bholenath bhajan lyrics

ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा (Omakaara omakaara bhole ka naam Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan - Bhaktilok

117 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा (Omakaara omakaara bhole ka naam Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan

भगवान शिव शंकर के चरणों में समर्पित यह पावन भजन "ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा (Omakaara omakaara bhole ka naam Lyrics in Hindi)" सनातन धर्म और शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय एवं मधुर संकीर्तन है। देवों के देव महादेव आत्मीय भाव, सहजता और करुणा के प्रतीक हैं। इस भजन के माध्यम से भगवान शिव के अद्‍भुत स्वरूप, उनकी योगनिद्रा, उनके आभूषणों (जटा में गंगा, कानों में बिच्छू बाला, गले में सर्प माला) और उनके प्रिय वाद्य यंत्र डमरू का बेहद मनमोहक वर्णन किया गया है। जब कोई भक्त इस भजन का सच्चे हृदय से गान या श्रवण करता है, तो उसका मन संसार के भौतिक बंधनों से मुक्त होकर परम आध्यात्मिक आनंद और शिवमय ऊर्जा से भर जाता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत और रुद्राभिषेक के दौरान इस प्रकार के भजनों का गान करने से देवाधिदेव महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। भक्तलोक (Bhaktilok) के इस पावन अंक में हम आपके लिए इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ और इसकी आध्यात्मिक महिमा को विस्तार से लेकर आए हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ इस पावन भजन का स्मरण एवं गान करें:

ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा, ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा... भोले बड़े भोले है नैन नही खोले, जटा में उनकी गंगाधारा, भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा, ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा... भोले बड़े भोले है नैन नही खोले, कानो में उनकी बिच्छू बाला, भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा, ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा... भोले बड़े भोले है नैन नही खोले, गले में उनकी सर्प माला, भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा, ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा... भोले बड़े भोले है नैन नही खोले, भोला मेरा तो है डमरू वाला, भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा, ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा... भोले बड़े भोले है नैन नही खोले, रूप लगे उनका बड़ा निराला, भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा, ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान शिव की अलौकिक महिमा और उनके सौम्य तथा रोद्र दोनों रूपों के समन्वय को अत्यंत सरल और गेय शैली में प्रस्तुत करता है। आइए इसके विभिन्न अंतराओं के भावार्थ को समझें:

"ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा": इस मुखड़े में 'ओमकार' को शिव का मूल स्वरूप बताया गया है। भगवान शिव ही प्रणव (ॐ) के नाद और संपूर्ण ब्रह्मांड के आदि और अंत हैं। उनका यह नाम भक्तों के हृदय को अत्यंत प्रिय और शांति प्रदान करने वाला है।

"भोले बड़े भोले है नैन नही खोले, जटा में उनकी गंगाधारा": महादेव को 'भोलेनाथ' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के छोटे-छोटे भाव और समर्पण से अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। वे अक्सर योगनिद्रा में लीन रहते हैं, जिनके बंद नेत्रों में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है। उनकी जटाओं से मां गंगा का अवतरण इस बात का प्रतीक है कि वे पापों का नाश करने वाले और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।

"कानो में उनकी बिच्छू बाला, गले में उनकी सर्प माला": भगवान शिव की वेशभूषा सांसारिक समाज से सर्वथा भिन्न और अद्‍भुत है। वे विषैले सर्पों को गले में माला की भांति धारण करते हैं और कानों में बिच्छू के आकार के आभूषण पहनते हैं। यह इस बात का द्योतक है कि महादेव ने प्रकृति के हर जीव को अपनाया है और भय, विष तथा मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली है।

"भोला मेरा तो है डमरू वाला, रूप लगे उनका बड़ा निराला": शिवजी के हाथ में डमरू ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी लय (Rhythm) का प्रतीक है। उनका यह अलोकतांत्रिक और संन्यासी स्वरूप सभी को आकर्षित करता है, जो हमें यह सिखाता है कि वास्तविक सौंदर्य सादगी और त्याग में निहित है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शिवभक्ति का संवर्धन: यह भजन साधक के मन में भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम और श्रद्धा जगाता है।
  • सरल एवं कर्णप्रिय लय: इसकी शब्दावली इतनी सरल है कि बच्चे, बुजुर्ग और सभी आयु वर्ग के लोग इसे आसानी से गा सकते हैं।
  • शिव के स्वरूप का दर्शन: भजन के माध्यम से शिवजी की जटा, गंगा, सर्प माला और डमरू जैसे प्रतीकों का सुंदर दर्शन होता है।
  • सत्संग और जागरण की शान: शिवरात्रि, कांवड़ यात्रा और शिव सत्संग के दौरान इस भजन का गायन विशेष रूप से ऊर्जावान होता है।

समान रूप से आप हमारे अन्य लोकप्रिय पृष्ठों जैसे भगवान शिव के अन्य पावन भजन और शिव तांडव स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं, जो आपकी शिव साधना को और अधिक गहन बनाएंगे।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गान किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों और समय पर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्ममुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह उठकर स्नान के पश्चात शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करना मन को पूरे दिन ऊर्जावान रखता है।
  • प्रदोष काल एवं सोमवार: प्रदोष काल (संध्या के समय) और विशेषकर सावन मास के सोमवार को इस भजन का कीर्तन करने से मानसिक शांति और शिव कृपा की प्राप्ति होती है।
  • महाशिवरात्रि जागरण: रात्रि जागरण के दौरान जब भक्त शिवमय हो जाते हैं, तब इस प्रकार के भजनों से पूरा वातावरण पावन हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के प्रमुख आराध्य भगवान शिव (महादेव / भोलेनाथ) हैं, जिन्हें सनातन परंपरा में संहारकर्ता, योगीराज, आशुतोष और परम ब्रह्म के रूप में पूजा जाता है। शिवजी की आराधना से माता पार्वती, श्री गणेश और कार्तिकेय जी की कृपा भी स्वतः प्राप्त हो जाती है। इसके साथ ही, आप हमारी पार्वती स्तोत्र की पावन गाथा भी पढ़ सकते हैं जो शिव-शक्ति के संगम को दर्शाती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोकधुनों और संकीर्तन परंपरा पर आधारित है। लोक संतों और भक्तों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी शिव की महिमा को सरल पदों में पिरोया है ताकि आम जनमानस भगवान शिव की भक्ति में आसानी से सराबोर हो सके। ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी मंदिरों तक, यह भजन शिव भक्तों की जुबान पर हमेशा रहता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी और लोक-बोली (ब्रधी/खड़ी बोली मिश्रित) है। इसमें अनुप्रास और पुनरुक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे- 'ओमकारा ओमकारा', 'भोले बड़े भोले') जो इसके संगीत और लय को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। यह काव्य शैली सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • सादगी और संतोष: भगवान शिव का स्वरूप यह सिखाता है कि जीवन में दिखावे से अधिक आंतरिक सादगी और पवित्रता का महत्व है।
  • समर्पण और विश्वास: 'भोले' नाम यह याद दिलाता है कि ईश्वर के प्रति यदि आपका भाव सरल और सच्चा है, तो वे बिना किसी कठिन कर्मकांड के ही प्रसन्न हो जाते हैं।
  • समरसता: शिव के गले में सर्प और जटा में गंगा का वास यह संदेश देता है कि प्रकृति की विरोधी शक्तियों में भी सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
ओमकारा ॐ के रूप वाले / प्रणव स्वरूप भगवान शिव का आदिनाथ स्वरूप
भोले सरल हृदय वाले, आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले महादेव
गंगाधारा गंगा को धारण करने वाले शिवजी की जटाओं से बहने वाली मां गंगा
बिच्छू बाला बिच्छू के आकार का आभूषण शिवजी के कानों का विचित्र शृंगार
डमरू वाला डमरू धारण करने वाले ब्रह्मांडीय नाद के प्रणेता

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा: हे भोलेनाथ, आपका ओमकार रूपी नाम हमारे मन को सबसे अधिक प्रिय है।

2. जटा में उनकी गंगाधारा: जिनकी अलौकिक जटाओं में मोक्षदायिनी गंगा की धारा निरंतर बहती है।

3. कानो में उनकी बिच्छू बाला: जिनके कानों में अनोखे आभूषण के रूप में बिच्छू सुशोभित है।

4. गले में उनकी सर्प माला: जो अपने गले में भयंकर विषैले सर्पों की माला धारण करते हैं, फिर भी शांत रहते हैं।

5. भोला मेरा तो है डमरू वाला: हमारे प्रिय भोलेनाथ अपने हाथ में डमरू लिए हुए संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित महामृत्युंजय मंत्र या शिव पंचाक्षर मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

तथा:

ॐ नमः शिवाय॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ओमकारा ओमकारा भोले का नाम लगे बड़ा प्यारा
आराध्य देव भगवान शिव (भोलेनाथ / महादेव)
विधा भक्ति भजन / संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव शिवभक्ति, समर्पण और प्रेम
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष व्रत, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "ओमकारा ओमकारा भोले का नाम" भजन के मुख्य आराध्य कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देवों के देव महादेव भगवान शिव (भोलेनाथ) हैं।

Q2: इस भजन को कब गाना सबसे उत्तम माना जाता है?

यह भजन सावन मास के सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और दैनिक सुबह की पूजा के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q3: भगवान शिव को 'भोलेनाथ' क्यों कहा जाता है?

भगवान शिव अपने भक्तों की सरल पूजा और सच्चे भाव से अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है।

Q4: भजन में शिवजी के किन आभूषणों का वर्णन है?

भजन में उनकी जटा में गंगा, कानों में बिच्छू बाला और गले में सर्प माला का सुंदर वर्णन किया गया है।

Q5: क्या इस भजन को बच्चे भी आसानी से याद कर सकते हैं?

हाँ, इसकी लय और पंक्तियाँ बेहद सरल होने के कारण इसे बच्चे और वृद्ध सभी आसानी से गा सकते हैं।

Q6: शिव साधना से जीवन में क्या लाभ मिलता है?

शिव साधना से मानसिक शांति, भय से मुक्ति और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

Q7: क्या इस भजन का पाठ ऑनलाइन पढ़ा जा सकता है?

जी हाँ, आप भक्तलोक (Bhaktilok) पर इसके संपूर्ण लिरिक्स और अर्थ कभी भी पढ़ सकते हैं।

Q8: शिवरात्रि पर किस प्रकार के भजन गाने चाहिए?

शिवरात्रि पर शिव महिमा, डमरू वाले और ओमकार से जुड़े भजन गाना सबसे उत्तम माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ धार्मिक ग्रंथों, पारंपरिक लोक संगीत और शिव भक्ति की परंपराओं पर आधारित है। इसे पाठकों की सुविधा और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हमारा उद्देश्य सनातन संस्कृति के सुंदर भजनों को जन-जन तक पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण एवं पौराणिक लोक कथाएं
  • पारंपरिक भारतीय संकीर्तन एवं भजन संग्रह
  • वैदिक सनातन धर्म ग्रंथ एवं शिव स्तुति परंपरा

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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