प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
ईश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है लिरिक्स
ईश्वर सत्य है
सत्य ही शिव है
शिव ही सुन्दर है
ओ.......ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
दोनों हाथ उठाकर के
सत्यम शिवम् सुन्दरम
एक हाथ से बाजे डमरू
एक में त्रिशूल हो
खुले तीसरी आँख तो
ये दुनिया सारी धुल हो
चाँद बैठा हो माथे पे
जटाओ में गंगा धारा हो
ये दुनिया हो सहारे जिसके
उस दुनिया का सहारा हो
मेरे महादेव मेरे साथ हो
एक तुम ही मेरी आशा हो
डूबी मेरी नैया का
एक तुम ही तो किनारा हो
हो आदि भी तुम अंत भी
तुम जीत भी तुम हार भी
कोई बोले तुमको संहारक
तुम ही हो पालनहार भी
भोले हो तुम भंडारी
तुम्ही हो निराकार भी
संसारी इस दुनिया का तुम
करते हो कल्याण भी
शमशान की हो राख भी
हर प्राणी के हो प्राण भी
कृष्णा का सुदर्शन भी
तुम राम के बाण भी
दमट दमट डमरू की ध्वनि
मुरली की हो तान भी
महाकाल प्रचंड हो तुम
भोले से हो शांत भी
प्रलय का हो कारण भी
तुमसे ही हो विश्राम भी
त्रिनेत्र धारी भोले से
तुम सर्व शक्तिमान भी
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
दोनों हाथ उठाकर के
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
काशी में हे महादेव
महादेवी के स्वरूप हो
तुम आदियोगी शंकर हो
भक्तो के विश्वरूप हो
तुम सत्य भी अनंत हो
अनादी तुम भगवंत हो
कैलाश के निवासी तुम तो
देवों में बलवंत हो
सत्य भी तुम सुन्दर भी तुम
बाहर भी तुम भीतर भी तुम
पानी की हो बूँद भी हो
गहरा सा समन्दर भी
तुम ही सर्वव्यापी हो
तुम भोले भी हो जाते हो
हां देवों के भी देव तभी
तो महादेव कहलाते हो
माँ काली के साथ तो तुम
महाकाल हो जाते हो
हलाहल लेके कंठ में
तुम नीलकंठ बन जाते हो
मैं भक्त हूँ महाकाल का
जो काल को भी थामे है
अमृत जैसी गंग धारा तो
भोले की जटाओ में है
शमशान की उस राख में
भोले के ही तो अंश है
शुरुआत भी तुमसे ही भोले
तुमसे ही विध्वंश है
काल हरो मेरे महादेव
कष्ट हरो हे महादेव
दुःख हरो हे महादेव
मेरे रोग हरो हे महादेव
हर हर महादेव
हर हर महादेव
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
दोनों हाथ उठाकर के
सत्यम शिवम् सुन्दरम
सुन्दर हो सुन्दर हो सुन्दर हो
ओ......ओ......
सत्यम शिवम् सुन्दरम
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "ईश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है लिरिक्स (ishwar Saty Hai Saty Hi Shiv Hai Shiv Hi Sundar Hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

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