कन्हैया तेरी याद में रोई रे
कन्हैया तेरी याद में रोई रे
कन्हईया तेरी याद में रोईैं
धुन- कन्हईया ले चल पारली पार
कन्हैया तेरी, याद में, रोई रे ॥
तुम तो, बस गए, मथुरा नगरिया ॥
पागल, हो गई रे...
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...
तुम, तो कान्हा, बड़े हो छलिया ।
छल के, गए तुम, मथुरा नगरिया ॥
बरसाने की, राधा प्यारी ॥
जोगन, हो गई रे,
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...
ओ, कान्हा मुझे, भूल न जाना ।
वादा, पूरा, करके दिखाना ॥
तुम, बिन मेरी, ओ साँवरिया ॥
दिल की, धड़कन, रुक गई रे,
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...
आ के, देख, मेरे मन मोहन ।
सूना, है, सारा यह उपवन ॥
गईंयाँ, तेरी, याद में, रह कर ॥
भूखी, मर गई रे,
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह निर्गुण भजन भगवान कृष्ण की याद में राधा की विरह वेदना को व्यक्त करता है। राधा कृष्ण से मिलने की इच्छा रखती हैं और उनकी अनुपस्थिति में अपने आप को व्याकुल महसूस कर रही हैं। भजन में कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम की अभिव्यक्ति है। राधा कृष्ण को याद करती हुई उनकी प्रतीक्षा कर रही हैं और उनके वादों को याद दिला रही हैं।
यह भजन भक्ति और प्रेम के रस से परिपूर्ण है और श्री कृष्ण की लीला का स्मरण कराता है। यह भजन श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति समर्पण और प्रेम की सीख देता है।
🎵 गायक: अनिल रामूर्ति भोपाल
अनिल रामूर्ति भोपाल एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं जिन्होंने कई भजनों और कीर्तनों को अपनी मधुर आवाज से सजाया है। उनके गायन में भक्ति और भावना की गहराई है जो श्रोताओं के दिलों को छू लेती है।
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