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Durga Puja

Lal Chunari Mein Saji Meri Maa Lyrics (लाल चुनरी में सजी मेरी माँ) – Parul Gupta Durga Bhajan 2026 | Jai Ambe Jai Jagdambe Maa

261 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 लाल चुनरी में सजी मेरी माँ – दुर्गा मैया आई द्वार

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

(Lal Chunari Mein Saji Meri Maa Lyrics In Hindi) – Parul Gupta Durga Bhajan 2026 | Jai Ambe Jai Jagdambe Maa

गायिका एवं गीतकार: परुल गुप्ता || माँ दुर्गा भजन

📝 भजन विवरण

🎤 गायिका: परुल गुप्ता (Parul Gupta)
✍️ गीतकार: परुल गुप्ता (Parul Gupta)
🏷️ श्रेणी: दुर्गा भजन / माँ भजन
📍 भाव: श्रद्धा, भक्ति, माँ का स्वरूप वर्णन
🎨 विशेष: लाल चुनरी में सजी माँ

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ दोहा ॥

या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥

॥ स्थायी ॥

लाल चुनरी में सजी मेरी माँ,
दुर्गा मैया आई द्वार,
जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे,
भर देती माँ उसकी झोली अपार,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ॥

॥ अंतरा १ ॥

माथे बिंदी लाल सुहानी,
नयनों में ममता प्यारी,
हाथों में चूड़ियाँ खनके माँ की,
भक्तों की रखवाली,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ॥

॥ अंतरा २ ॥

सिंह सवारी माँ भवानी,
हाथों में त्रिशूल धारी,
दुष्टों का संहार करें माँ,
भक्तों की रखवाली,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ॥

॥ अंतरा ३ ॥

तेरे चरणों में शीश झुकाएँ,
दे दे माँ आशीष,
भक्ति दे दे शक्ति दे दे,
कर दे जीवन दीप्त,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ॥

लाल चुनरी में सजी मेरी माँ,
दुर्गा मैया आई द्वार,
जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे,
भर देती माँ उसकी झोली अपार,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ॥

🎤 गायिका एवं गीतकार :- परुल गुप्ता (Parul Gupta)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह सुंदर भजन "लाल चुनरी में सजी मेरी माँ" परुल गुप्ता की सुरीली आवाज़ में माँ दुर्गा के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त की माँ के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम को दर्शाता है, जो उन्हें लाल चुनरी में सजी हुई, द्वार पर आई हुई देखता है।

"या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता" – यह प्रारंभिक दोहा देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) का प्रसिद्ध श्लोक है, जो सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित देवी को नमन करता है।

"लाल चुनरी में सजी मेरी माँ, दुर्गा मैया आई द्वार" – भक्त अपनी माँ को लाल चुनरी (लाल रंग की साड़ी या दुपट्टा) में सजी हुई देखता है। माँ दुर्गा अपने भक्तों के द्वार पर पधारी हैं।

"जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे, भर देती माँ उसकी झोली अपार" – यह पंक्ति माँ की कृपा और उदारता को दर्शाती है। जो भी सच्चे मन से माँ को पुकारता है, माँ उसकी झोली (मनोकामना) को अपार रूप से भर देती हैं।

"माथे बिंदी लाल सुहानी, नयनों में ममता प्यारी" – माँ के स्वरूप का वर्णन: उनके माथे पर लाल बिंदी सुहावनी लगती है, और उनके नयनों में ममता और प्यार झलकता है। उनके हाथों में चूड़ियाँ खनकती हैं, और वे भक्तों की रखवाली करती हैं।

"सिंह सवारी माँ भवानी, हाथों में त्रिशूल धारी" – माँ भवानी सिंह पर सवार हैं और उनके हाथों में त्रिशूल है। वे दुष्टों का संहार करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं।

"तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, दे दे माँ आशीष" – भक्त माँ के चरणों में शीश झुकाते हैं और उनसे आशीष माँगते हैं। वे माँ से भक्ति और शक्ति की याचना करते हैं ताकि उनका जीवन दीप्त (प्रकाशमान) हो जाए।

🔍 माँ दुर्गा भजन का विशेष महत्त्व

लाल चुनरी का महत्व: लाल रंग शक्ति, उर्जा और सौभाग्य का प्रतीक है। माँ दुर्गा को प्रायः लाल वस्त्रों में दिखाया जाता है। लाल चुनरी माँ के शक्तिशाली और कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाती है। नवरात्रि के समय माँ को लाल चुनरी चढ़ाने का विशेष महत्व है।

देवी का श्लोक: प्रारंभिक दोहा दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ) का सबसे प्रसिद्ध श्लोक है। यह श्लोक देवी की सर्वव्यापकता और शक्ति का वर्णन करता है। इसके साथ भजन शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

"जय अम्बे जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ": यह माँ दुर्गा की आरती का एक प्रसिद्ध अंश है। इसका बार-बार उच्चारण करने से भक्ति का वातावरण बनता है और माँ की कृपा प्राप्त होती है।

माँ का स्वरूप: इस भजन में माँ के दो स्वरूपों का वर्णन है - एक ओर वे स्नेहिल माँ हैं, जिनके नयनों में ममता है, जो चूड़ियाँ पहनती हैं; दूसरी ओर वे शक्तिशाली देवी हैं, जो सिंह पर सवार हैं, हाथों में त्रिशूल लिए दुष्टों का संहार करती हैं। यह माँ के सौम्य और रौद्र दोनों रूपों का अद्भुत संगम है।

परुल गुप्ता की रचना: गायिका और गीतकार परुल गुप्ता ने इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा को व्यक्त किया है। उनकी सरल भाषा और भावपूर्ण शब्द इस भजन को विशेष बनाते हैं। यह भजन हर उस भक्त के दिल की आवाज़ है जो माँ के दर्शन करना चाहता है और उनसे आशीर्वाद पाना चाहता है।

💖 माँ के द्वार पर

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि माँ दुर्गा हमेशा अपने भक्तों के द्वार पर आती हैं, खासकर जब उन्हें सच्चे मन से पुकारा जाता है। वे लाल चुनरी में सजी हुई, ममता से भरे नयनों के साथ आती हैं, और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। चाहे वह दुष्टों का संहार करने वाली भवानी के रूप में हों, या चूड़ियाँ पहने स्नेहिल माँ के रूप में, वे हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

✨ श्रद्धा का प्रतीक

लाल चुनरी में सजी मेरी माँ केवल एक भजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि माँ कभी दूर नहीं होतीं। वे हमेशा हमारे पास हैं, हमारे द्वार पर खड़ी हैं। बस जरूरत है सच्चे मन से पुकारने की। माँ का आशीर्वाद पाने के लिए न किसी मंत्र की जरूरत है, न किसी जटिल अनुष्ठान की - बस सच्चा मन और पुकार चाहिए।

🙏 ॐ श्री दुर्गायै नमः || जय अम्बे जय अम्बे, जय जगदम्बे माँ 🙏

॥ परुल गुप्ता कृत दुर्गा भजन ॥
॥ लाल चुनरी में सजी मेरी माँ, दुर्गा मैया आई द्वार ॥

गायिका एवं गीतकार: परुल गुप्ता | Singer & Lyricist: Parul Gupta

॥ जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे, भर देती माँ उसकी झोली अपार ॥

श्रेणियां: Durga Puja

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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