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समर चली महाकाली माता भजन लिरिक्स ( Samar Chali Mahakali Mata Bhajan Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

141 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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समर चली महाकाली माता भजन लिरिक्स (Samar Chali Mahakali Mata Bhajan Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

आदिशक्ति माँ दुर्गा की रौद्र, परम वेगवती एवं दुष्ट संहारक स्वरूप महाकाली को समर्पित यह परम पावन भजन "समर चली महाकाली माता भजन लिरिक्स (Samar Chali Mahakali Mata Bhajan Lyrics in Hindi)" माँ कालिका की असीम ऊर्जा, रणक्षेत्र में उनके अद्भुत पराक्रम और उनके भक्तों के प्रति वात्सल्य भाव का अत्यंत सजीव चित्रण करता है। सनातन संस्कृति में महाकाली को समय, चेतना और ब्रह्मांड की समस्त नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली आद्या शक्ति के रूप में पूजा जाता है। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, असुरता और अहंकार की अति होती है, तब-तब जगत जननी जगदंबा महाकाली का यह प्रचंड रूप दुष्टों के संहार और साधकों की रक्षा के लिए प्रकट होता है। यह भजन साधक के मन में अदम्य साहस, निर्भीकता और भक्ति का संचार करता है। इस लेख में हम इस अद्भुत भजन के संपूर्ण लिरिक्स, पद-दर-पद भावार्थ, माँ काली की उपासना का महत्व, साधना विधि और आध्यात्मिक रहस्यों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपके आध्यात्मिक मार्ग को और अधिक प्रशस्त करेगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

समर चली महाकाली, समर चलीं महाकाली,
काला खप्पर हाथ धरे माँ, मुंडन माला डाली,
समर चलीं महाकाली, समर चलीं महाकाली।।

एक हाथ में खडग धरे माँ, दूजे त्रिशूल है धारी,
तीजे में है चक्र सुदर्शन, चौथे कटार संभाली,
समर चलीं महाकाली, समर चलीं महाकाली।।

आँखों से चिंगारी छोड़े, मुंह से निकले ज्वाला,
थर थर कांपे देखो असुरदल, ऐसी ले किलकारी,
समर चलीं महाकाली, समर चलीं महाकाली।।

पल में कई दानव संहारे, पल में चट कर डाली,
पल में कई को राख बनाई, ऐसी ले हुंकारी,
समर चलीं महाकाली, समर चलीं महाकाली।।

कालो की माँ काल बनी रे, रणचंडी माँ ज्वाला,
दे मुझे आँचल की छैया, मैया मेहरवाली,
समर चलीं महाकाली, समर चलीं महाकाली।।

समर चली महाकाली, समर चलीं महाकाली,
काला खप्पर हाथ धरे माँ, मुंडन माला डाली,
समर चलीं महाकाली, समर चलीं महाकाली।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन महाकाली के युद्ध कौशल और उनके महाभयानक रूप का अत्यंत काव्यात्मक वर्णन प्रस्तुत करता है। जब मैया 'समर' यानी रणभूमि की ओर प्रस्थान करती हैं, तो संपूर्ण ब्रह्मांड में उनकी शक्ति का कंपन महसूस होता है। उनके एक हाथ में काला खप्पर और गले में मुंडन माला इस बात का प्रतीक है कि वे समय (काल) और मृत्यु पर पूर्ण नियंत्रण रखती हैं। उनके चारों हाथों में क्रमशः खडग (तलवार), त्रिशूल, चक्र सुदर्शन और कटार सुशोभित हैं, जो यह दर्शाते हैं कि जगत जननी के पास समस्त ब्रह्मांडीय अस्त्र-शस्त्रों की शक्ति है।

भजन के अगले चरण में उनके नेत्रों से छूटती चिंगारियों और मुख से निकलती प्रलयकारी ज्वाला का वर्णन है, जिसे देखकर असुरदल थर-थर कांपने लगता है। मैया की एक हुंकार और किलकारी मात्र से बड़े-बड़े महाबली दानव क्षणभर में भस्म हो जाते हैं। अंत में, भक्त अत्यंत भावुक होकर माँ से प्रार्थना करता है कि हे कालों की काल महाकाली! आप मुझे अपने ममतामयी आँचल की छाया प्रदान करें, क्योंकि आप ही सबकी रक्षक और मेहरवाली मैया हैं। यह भजन साधक को भयमुक्त करने वाला और उसकी आंतरिक शक्तियों को जागृत करने वाला माना जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह शाश्वत शक्ति के प्रति समर्पण का जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • रौद्र और वात्सल्य का संगम: यह भजन जहाँ एक ओर माँ के प्रलयकारी रणचंडी स्वरूप का वर्णन करता है, वहीं अंत में उनके परम वात्सल्यमयी आँचल की शरण मांगता है।
  • वीर रस प्रधान रचना: इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'खडग', 'त्रिशूल', 'चिंगारी' और 'हुंकारी' साधक के भीतर उत्साह और वीरता का संचार करते हैं।
  • भय निवारक: इस भजन का स्मरण करने से मानसिक भय, अज्ञात चिंताएं और नकारात्मक ऊर्जाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

महाकाली के इस भजन को विशेष अवसरों पर पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ गाया व सुना जाना चाहिए:

  • उचित समय: ब्रह्ममुहूर्त, संध्या बेला (प्रदोष काल) या विशेष रात्रि जागरण (विशेषकर नवरात्रि की अष्टमी व चतुर्दशी तिथि) के समय।
  • स्थान: घर के पूजा गृह में दीप प्रज्वलित करके अथवा माँ काली के किसी पावन मंदिर में।
  • विधान: सामने शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें, लाल पुष्प अर्पित करें और धूप दिखाकर इस भजन का सस्वर संकीर्तन करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु माँ महाकाली हैं, जो आदि शक्ति महाशक्ति का ही एक साक्षात रूप हैं। सनातन परंपरा में कालिका को प्रकृति का संघारक और मोक्ष दायिनी माना गया है। तांत्रिक और शाक्त परंपरा में महाकाली की उपासना शीघ्र फलदायी और साधक को सभी बंधनों से मुक्त करने वाली मानी जाती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पारंपरिक लोक भजनों की श्रेणी में आने वाला यह गीत पीढ़ियों से माँ काली के भक्तों, अखाड़ों, साधकों और जागरण करने वाले गायकों द्वारा गाया जाता रहा है। इसकी रचना इस प्रकार की गई है कि इसे ढोल, मंजीरा और डमरु की थाप पर आसानी से गाया जा सके, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल खड़ी बोली और अवधी-ब्रज मिश्रित लोक भाषा में रचित है, जिसे सामान्य जनमानस आसानी से समझ सकता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे "समर चलीं महाकाली" की आवृत्ति से एक विशेष लय और नाद ब्रह्म का सृजन होता है जो मन को एकाग्र कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह गहरा आध्यात्मिक संदेश मिलता है कि जीवन में जब भी अधर्म, अहंकार और नकारात्मकता रूपी 'असुर' प्रबल होने लगें, तब मनुष्य को अपनी भीतर की 'महाकाली' यानी आत्म-शक्ति और संकल्प को जागृत करना चाहिए। माता का रणचंडी रूप यह सिखाता है कि बुराई का विनाश करने के लिए कभी-कभी कठोर होना भी आवश्यक होता है, परंतु अंततः शरणागत के लिए उनका हृदय अत्यंत कोमल और करुणामयी रहता है। अधिक जानकारी के लिए आप Bhaktilok के अन्य पावन अनुष्ठान लेख पढ़ सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
समर युद्ध भूमि / रणक्षेत्र सत्य और असत्य के बीच चलने वाला निरंतर संघर्ष
खप्पर खोपड़ी या पात्र अहंकार और संचित कर्मों का विनाश करने का पात्र
मुंडन माला कटी हुई खोपड़ियों की माला मृत्यु और काल पर महाकाली का आधिपत्य
रणचंडी युद्ध के समय रौद्र रूप धारण करने वाली देवी शक्ति का प्रचंड और न्यायप्रिय स्वरूप

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"समर चली महाकाली, समर चलीं महाकाली..." - जगत जननी जब अधर्म का नाश करने के लिए रणभूमि में उतरती हैं, तो उनका वह गमन प्रलय के समान होता है।

"काला खप्पर हाथ धरे माँ, मुंडन माला डाली..." - उनके हाथों में काल का प्रतीक खप्पर और गले में मुंडन माला इस बात का प्रमाण है कि वे संसार के संहार और पुनर्रचना की स्वामिनी हैं।

"एक हाथ में खडग धरे माँ..." - उनके चारों हाथों में शस्त्र इस बात का प्रतीक हैं कि भक्त की रक्षा के लिए वे चारों दिशाओं से हर प्रकार के संकट को दूर करने में समर्थ हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माँ महाकाली के स्मरण के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

यह नवार्ण मंत्र माँ काली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों शक्तियों की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक है। इसके साथ ही आप माता काली की आरती का नियमित पाठ भी कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

बिंदु विवरण
भजन का नाम समर चली महाकाली माता भजन लिरिक्स
आराध्य देवी माँ महाकाली (आदिशक्ति)
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव वीर रस, भक्ति, समर्पण और सुरक्षा
गाने का अवसर नवरात्रि, जागरण, मंगलवार/शनिवार पूजा
श्रेणी Kali Mata Bhajan

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन भजन जगत जननी माँ आदिशक्ति के रौद्र और दुष्ट संहारक स्वरूप 'महाकाली' (रणचंडी) को समर्पित है।

इस भजन को नवरात्रि के दिनों में, संध्या काल में या माँ काली के जागरण और चौकी के अवसर पर पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

हाँ, माँ काली साहस और निर्भयता की प्रतीक हैं। इस भजन के नियमित स्मरण से मानसिक भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन परंपरा, शाक्त ग्रंथों और लोक संस्कृति में प्रचलित भजनों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स और उसकी आध्यात्मिक गहराई से परिचित कराना है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत पूरी तरह प्रामाणिक और व्यवस्थित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन शाक्त परंपरा और दुर्गा सप्तशती के विभिन्न चरित्र प्रसंग।
  • पारंपरिक लोक गाथाएं एवं माता काली के संकीर्तन ग्रंथ।
  • विशेषज्ञ पुरोहितों एवं संतों के सत्संग से प्राप्त निर्देश।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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