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Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि 2026 कब शुरू हो रही है? तिथि, मुहूर्त और घटस्थापना का समय

419 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🌸 चैत्र नवरात्रि 2026

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

प्रारंभ तिथि, मुहूर्त और घटस्थापना का संपूर्ण मार्गदर्शन

नौ देवियों की उपासना का पावन पर्व

🌟 चैत्र नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक मनाया जाता है। यह नौ दिन देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का समय होता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व गुरुवार, 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होगा और शनिवार, 28 मार्च 2026 (राम नवमी) को समाप्त होगा।

चैत्र नवरात्रि को वासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता है। यह प्रकृति के पुनर्जागरण और आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार का समय है। इस अवधि में किए गए व्रत, पूजा और ध्यान से साधक की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा आध्यात्मिक उन्नति होती है।

📅 चैत्र नवरात्रि 2026 तिथियाँ एवं घटस्थापना मुहूर्त

प्रमुख तिथियाँ

दिनतिथिदेवी स्वरूप
गुरुवार, 19 मार्चप्रतिपदाशैलपुत्री
शुक्रवार, 20 मार्चद्वितीयाब्रह्मचारिणी
शनिवार, 21 मार्चतृतीयाचंद्रघंटा
रविवार, 22 मार्चचतुर्थीकूष्मांडा
सोमवार, 23 मार्चपंचमीस्कंदमाता
मंगलवार, 24 मार्चषष्ठीकात्यायनी
बुधवार, 25 मार्चसप्तमीकालरात्रि
गुरुवार, 26 मार्चअष्टमीमहागौरी
शुक्रवार, 27 मार्चनवमी (राम नवमी)सिद्धिदात्री

🪔 घटस्थापना मुहूर्त (19 मार्च 2026)

  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च, सुबह 06:23 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च, सुबह 08:29 बजे
  • घटस्थापना का शुभ समय: 19 मार्च, प्रातः 06:23 से 10:30 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 19 मार्च, दोपहर 12:01 से 12:49 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: अपराह्न 02:27 से 03:15 बजे तक

नोट: घटस्थापना हमेशा प्रतिपदा तिथि के सूर्योदय काल में करना श्रेष्ठ होता है। यदि यह संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकते हैं।

🏺 घटस्थापना विधि (विस्तृत)

1

तैयारी

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।

2

संकल्प

हाथ में जल, फूल, अक्षत लेकर संकल्प करें: 'मैं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर नौ दिनों तक विधिपूर्वक दुर्गा पूजन करूँगा/करूँगी।'

3

कलश स्थापना

चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ। उस पर मिट्टी या तांबे का कलश रखें, जिसमें जल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा, अक्षत, पंचपल्लव रखें। कलश पर नारियल (मौली लपेटकर) रखें।

4

देवी प्रतिमा स्थापना

देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। ध्यान करें और देवी का आवाहन करें: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ दुर्गायै नमः'।

5

षोडशोपचार पूजन

देवी को 16 उपचार अर्पित करें: आसन, स्वागत, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, आरती।

⚠️ विशेष सावधानी: घटस्थापना के समय मंत्रोच्चारण में रुकावट न हो। पूरे नौ दिन नियमित रूप से दीपक जलाएँ और देवी की आरती करें।

🌸 नवरात्रि के नौ दिन : देवी स्वरूप और महत्व

प्रथम दिवस - शैलपुत्री : पर्वतराज हिमालय की पुत्री, मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री।
द्वितीया - ब्रह्मचारिणी : तपस्या की देवी, स्वाधिष्ठान चक्र की स्वामिनी।
तृतीया - चंद्रघंटा : शत्रु संहारक, मणिपूर चक्र की अधिष्ठात्री।
चतुर्थी - कूष्मांडा : ब्रह्मांड की रचयिता, अनाहत चक्र की देवी।
पंचमी - स्कंदमाता : कार्तिकेय की माता, विशुद्धि चक्र की अधिष्ठात्री।
षष्ठी - कात्यायनी : ऋषि कात्यायन की पुत्री, आज्ञा चक्र की स्वामिनी।
सप्तमी - कालरात्रि : अंधकार और भय का नाश करने वाली, सहस्रार चक्र की अधिष्ठात्री।
अष्टमी - महागौरी : अत्यंत गौर वर्ण वाली, सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली।
नवमी - सिद्धिदात्री : सभी सिद्धियों की दात्री, मोक्ष प्रदान करने वाली।

🛒 नवरात्रि पूजा सामग्री (आवश्यक वस्तुएँ)

  • दुर्गा चालीसा, मंत्र पुस्तिका
  • चौकी, लाल वस्त्र
  • मिट्टी का कलश एवं जौ
  • नारियल (मौली सहित)
  • तांबे का लोटा, जल, दूध, दही, शहद
  • चंदन, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम
  • धूप, दीप, कपूर
  • फूल (गुड़हल, गेंदा, कनेर), माला
  • फल (केला, नारियल, आम), मिठाई
  • पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची
  • पूजा की थाली, घंटी, शंख
  • चुनरी, सोलह शृंगार सामग्री

📖 चैत्र नवरात्रि व्रत कथा (संक्षिप्त)

प्राचीन काल में एक राजा थे – दुर्जम। उनके राज्य में अकाल पड़ा। राजा ने देवी महात्म्य का पाठ करना शुरू किया। देवी प्रसन्न हुईं और राज्य में सुख-समृद्धि लौट आई। तभी से नवरात्रि में देवी महात्म्य (चंडी पाठ) का विधान है।

एक अन्य कथा अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध करने के लिए चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा की आराधना की और नवमी को विजय प्राप्त की। इसीलिए राम नवमी का पर्व मनाया जाता है।

❓ चैत्र नवरात्रि से जुड़े प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: क्या चैत्र नवरात्रि में व्रत रखना अनिवार्य है?

उत्तर: व्रत रखना अनिवार्य नहीं, पर अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धा अनुसार आप फलाहारी या सात्विक भोजन कर सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या घटस्थापना के बिना भी नवरात्रि मना सकते हैं?

उत्तर: हाँ, यदि घटस्थापना संभव न हो तो केवल देवी चित्र के सामने ध्यान, मंत्र जाप और आरती से भी पूजा फलदायी होती है।

प्रश्न 3: नवरात्रि में कौन-सा रंग किस दिन पहनना चाहिए?

उत्तर: परंपरा: दिन 1-लाल, 2-नीला, 3-पीला, 4-हरा, 5-भूरा, 6-नारंगी, 7-सफेद, 8-गुलाबी, 9-बैंगनी।

प्रश्न 4: राम नवमी 2026 कब है?

उत्तर: 28 मार्च 2026, शनिवार।

✨ नवरात्रि का सदुपयोग

चैत्र नवरात्रि 2026 हमें अपने अंतर्मन की शक्तियों को जाग्रत करने का अवसर देती है। नौ दिनों तक व्रत, पूजा, ध्यान और मंत्र जाप से साधक की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संवर्धन होता है। सही तिथि और मुहूर्त में की गई घटस्थापना से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

इस नवरात्रि का संकल्प लें – नियमित पूजा, दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली अपनाने का। माँ दुर्गा की कृपा से सभी मनोरथ सिद्ध हों।

🙏 ॐ देवी दुर्गायै नमः ।। सर्वे भवन्तु सुखिनः ।।

🌸 चैत्र नवरात्रि 2026
19 मार्च से 27 मार्च 2026 (राम नवमी 28 मार्च)
श्रेणियां: Chaitra Navratri

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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