प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें।
🐘 हम तुमको पूजते हैं गणराज सबसे पहले – गणेश वंदना
(Hum Tumko Pujte Hain Ganraj Sabse Pehle) – Ganpati Bhajan
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ वक्रतुण्ड गायत्री ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
॥ स्थायी ॥
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥
॥ अंतरा १ ॥
ऋद्धि और सिद्धि के दाता हो तुम,
हम सबके भाग्य-विधाता हो तुम।
है आपको पुकारा, सरताज सबसे पहले,
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥
॥ अंतरा २ ॥
हे गौरी-नंदन, हे शंकर-तनय,
हम आपसे करते हैं विनय।
चरणों में है समर्पण, महाराज सबसे पहले,
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥
॥ अंतरा ३ ॥
मुझको शरण आपकी मिल सके,
जीवन की बगिया मेरी खिल सके।
कल भी यही कहूँगा, और आज सबसे पहले,
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥
🎵 गणेश वंदना | श्री गणेशाय नमः
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन भगवान गणेश की वंदना है, जिन्हें किसी भी शुभ कार्य से पहले पूजा जाता है। "हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले" – हम सबसे पहले आपको, गणों के राजा को पूजते हैं।
प्रारंभ में वक्रतुण्ड गायत्री मंत्र है – "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा" – अर्थ: हे वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूंड वाले), महाकाय (विशाल शरीर वाले), करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले, हे देव, मेरे सभी कार्यों में निर्विघ्नता प्रदान करें।
"ऋद्धि और सिद्धि के दाता हो तुम, हम सबके भाग्य-विधाता हो तुम" – आप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाले हैं, हम सबके भाग्य विधाता हैं।
"हे गौरी-नंदन, हे शंकर-तनय, हम आपसे करते हैं विनय" – हे गौरी के नंदन, शंकर के पुत्र, हम आपसे विनती करते हैं। "चरणों में है समर्पण, महाराज सबसे पहले" – सबसे पहले आपके चरणों में समर्पण है।
"मुझको शरण आपकी मिल सके, जीवन की बगिया मेरी खिल सके" – मुझे आपकी शरण मिल सके, मेरे जीवन की बगिया खिल सके। "कल भी यही कहूँगा, और आज सबसे पहले" – कल भी यही कहूँगा, और आज भी सबसे पहले आपकी स्तुति करता हूँ।
यह भजन सिखाता है कि हर शुभ कार्य की शुरुआत गणपति वंदना से करनी चाहिए। वे विघ्नहर्ता हैं, ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं, और उनकी शरण में जाने से जीवन खिल उठता है।
🐘 गणेश जी – विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य
भगवान गणेश को हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले पूजा जाता है। इन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और सिद्धि-ऋद्धि के स्वामी के रूप में जाना जाता है। इनके प्रमुख नाम हैं: गणपति, गणेश, वक्रतुण्ड, एकदन्त, गजानन, लम्बोदर, आदि।
इस भजन में गणेश जी को गौरी-नंदन (पार्वती के पुत्र) और शंकर-तनय (शिव के पुत्र) कहकर संबोधित किया गया है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🐘 प्रथम पूज्य
"हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले" – यह पंक्ति गणेश जी की प्रथम पूज्यता को दर्शाती है। किसी भी कार्य की शुरुआत में उनका स्मरण शुभ और विघ्न-मुक्ति का कारण होता है।
✨ ऋद्धि-सिद्धि के दाता
गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि का स्वामी माना जाता है। भक्त उनसे भौतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि की प्रार्थना करता है।
🎯 संदेश : गणराज सबसे पहले पूज्य हैं। वे ऋद्धि-सिद्धि के दाता, भाग्य-विधाता, गौरी-नंदन, शंकर-तनय हैं। उनकी शरण में जाने से जीवन खिल उठता है। आज भी और कल भी, हम सबसे पहले उन्हीं को पूजेंगे।
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