राधे बोलो तो सही
श्याम बोलो तो सही
बोलो फागुन में होली खेलोगे नहीं
बिंदिया बन जाऊँगा माथे पर लग जाऊँगा
बोलो तो सही राधे बोलो तो सही
होली नहीं खेलोगे तो गुलाल बन जाऊँगा
गुलाल बन जाऊँगा गालों में लग जाऊँगा
होली नहीं खेलेगी तो चुनरी बन जाऊँगा
चुनरी बन जाऊँगा अंगों से लिपट जाऊँगा
बोलो और फागुन में होली खेलोगे नहीं
होली नहीं खेलोगे तो पायल बन जाऊँगा
पायल बन जाऊँगा पैरों में लग जाऊँगा
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह निर्गुण भजन राधा और श्याम (कृष्ण) के प्रेम और होली के पावन पर्व की खुशियों को व्यक्त करता है। भजन में होली के रंगों और उल्लास का वर्णन है और राधा और कृष्ण के प्रेम की गहराई को दर्शाया गया है।
भजन में होली के पर्व की धूमधाम और उमंग का वर्णन है और राधा और कृष्ण के प्रेम की अभिव्यक्ति है। भजन में होली के पर्व की खुशियाँ और उमंग का वर्णन है और राधा और कृष्ण के प्रेम की अभिव्यक्ति है।
🎵 गायक: Unknown
यह भजन परंपरा से चला आ रहा है और इसका गायक अज्ञात है। इस भजन को भजंगंगा द्वारा प्रकाशित किया गया है।
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