Hanuman Bhajan

संकट मोचन हनुमानाष्टक (बाल समय रबि भक्ष लियो) – Sankat Mochan Hanumanashtak (Bal Samay Rabi Bhaksh Liyo) Complete Lyrics and Meaning in Hindi

581 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 संकट मोचन हनुमानाष्टक (बाल समय रबि भक्ष लियो)

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

(Sankat Mochan Hanumanashtak – Bal Samay Rabi Bhaksh Liyo) – Complete Lyrics with Meaning

गोस्वामी तुलसीदास कृत ॥

विवरण एवं मुख्य बिंदु

✍️ रचनाकार:गोस्वामी तुलसीदास
🏷️ श्रेणी:हनुमान स्तोत्र / अष्टक
📍 भाव:संकट निवारण, शक्ति, आस्था

📜 संकट मोचन हनुमानाष्टक – सम्पूर्ण पाठ एवं अर्थ

⚡ “बाल समय रबि भक्ष लियो तब, तीनहूँ लोक भयो अँधियारो…”
यह अष्टक गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित है। इसमें हनुमान जी के आठ प्रमुख संकट मोचन प्रसंगों का वर्णन है। प्रत्येक चौपाई के अंत में “को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो” का दोहराव उनकी महिमा को दर्शाता है।

॥ प्रथम चौपाई ॥

बाल समय रबि भक्ष लियो तब,
तीनहूँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहू सों जात न टारो।।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : बाल्यकाल में आपने सूर्य को भोजन के रूप में निगल लिया था, जिससे तीनों लोक अंधकारमय हो गए। इससे समस्त जगत में भय फैल गया, और यह संकट किसी से टल नहीं रहा था। तब सभी देवताओं ने आकर आपकी प्रार्थना की और आपने सूर्य को मुक्त कर सबके कष्ट दूर कर दिए। हे कपि! आपका नाम “संकट मोचन” है – यह बात कौन नहीं जानता?

॥ द्वितीय चौपाई ॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चैंकि महा मुनि साप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो।।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास को सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : बालि के भय से सुग्रीव किष्किंधा के पास ऋष्यमूक पर्वत पर रह रहे थे। वहाँ आप (हनुमान) उनके साथ थे। महर्षि मतंग ने शाप दे दिया था कि बालि यदि उस पर्वत पर आएगा तो उसका सिर फट जाएगा। उस समय यह संकट कैसे टले? आपने ब्राह्मण का रूप धारण कर राम-सीता का समाचार दिया और सुग्रीव का शोक दूर किया।

॥ तृतीय चौपाई ॥

अंगद के सँग लेन गये सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब,
लाय सिया-सुधि प्राण उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : सीताजी की खोज में अंगद के साथ जब आप गए, तो वानर सेना ने कहा कि बिना सीता की सुधि लाए हम जीवित नहीं लौटेंगे। सभी समुद्र तट पर थक गए। तब आपने समुद्र पार करके सीताजी का समाचार प्राप्त किया और सबके प्राण बचाए।

॥ चतुर्थ चौपाई ॥

रावन त्रास दई सिय को सब,
राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाय महा रजनीचर मारो।।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : रावण ने सीताजी को भय दिखाया और राक्षसियों द्वारा सताया गया। उस समय आपने लंका में जाकर राक्षसों का संहार किया और सीताजी को रामजी की अंगूठी देकर उनका शोक दूर किया। सीताजी अशोक वाटिका में अग्नि प्रवेश की इच्छा कर रही थीं, पर आपने उन्हें सांत्वना दी।

॥ पंचम चौपाई ॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्राण उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : लक्ष्मणजी के हृदय में शक्ति बाण लगा, तो उनके प्राण संकट में पड़ गए। सुषेन वैद्य ने कहा कि संजीवनी बूटी की आवश्यकता है। आपने द्रोणाचल पर्वत उखाड़कर लाया और संजीवनी देकर लक्ष्मणजी के प्राण बचाए।

॥ षष्ठ चौपाई ॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो।।
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : युद्ध में रावण ने नागपाश का प्रयोग किया, जिससे रामजी सहित सारी वानर सेना बंध गई। यह बहुत बड़ा संकट था। तब आपने गरुड़जी को बुलाकर उनके द्वारा नागपाश कटवाया और सबको मुक्ति दिलाई।

॥ सप्तम चौपाई ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पाताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों,
बलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत सँहारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : अहिरावण राम-लक्ष्मण को पाताल ले गया। उसने देवी की पूजा करके बलि देने का मंत्र रचा। आपने वहाँ जाकर अहिरावण और उसकी सेना का वध कर दिया और राम-लक्ष्मण को मुक्त कराया।

॥ अष्टम चौपाई ॥

काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसों नहिं जात है टारो।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो।।

🙏 अर्थ : आपने देवताओं के बड़े-बड़े कार्य किए हैं, हे वीर महाप्रभु! आप विचार करें – मेरे जैसे गरीब का कौन-सा संकट है जो आपसे नहीं टल सकता? अतः मेरे जो भी संकट हैं, उन्हें शीघ्र दूर करो।

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,
अरू धरि लाल लँगूर।
बज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर।।

🙏 अर्थ : आपका शरीर लाल (सिंदूरी) है, लाल रंग की लंबी पूंछ धारण किए हैं। आपकी देह वज्र के समान दृढ़ है और दानवों का दमन करने वाले हैं। हे कपि श्रेष्ठ! आपकी जय-जय-जय हो।

॥ इति श्री गोस्वामी तुलसीदासजी कृत संकटमोचन हनुमानाष्टक सम्पूर्णम् ॥

✨ संकट मोचन हनुमानाष्टक का महत्व

यह अष्टक हनुमान जी के उन आठ प्रमुख प्रसंगों का वर्णन करता है जिनमें उन्होंने भक्तों और देवताओं के संकट दूर किए। “को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो” – यह पंक्ति उनके इस नाम की सार्वभौमिक मान्यता को दर्शाती है।

  • प्रत्येक संकट का निवारण : बाल्यकाल में सूर्य भक्षण, बालि के भय से सुग्रीव की दशा, सीता खोज, लंका दहन, लक्ष्मण की मूर्छा, नागपाश से मुक्ति, अहिरावण वध – ये सभी संकट हनुमान जी ने दूर किए।
  • अष्टक का पाठ : नियमित रूप से इस अष्टक का पाठ करने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक संकट दूर होते हैं। शनि दोष, ग्रह बाधा, भय, शत्रु पीड़ा आदि में इसका पाठ अत्यंत लाभकारी माना गया है।
  • आस्था का प्रतीक : यह स्तोत्र भक्तों को हनुमान जी की शरण में जाने और यह विश्वास दिलाता है कि वे हर संकट से पार कर सकते हैं।

🕉️ पाठ विधि एवं लाभ

📖 पाठ विधि
  • प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ स्थान पर बैठें।
  • हनुमान जी का ध्यान करें और संकल्प लें।
  • इस अष्टक का एक-एक चौपाई ध्यानपूर्वक उच्चारण करें।
  • यदि संभव हो तो मंगलवार या शनिवार को विशेष रूप से पाठ करें।
  • अंत में “जय श्री राम” का उच्चारण करें और प्रसाद वितरित करें।
💫 लाभ
  • सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
  • शनि दशा, ढैया, साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
  • मानसिक शांति, आत्मविश्वास और शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
  • शत्रु बाधा समाप्त होती है, कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
  • संकट के समय पाठ करने से तुरंत राहत का अनुभव होता है।
॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ॥
॥ संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "संकट मोचन हनुमानाष्टक (बाल समय रबि भक्ष लियो) – Sankat Mochan Hanumanashtak (Bal Samay Rabi Bhaksh Liyo) Complete Lyrics and Meaning in Hindi" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

श्रेणियां: Hanuman Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!