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Hanuman Bhajan

श्री बजरंग बाण (निश्चय प्रेम प्रतीति ते) सम्पूर्ण पाठ और अर्थ | Bajrang Baan Complete Text with Meaning in Hindi

1,607 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 श्री बजरंग बाण

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(निश्चय प्रेम प्रतीति ते) – सम्पूर्ण पाठ एवं हिंदी अर्थ

हनुमान जी का अद्भुत एवं प्रचण्ड स्तोत्र

📖 बजरंग बाण – परिचय

📿 रचियता: श्री गोस्वामी तुलसीदास जी (मान्यता)
🏷️ श्रेणी: हनुमान स्तोत्र / प्रार्थना
⚡ विशेषता: संकटमोचन, रोग नाश, सभी बाधाओं से मुक्ति

📌 “बजरंग बाण” हनुमान जी का अत्यन्त प्रभावशाली स्तोत्र है। इसे “निश्चय प्रेम प्रतीति ते” दोहे से प्रारम्भ कर, श्रद्धापूर्वक पढ़ने या सुनने से सभी प्रकार के संकट, भय, रोग और शत्रु का नाश होता है। यहाँ सम्पूर्ण पाठ एवं सरल हिंदी अर्थ प्रस्तुत है।

📜 श्री बजरंग बाण – सम्पूर्ण पाठ (हिन्दी)

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
विनय करैं सम्मान।
तेहि के कारज सकल शुभ,
सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज विलंब न कीजै।
आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूद सिंधु के पारा।
सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका।
मारि लात गई सुरलोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा।
सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजाड़ि सिंधु महँ बोरा।
अति आतुर यम कातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा।
लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई।
जय-जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब विलंब केहि कारण स्वामी।
कृपा करहु प्रभु अंतर्यामी॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता।
आतुर होइ दुःख करहु निपाता॥
जय गिरिधर जय जय सुखसागर।
सुर-समूह समरथ भट नागर॥

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले।
बैरिहि मारु वज्र सम कीले॥
सुनि हुंकार हुंकार दै धावो।
वज्र गदा हनु विलंब न लावो॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै।
रामदूत धरु मारु धाय कै॥
जय हनुमंत अनंत अगाधा।
दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
वन उपवन जल-थल गृह माहीं।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥
पायँ परौं कर जोरि मनावौं।
अपने काज लागि गुण गावौं॥
जय अंजनि कुमार बलवंता।
शंकर सुवन वीर हनुमंता॥
बदन कराल काल कुल घालक।
भूत-प्रेत पिशाच उर शालक॥
भूत-प्रेत पिशाच निशाचर।
अग्नि बैताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।
राखु नाथ मर्यादा नाम की॥
जनकसुता पति दास कहावो।
ताकी शपथ विलंब न लावो॥
जय जय जय धुनि होत आकाशा।
सुमिरत होत दुःसह दुःख नाशा॥
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई।
पायँ परौं कर जोरि मनाई॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हं हं हांक देत कपि चंचल।
ॐ सं सं सं सं सहमि पराने खल दल॥
अपने जन को तुरत उबारो।
सुमिरत होय आनंद हमारो॥
ताते विनती करौं पुकारि।
हरहु सकल दुःख विपति हमारी॥
ऐसो बल प्रभु तोर अहारा।
कास न हरहु दुःख संकट मोरा॥
हे बजरंग बाण सम धावो।
मेटहु सकल दुःख दरस दिखावो॥
जन की लाज जात एहि बारा।
धावहु हे कपि पवनकुमारा॥
जयति जयति जय हनुमाना।
जयति जयति गुण ज्ञान निधाना॥
जयति जयति जय कपिराई।
जयति जयति जय सुखदाई॥
जयति जयति जय राम पियारे।
जयति जयति जय सिया दुलारे॥
जयति जयति मुद मंगलदाता।
जयति जयति त्रिभुवन विख्याता॥

॥ दोहा ॥

उर प्रतीति दृढ़ सरन हवै , पाठ करै धरि ध्यान ।
बाधा सब हर, करै सब काम सफल हनुमान ।।

✍️ रचना – श्री गोस्वामी तुलसीदास जी (आदि काल से प्रचलित)

🙏 बजरंग बाण – हिंदी अर्थ एवं संदेश

🔹 प्रारम्भिक दोहा (अर्थ)

जो व्यक्ति निश्चय, प्रेम और श्रद्धा से हनुमान जी की विनय करता है, उसके सभी शुभ कार्य हनुमान जी अवश्य सिद्ध करते हैं।

🔹 चौपाई – संक्षिप्त भावार्थ

प्रथम चौपाइयों में हनुमान जी के विभिन्न लीलाओं का स्मरण है – सिंधु पार करना, सुरसा मुख से निकलना, लंकिनी का वध, विभीषण को सुख देना, सीता जी से भेंट, अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध, लंका दहन आदि। इसके बाद भक्त प्रार्थना करता है कि प्रभु अब विलम्ब न करें, लक्ष्मण जी के प्राणदाता, आतुर होकर दुःख दूर करें।

बीज मंत्रों (ॐ हनु-हनु-हनु आदि) से हनुमान जी की शक्ति का आह्वान किया गया है। भक्त कहते हैं – “मैं पूजा, जप, नियम कुछ नहीं जानता, केवल आपकी शरण हूँ। आपके बल से मैं कहीं नहीं डरता।”

आगे भूत-प्रेत, पिशाच, निशाचर, अग्नि-बैताल आदि सभी को मारने की प्रार्थना है – “राम की शपथ, सीता जी की शपथ, इन सबको मारो।”

अन्त में “हे बजरंग बाण समान वेग से धावो, सारे दुःख मिटाओ।” जय-जयकार से स्तोत्र समाप्त होता है। अन्तिम दोहे में कहा गया है – जो हृदय में दृढ़ प्रतीति रखकर ध्यानपूर्वक इसका पाठ करता है, हनुमान जी उसकी सब बाधाएँ हटाकर सभी कार्य सफल करते हैं।

🔹 पाठ का विशेष फल

बजरंग बाण का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, शारीरिक आरोग्य, शत्रु-बाधा नाश, भयमुक्ति, संकटों से मुक्ति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र अत्यन्त प्रभावशाली है, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को पाठ करने का विधान है।

✨ बजरंग बाण का महत्त्व एवं विधि

विधि: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा में आसन लगाकर, हनुमान जी का ध्यान करते हुए “निश्चय प्रेम प्रतीति ते” दोहे से प्रारम्भ कर पूरा स्तोत्र पढ़ें। तत्पश्चात “उर प्रतीति दृढ़” दोहा बोलकर समाप्त करें।

विशेषता: इसे “बाण” (तीर) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह स्तोत्र शत्रु, रोग, संकट रूपी कठिनाइयों को भेदता हुआ सीधा सफलता प्रदान करता है। हनुमान जी के प्रचण्ड रूप का आवाहन कर यह स्तोत्र अभय, बल, बुद्धि और विजय प्रदान करने वाला माना जाता है।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय श्री राम ।। जय बजरंगबली ।।

॥ इति श्री बजरंग बाण स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
🌺 जो पाठ करे प्रेम सहित, तेहि के कारज सिद्ध होंहि 🌺
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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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