अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे लिरिक्स || Aradaas som som de bhare bhandaare tere lyrics in hindi ||
सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे,
मंगल मेहर दा बक्षो दान माता
बुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे,
वीर वीरता दा बक्षो दान माता
शक्र शुकर कराँ तेरा हर वेले,
शनि शांति दे हों सामान माता
एतवार विश्वास यकीन होवे,
पूरण कर दो सारे काज माता
हे माता मातेश्वरी सर्व सुखों की खान,
माँ देवन वाली एक है मांगत कुल जहान
अज्ज वी तेरा आसरा कल वी तेरी आस,
घड़ी घड़ी माँ आसरा ज्येष्ठ बारह मास
मेरी दाती के दरबार में सभी खड़े हत्थ जोड़,
माँ देवन वाली एक है मांगत लाख करोड़
ऐ सच्चियाँ जोतां वाली माता तुहाडी सदा ही जय
एत अम्बिका जी हिंगलाज, ज्वाला माँ,
तेरा पर्वतां दे विच दरबार माता
सोम सरस्वती, कालका, भद्रकाली,
तैनू सिमरदा ए कुल संसार माता
मगल मनसा देवी तू है पिंडरानी,
समय समय ते लवें अवतार माता
बुध वीरता दी वरी महान शक्ति,
बग्घे शेर ते होवे सवार माता
वीर वैष्णो देवी नैना देवी,
लक्खां भक्त दित्ते ने तार माता
शुक्र शक्ति भवानी कृपालु है तू,
कई जालिमां नूँ दित्ता है मार माता
शनि शांति रूप महान दुर्गे,
तैनू भक्त सिमरन सत्ते वार माता
रूप एक ते नाम अनेक तेरे,
तेरे चरणां तो जावाँ बलिहार माता
मेहर करो मातेश्वरी, आये तेरे द्वार,
रक्ख लाज दाती आनके तुझे करते हैं
नमस्कार नमस्कार नमस्कार
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे लिरिक्स || Aradaas som som de bhare bhandaare tere lyrics in hindi || Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें