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करीं नवदुर्गा के स्वागतम – नवरात्रि भजन (Kari Navdurga Ke Swagatam) | Surabhi Kashyap

212 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

🙏 करीं नवदुर्गा के स्वागतम – नवरात्रि भजन

(Kari Navdurga Ke Swagatam) – Navratri Bhajan 2026

स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम ॥

🎬 गीत विवरण

🎤 गायक: सुरभि कश्यप, राजीव मिश्रा
🎶 संगीत: शिशिर पांडेय
✍️ गीतकार: संतोष पुरी
🎭 कलाकार: सुरभि कश्यप, राजीव मिश्रा, आदित्य खुराना
🏷️ लेबल: Bhojpuri IT Cell
🕉️ पर्व: नवरात्रि, दुर्गा पूजा

📜 भजन लिरिक्स (भोजपुरी-हिन्दी मिश्रित)

॥ स्थायी ॥

शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया
लहर लहर लहरता लाली चुनरिया
शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया
लहर लहर लहरता लाली चुनरिया

धन भइल दर्शन कइके नजरिया
धन भइल दर्शन कइके नजरिया
आइल बा नवरातर महीनवाँ
नाँचीं बजा के ढोल, ढम ढम ढम

स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम

॥ अंतरा १ ॥

गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया
लाग-ता देवी के बोल दी मुरतिया
गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया
लाग-ता देवी के बोल दी मुरतिया

ऊँचा भवनवाँ, मोहेला मनवाँ
पंडाल के झाँकी महँगा महँगा
पंडाल के झाँकी महँगा महँगा

जवन कलर साड़ी मईया के
उहे कलर मोर लहँगा लहँगा
जवन कलर साड़ी मईया के
उहे कलर मोर लहँगा

उहे कलर मोर सोरहो सिंगारवा
गरबा में चमकेला चम चम चम

स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम

॥ अंतरा २ ॥

महिमा सनातन के पहुँचे संसार में
जिये परम्परा धर्म के अकवार में
महिमा सनातन के पहुँचे संसार में
जिये परम्परा धर्म के अकवार में

माथे प गोरिया, लेके गगरिया
गावेलू केकरा ला गीतिया गीतिया
गावेलू केकरा ला गीतिया गीतिया

जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के
लागे बड़ा निक झिझीया झिझीया
जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के
लागे बड़ा निक झिझीया झिझीया

सखिया सहेली संग चढ़ते दशहरा
भक्ति के रंग में रंगा गइनी हम

स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम

🎵 गायक: सुरभि कश्यप, राजीव मिश्रा | संगीत: शिशिर पांडेय | गीत: संतोष पुरी

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भोजपुरी-हिन्दी मिश्रित भजन नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ नवदुर्गा के स्वागत में गाया गया है। "स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम" – हम नवदुर्गा का स्वागत करते हैं।

"शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया" – माँ शेर पर सवार होकर आई हैं, उनकी लाल चुनरी लहरा रही है। "धन भइल दर्शन कइके नजरिया" – उनके दर्शन करके आँखें धन्य हो गईं। "आइल बा नवरातर महीनवाँ" – नवरात्रि का महीना आ गया है, आओ ढोल बजाकर नाचें।

"गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया" – कुम्हार ने ऐसी सुंदर मूर्ति गढ़ी है, मानो देवी बोल रही हों। ऊँचे भवनों में, मन मोह लेने वाले पंडालों में भव्य झाँकियाँ सजी हैं।

"जवन कलर साड़ी मईया के, उहे कलर मोर लहँगा" – माँ जिस रंग की साड़ी पहनती हैं, वही रंग मेरा लहंगा है। वही रंग मेरा सोलह श्रृंगार है, और गरबा में मैं चमकती हूँ।

"महिमा सनातन के पहुँचे संसार में, जिये परम्परा धर्म के अकवार में" – सनातन की महिमा संसार में फैले, धर्म की परम्परा हमेशा जीवित रहे।

"माथे प गोरिया, लेके गगरिया, गावेलू केकरा ला गीतिया" – माथे पर गोरिया (मटकी) लेकर, किसके लिए गीत गाती हूँ? जगदम्बा, लक्ष्मी, सरस्वती का नाम लेकर भक्ति में रंग जाती हूँ।

"सखिया सहेली संग चढ़ते दशहरा, भक्ति के रंग में रंगा गइनी हम" – सखियों-सहेलियों के संग दशहरा (विजयादशमी) मनाते हुए, मैं भक्ति के रंग में रंग गई हूँ।

यह भजन नवरात्रि के उत्साह, माँ के दर्शन की धन्यता, पंडालों की भव्यता, और गरबा-नृत्य के उल्लास को बखूबी दर्शाता है।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • मयरिया: मैया, माता
  • सुरतिया: सुंदर आकृति, मूर्ति
  • लाग-ता: लगता है, मानो
  • मुरतिया: मूर्ति
  • मोहेला: मोह लेने वाला
  • लहँगा: लहंगा (पारंपरिक स्कर्ट)
  • सोरहो सिंगार: सोलह श्रृंगार
  • अकवार: आकर, स्वरूप
  • गोरिया: छोटा मटका (गरबा में प्रयुक्त)
  • गगरिया: घड़ा, कलश
  • झिझीया: जयकारा, जोश भरा नारा
  • चढ़ते दशहरा: दशहरा (विजयादशमी) मनाते हुए

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🦁 माँ का शेर पर सवारी

माँ दुर्गा का शेर पर सवार होना उनके शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर हैं।

🎨 गरबा और पंडाल की झाँकी

नवरात्रि में गरबा नृत्य और पंडालों में माँ की भव्य झाँकियाँ सजाने की परंपरा है। यह भजन उस सांस्कृतिक उत्सव को जीवंत करता है।

🎯 संदेश : नवरात्रि का पावन पर्व आ गया है। माँ शेर पर सवार होकर आई हैं, उनकी लाल चुनरी लहरा रही है। पंडालों में भव्य झाँकियाँ सजी हैं, गरबा की धुन पर सब झूम रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर नवदुर्गा का स्वागत करें और भक्ति के रंग में रंग जाएँ।

॥ स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम ॥
॥ जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के लागे बड़ा निक झिझीया ॥
श्रेणियां: durga amritvani

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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