करता है।

शान्ति का महत्व: "शान्ति" शब्द का अर्थ संतुलन, शांति, और समृद्धि है। इस मंत्र के माध्यम से मानव आत्मा को स्थिरता और शांति की दिशा में ले जा सकता है।

आत्मा के साथ संबंध: मंत्र का जाप करने से आत्मा के साथ संबंध स्थापित होता है, जिससे व्यक्ति अपने असली स्वरूप को समझता है और आत्मा के उच्चतम स्तर पर पहुँचता है।

आत्म-रूपी स्थिति: मंत्र का आध्यात्मिक महत्व यहाँ तक है कि इसका नियमित जाप करने से व्यक्ति अपने आत्म-रूपी स्थिति में पहुँचता है, जिससे उसका जीवन शांति, समृद्धि, और आत्म-जागरूकता से भरा होता है।

समाप्ति: ॐ शान्ति मंत्र का आध्यात्मिक महत्व इसे एक अद्वितीय साधना बनाता है जो व्यक्ति को आत्मा के साथ समर्थन में ले जाकर उच्चतम आध्यात्मिक स्थिति की प्राप्ति में सहायक होता है।


"ध्यान और आत्म-शांति का स्रोत: ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः"

ध्यान का महत्व: ध्यान मन, शरीर, और आत्मा को एकत्र करने का एक अद्वितीय साधना है। यह एक आंतरिक यात्रा है जो व्यक्ति को आत्म-जागरूकता, स्थिरता, और चित्तशुद्धि की दिशा में ले जाती है।

आत्म-शांति का स्रोत: ध्यान आत्मा के साथ संबंध स्थापित करने में सहायक है और इसे स्वयं में एक स्थिर और शांत स्थिति में ले जाता है। यह आत्म-परिचय और आत्म-समर्पण की भावना को बढ़ावा देता है।

ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः का महत्व: "ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः" मंत्र ध्यान के अद्वितीय स्रोत के रूप में कार्य करता है जो मन को शांति और चित्तस्थिति की अनुभूति कराता है। इसका जाप आत्म-शांति की प्राप्ति में सहायक होता है।

ध्यान और आत्म-समर्पण: ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपनी चिंताओं को छोड़कर एकाग्रता की स्थिति में पहुँचता है, जिससे आत्म-समर्पण और शांति की प्राप्ति होती है।

आत्म-रज़ाई: ध्यान का अभ्यास व्यक्ति को आत्म-रज़ाई और सुखमय जीवन की दिशा में मार्गदर्शन करता है, जो अन्तर्निहित शांति और संतुलन की अनुभूति करने में मदद करता है।

समाप्ति: ध्यान और "ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः" मंत्र का नियमित अभ्यास करके व्यक्ति आत्म-शांति का स्रोत प्राप्त करता है और जीवन को एक सकारात्मक दिशा में मोड़ सकता है।



सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });