श्री मारुती स्तोत्र (Shree Maruti Stotra in Hindi) -
॥ श्रीगणेशाय नम: ॥
ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते
प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय
प्रतापवज्रदेहाय अंजनीगर्भसंभूताय ।।
प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षर
क्षोगणग्रहबंधनाय भूतग्रहबंधनाय ।।
प्रेतग्रहबंधनाय पिशाचग्रहबंधनाय ।।
शाकिनीडाकिनीग्रहबंधनाय ।।
काकिनीकामिनीग्रहबंधनाय ब्रह्मग्रहबंधनाय ।।
ब्रह्मराक्षसग्रहबंधनाय चोरग्रहबंधनाय ।।
मारीग्रहबंधनाय एहि एहि
आगच्छ आगच्छ आवेशय आवेशय
मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय
स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय ।।
व्याघ्रमुखबंधन सर्पमुखबंधन
राजमुखबंधन नारीमुखबंधन सभामुखबंधन
शत्रुमुखबंधन सर्वमुखबंधन
लंकाप्रासादभंजन अमुकं मे वशमानय ।।
क्लीं क्लीं क्लीं ह्रुीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय ।।
श्रीं हृीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय
आकर्षय शत्रुन्मर्दय मर्दय मारय मारय
चूर्णय चूर्णय खे खे श्रीरामचंद्राज्ञया
मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु ॐ हृां हृीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः
फट् स्वाहा विचित्रवीर हनुमत्म
म सर्वशत्रून् भस्मीकुरु कुरु ।।
हन हन हुं फट् स्वाहा ॥
एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून्
वशमानयति नान्यथा इति ॥
॥ इति श्रीमारुतिस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री मारुती स्तोत्र (Shree Maruti Stotra in Hindi) - Hanuman Stotra - Bhaktilok " बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

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