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चैत्र नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का विधान, महत्व और लाभ (Akhand Jyoti Vidhi, Importance & Benefits During Chaitra Navratri)

223 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🪔 चैत्र नवरात्रि में अखंड ज्योति

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

विधान, महत्व और लाभ (Akhand Jyoti Vidhi, Importance & Benefits)

नौ दिनों तक जलने वाली दिव्य आराधना

🌟 अखंड ज्योति: नवरात्रि की आध्यात्मिक धुरी

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो वसंत ऋतु के आगमन और नवीन ऊर्जा का प्रतीक है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) इन नौ दिनों की साधना का केंद्रबिंदु होती है – यह दीपक नौ दिनों तक निरंतर जलता रहता है और माता रानी की उपस्थिति, शक्ति और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

अखंड ज्योति केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक साधना है। यह हमारे भीतर की अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है और ज्ञान, समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखती है। इस लेख में हम अखंड ज्योति जलाने का विधान, उसका महत्व, वैज्ञानिक आधार, लाभ और प्रचलित मान्यताओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

🔆 अखंड ज्योति का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

अखंड ज्योति का अर्थ है “बिना रुके जलने वाला प्रकाश”। यह निम्नलिखित कारणों से अत्यधिक महत्वपूर्ण है:

  • देवी शक्ति का आह्वान: अखंड ज्योति मां दुर्गा की अविनाशी शक्ति का प्रतीक है। इसके माध्यम से हम नौ दिनों तक निरंतर उनकी उपस्थिति को अपने घर आमंत्रित करते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: दीपक की लौ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और वातावरण को शुद्ध करती है।
  • एकाग्रता और साधना: यह ज्योति साधक को निरंतरता और अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। नौ दिनों तक इसकी रक्षा करना मन को एकाग्र करता है।
  • परंपरा और एकता: परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस ज्योति की देखभाल करते हैं, जिससे पारिवारिक एकता मजबूत होती है।
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अखंड ज्योति
अविनाशी प्रकाश का प्रतीक

📜 पौराणिक मान्यता: मान्यता है कि जिस घर में नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति जलती है, वहां मां दुर्गा स्वयं वास करती हैं और घर के सभी सदस्यों पर कृपा बरसाती हैं।

🪔 अखंड ज्योति जलाने की संपूर्ण विधि (Step-by-Step Vidhi)

अखंड ज्योति स्थापित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

1

तिथि और समय

नवरात्रि के प्रथम दिन (घटस्थापना) पर शुभ मुहूर्त में अखंड ज्योति स्थापित करें। घटस्थापना प्रातःकाल या दोपहर में पूर्वाह्न मुहूर्त में करना श्रेष्ठ होता है।

2

स्थान चयन और सफाई

घर के स्वच्छ एवं पवित्र स्थान पर (पूजा घर या किसी निर्धारित स्थान पर) चौकी या वेदी बनाएं। गाय के गोबर या गेरू से लीपना शुभ माना जाता है। स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

3

कलश स्थापना

सबसे पहले कलश (घट) स्थापित करें। मिट्टी या तांबे के घट में जल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा, पांच पत्ते रखें। घट के मुंह पर नारियल रखकर लाल कलावा बांधें। घट पर स्वास्तिक बनाएं।

4

दीपक का चयन

अखंड ज्योति के लिए मिट्टी का दीपक सर्वोत्तम माना जाता है। आप चाहें तो कांच का अखंड दीपक भी रख सकते हैं। दीपक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

5

बत्ती और तेल/घी

सूती बत्ती का प्रयोग करें। घी का दीपक सात्विकता और समृद्धि का प्रतीक है, वहीं सरसों का तेल या तिल का तेल भी प्रयोग कर सकते हैं। कुछ लोग मिश्रित तेल का भी उपयोग करते हैं। बत्ती की संख्या आमतौर पर 1, 3, 5, 7 या 9 हो सकती है।

6

संकल्प और प्रज्वलन

जल, अक्षत, पुष्प, फल आदि से देवी का ध्यान करें और संकल्प लें कि “नवरात्रि के नौ दिनों तक यह अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित रखूंगा/रखूंगी”। फिर मंत्रों के साथ दीपक प्रज्वलित करें।

7

नियमित देखभाल

नौ दिनों तक दीपक को निरंतर जलते रखना होता है। समय-समय पर बत्ती, तेल/घी की मात्रा चेक करते रहें। यदि दीपक बुझ जाए तो दोबारा प्रज्वलित करें, लेकिन शास्त्रों के अनुसार बुझने पर पुनः प्रज्वलित करने में कोई निषेध नहीं है। प्रयास रखें कि बुझने न पाए।

8

समापन (दशमी के दिन)

नवमी या दशमी के दिन विधिवत पूजन के बाद अखंड ज्योति का विसर्जन करें। दीपक की ज्योति से किसी अन्य दीपक को प्रज्वलित कर घर में फैलाएं, या फिर विसर्जन के समय दीपक को बहते जल में प्रवाहित करें।

📌 सुझाव: यदि संभव न हो कि आप घी का दीपक 9 दिनों तक निरंतर जला सकें, तो आप कांच का अखंड दीपक (जिसमें बड़ी बत्ती और अधिक तेल भरा जा सकता है) का उपयोग कर सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, दिन में घी का और रात में तेल का दीपक भी जला सकते हैं।

🔬 अखंड ज्योति का वैज्ञानिक महत्व

अखंड ज्योति जलाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं:

  • वायु शुद्धि: दीपक की लौ से उत्पन्न गर्मी और धुआं (विशेषकर घी की लौ) वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करता है और हवा को शुद्ध करता है।
  • प्रकाश का प्रभाव: निरंतर जलती लौ एकाग्रता में सहायता करती है। यह मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करती है और ध्यान की गहराई को बढ़ाती है।
  • सकारात्मक आयन: दीपक जलाने से नकारात्मक आयनों का संतुलन बनता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
  • अनुशासन और नियमितता: नौ दिनों तक ज्योति की देखभाल करना हमें समयनिष्ठ और अनुशासित बनाता है।

✨ अखंड ज्योति जलाने के आध्यात्मिक एवं पारिवारिक लाभ

  • आध्यात्मिक उन्नति: नियमित दीपक देखभाल और पूजा से आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास होता है।
  • सुख-समृद्धि: मान्यता है कि अखंड ज्योति घर में सुख, शांति और धन-धान्य का वास कराती है।
  • मानसिक शांति: दीपक की लौ देखने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश: यह ज्योति घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है।
  • पारिवारिक एकता: सभी सदस्य मिलकर ज्योति की सेवा करते हैं, जिससे परिवार में प्रेम बढ़ता है।
  • कष्ट निवारण: नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कष्ट दूर होते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: सच्ची भक्ति और नियमितता से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: घी की लौ से उत्पन्न तत्व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं।

❓ अखंड ज्योति से जुड़ी प्रचलित मान्यताएँ और तथ्य

मान्यता/प्रश्न तथ्य/स्पष्टीकरण
क्या अखंड ज्योति केवल घी से ही जलानी चाहिए? घी सात्विक और श्रेष्ठ माना गया है, लेकिन यदि साधन न हो तो तेल (सरसों, तिल) का भी प्रयोग किया जा सकता है।
क्या गर्भवती महिला अखंड ज्योति जला सकती है? हाँ, गर्भवती महिलाएँ भी अखंड ज्योति जला सकती हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जो गर्भस्थ शिशु के लिए भी लाभदायक होती है।
यदि दीपक बुझ जाए तो क्या करें? बुझने पर घबराएं नहीं। उसे पुनः प्रज्वलित करें और क्षमा प्रार्थना करें। कोई निषेध नहीं है।
क्या रात में दीपक को ढक देना चाहिए? अखंड ज्योति को खुला ही रखना चाहिए। हवा से बचाने के लिए कांच का दीपक या शीशे का आवरण लगा सकते हैं, लेकिन ढकना उचित नहीं।
क्या अखंड ज्योति के स्थान पर इलेक्ट्रिक लाइट जला सकते हैं? परंपरागत रूप से तेल/घी का दीपक ही अखंड ज्योति माना जाता है। इलेक्ट्रिक लाइट प्रतीकात्मक हो सकती है, किंतु उसे अखंड ज्योति का विकल्प नहीं माना जाता।

📜 पौराणिक कथा: अखंड ज्योति की उत्पत्ति

एक प्रचलित कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के समय मां दुर्गा ने अखंड ज्योति के रूप में अपनी शक्ति प्रकट की थी। जब महिषासुर ने देवलोक पर आक्रमण किया, तब सभी देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियों से एक ज्योति उत्पन्न की। उसी ज्योति से देवी दुर्गा प्रकट हुईं और उन्होंने महिषासुर का वध किया।

तभी से नवरात्रि के नौ दिनों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है। यह ज्योति देवी के अविनाशी स्वरूप और असुरों पर विजय का प्रतीक है।

🪔 अखंड ज्योति के विभिन्न प्रकार और उनका महत्व

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घी की अखंड ज्योति

सात्विकता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक। यह सर्वोत्तम मानी जाती है।

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तेल की अखंड ज्योति

सरसों या तिल का तेल। यह शक्ति, सुरक्षा और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक है।

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कांच का अखंड दीपक

आधुनिक सुविधा के लिए, इसमें अधिक तेल भरा जा सकता है और लंबे समय तक जलता है।

आप अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार किसी भी प्रकार का दीपक चुन सकते हैं। मुख्य बात है श्रद्धा और नियमितता।

🔊 अखंड ज्योति प्रज्वलन के समय पढ़ने योग्य मंत्र

अखंड ज्योति प्रज्वलित करते समय निम्न मंत्रों का उच्चारण करें:

  • ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
    दीपो हरतु मे पापं दीपो ज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
  • शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।
    शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इन मंत्रों का जप करते हुए दीपक प्रज्वलित करें और फिर देवी की आरती करें।

⚠️ अखंड ज्योति जलाते समय सुरक्षा सावधानियाँ

  • दीपक को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ हवा का तेज झोंका न आता हो, ताकि वह बुझे नहीं।
  • ज्वलनशील पदार्थों से दूर रखें।
  • छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुँच से दूर रखें।
  • तेल या घी डालते समय दीपक को ठंडा होने दें या सावधानीपूर्वक डालें।
  • रात में सोते समय दीपक को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ आग लगने का खतरा न हो।
  • यदि संभव हो तो अखंड दीपक को धातु या सिरेमिक की ट्रे पर रखें।

❓ अखंड ज्योति से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या अखंड ज्योति केवल नवरात्रि में ही जलाई जाती है?

उत्तर: अखंड ज्योति की परंपरा मुख्यतः नवरात्रि में है, लेकिन कुछ घरों में यह साल भर (जैसे अखंड रामायण पाठ के साथ) भी जलाई जाती है।

प्रश्न 2: यदि मैं नौ दिनों तक दीपक नहीं जला पाऊं तो क्या कोई दोष है?

उत्तर: कोई दोष नहीं है। आप जितने दिन संभव हो, उतने दिन जलाएं। श्रद्धा और भक्ति ही मुख्य है।

प्रश्न 3: क्या अखंड ज्योति के लिए एक ही बत्ती होनी चाहिए या अनेक?

उत्तर: एक, तीन, पांच, सात या नौ बत्तियाँ जला सकते हैं। यह आपकी परंपरा और सुविधा पर निर्भर करता है।

प्रश्न 4: अखंड ज्योति में किस दिशा का विशेष महत्व है?

उत्तर: दीपक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

प्रश्न 5: क्या अखंड ज्योति जलाने के बाद दूसरा दीपक जलाना निषेध है?

उत्तर: नहीं, आप अन्य दीपक भी जला सकते हैं। अखंड ज्योति के अलावा भी पूजा के दौरान दीपक जलाना शुभ होता है।

📝 अखंड ज्योति – आस्था और ऊर्जा का संगम

चैत्र नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का विधान न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण, पारिवारिक एकता, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का एक सशक्त माध्यम है। नौ दिनों तक जलने वाली यह ज्योति हमें सिखाती है कि भक्ति में निरंतरता, समर्पण और विश्वास ही सच्ची साधना है।

जब हम इस ज्योति को संभाल कर रखते हैं, तो हमारे भीतर भी एक ज्योति प्रज्वलित होती है – जो अज्ञानता, आलस्य और नकारात्मकता को दूर करती है। यह हमें माता रानी की असीम कृपा से जोड़ती है।

इस नवरात्रि अखंड ज्योति का प्रज्वलन करें, नियमों का पालन करें और माता रानी की कृपा प्राप्त करें।

🪔 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे । जय माता दी ।।

चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ
अखंड ज्योति अखंड रहे, माता की कृपा सदा बनी रहे
श्रेणियां: Puja Vidhi

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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