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Holi Bhajan

आज बिरज में होरी रे रसिया: होली भजन (Aaj Biraj Mein Hori Re Rasiya) | Radha Krishna Holi

330 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 आज बिरज में होरी रे रसिया – होली भजन

(Aaj Biraj Mein Hori Re Rasiya) – Radha Krishna Holi Bhajan 2026

होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, राधा-कृष्ण भजन
📍 स्थान: ब्रज, वृन्दावन, बरसाना

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

आज बिरज में होरी रे रसिया
आज बिरज में होरी रे रसिया ।
होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया ॥

अपने अपने घर से निकसी,
कोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया ।

॥ प्रश्न-उत्तर ॥

कौन गावं के कुंवर कन्हिया,
कौन गावं राधा गोरी रे रसिया ।

नन्द गावं के कुंवर कन्हिया,
बरसाने की राधा गोरी रे रसिया ।

कौन वरण के कुंवर कन्हिया,
कौन वरण राधा गोरी रे रसिया ।

श्याम वरण के कुंवर कन्हिया प्यारे,
गौर वरण राधा गोरी रे रसिया ।

इत ते आए कुंवर कन्हिया,
उत ते राधा गोरी रे रसिया ।

कौन के हाथ कनक पिचकारी,
कौन के हाथ कमोरी रे रसिया ।

कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी,
राधा के हाथ कमोरी रे रसिया ।

उडत गुलाल लाल भए बादल,
मारत भर भर झोरी रे रसिया ।

अबीर गुलाल के बादल छाए,
धूम मचाई रे सब मिल सखिया ।

चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छवि,
चिर जीवो यह जोड़ी रे रसिया ।

आज बिरज में होरी रे रसिया ।
होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया ॥

🎵 पारम्परिक ब्रज होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध होली भजन ब्रज में खेली जा रही होली के अवसर पर राधा और कृष्ण के मिलन और प्रेम का वर्णन करता है। "आज बिरज में होरी रे रसिया" – अर्थात आज ब्रज (बिरज) में होली खेली जा रही है, हे रसिया (रसिक जन)!

इस भजन की विशेषता इसकी प्रश्नोत्तरी शैली है। गोपियाँ और सखियाँ प्रश्न करती हैं कि कन्हिया किस गाँव के हैं और राधा किस गाँव की हैं? उत्तर मिलता है – "नन्द गावं के कुंवर कन्हिया, बरसाने की राधा गोरी"। इसी प्रकार वर्ण (रंग) के बारे में पूछा जाता है और उत्तर मिलता है – कन्हिया श्याम वर्ण के हैं और राधा गौर वर्ण की।

फिर प्रश्न होता है कि किसके हाथ में सोने की पिचकारी है और किसके हाथ में कमोरी (रंग की डोल)? उत्तर है – कृष्ण के हाथ में कनक पिचकारी और राधा के हाथ में कमोरी। गुलाल उड़ रहा है, अबीर के बादल छाए हैं और सब मिलकर धूम मचा रहे हैं।

अंत में कहा गया है – "चिर जीवो यह जोड़ी रे रसिया" – यह राधा-कृष्ण की जोड़ी चिरंजीवी रहे। यह भजन राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और होली के उल्लास का अद्भुत संगम है।

📍 ब्रज की होली – प्रश्नोत्तरी परंपरा

ब्रज की होली में प्रश्नोत्तरी शैली के भजनों की विशेष परंपरा है। इन भजनों में गोपियाँ और सखियाँ प्रश्न पूछती हैं और उनके उत्तर दिए जाते हैं। यह संवाद शैली होली के उल्लास को और भी रोचक बना देती है।

नंदगाँव कृष्ण का गाँव है और बरसाना राधा का। ये दोनों स्थान ब्रज में स्थित हैं और यहाँ की होली (लठमार होली) विश्वविख्यात है। इस भजन में इन्हीं गाँवों का उल्लेख है।

कनक पिचकारी – सोने की पिचकारी, और कमोरी – रंग रखने का छोटा बर्तन। ये दोनों होली के प्रतीक हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

💞 राधा-कृष्ण का मिलन

यह भजन राधा और कृष्ण के मिलन का प्रतीक है। इत-उत से आना, एक दूसरे पर रंग डालना, सब मिलकर धूम मचाना – यह सब उस दिव्य प्रेम का उत्सव है जो राधा-कृष्ण का प्रतीक है।

🎨 श्याम-गौर का मिलन

श्याम वर्ण के कृष्ण और गौर वर्ण की राधा का मिलन यह दर्शाता है कि भक्ति में कोई भेदभाव नहीं है। रंगों का यह मिलन ही होली है।

🎯 संदेश : जैसे राधा-कृष्ण की जोड़ी चिरंजीवी है, वैसे ही भक्त के हृदय में उनका प्रेम सदा जीवित रहना चाहिए। होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि प्रभु-प्रेम में रंग जाने का पर्व है।

॥ आज बिरज में होरी रे रसिया ॥
॥ चिर जीवो यह जोड़ी रे रसिया ॥
श्रेणियां: Holi Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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