Hanuman Bhajan

श्री बजरंग बाण (निश्चय प्रेम प्रतीति ते) सम्पूर्ण पाठ और अर्थ | Bajrang Baan Complete Text with Meaning in Hindi

1,443 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 श्री बजरंग बाण

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(निश्चय प्रेम प्रतीति ते) – सम्पूर्ण पाठ एवं हिंदी अर्थ

हनुमान जी का अद्भुत एवं प्रचण्ड स्तोत्र

📖 बजरंग बाण – परिचय

📿 रचियता: श्री गोस्वामी तुलसीदास जी (मान्यता)
🏷️ श्रेणी: हनुमान स्तोत्र / प्रार्थना
⚡ विशेषता: संकटमोचन, रोग नाश, सभी बाधाओं से मुक्ति

📌 “बजरंग बाण” हनुमान जी का अत्यन्त प्रभावशाली स्तोत्र है। इसे “निश्चय प्रेम प्रतीति ते” दोहे से प्रारम्भ कर, श्रद्धापूर्वक पढ़ने या सुनने से सभी प्रकार के संकट, भय, रोग और शत्रु का नाश होता है। यहाँ सम्पूर्ण पाठ एवं सरल हिंदी अर्थ प्रस्तुत है।

📜 श्री बजरंग बाण – सम्पूर्ण पाठ (हिन्दी)

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
विनय करैं सम्मान।
तेहि के कारज सकल शुभ,
सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज विलंब न कीजै।
आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूद सिंधु के पारा।
सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका।
मारि लात गई सुरलोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा।
सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजाड़ि सिंधु महँ बोरा।
अति आतुर यम कातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा।
लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई।
जय-जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब विलंब केहि कारण स्वामी।
कृपा करहु प्रभु अंतर्यामी॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता।
आतुर होइ दुःख करहु निपाता॥
जय गिरिधर जय जय सुखसागर।
सुर-समूह समरथ भट नागर॥

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले।
बैरिहि मारु वज्र सम कीले॥
सुनि हुंकार हुंकार दै धावो।
वज्र गदा हनु विलंब न लावो॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै।
रामदूत धरु मारु धाय कै॥
जय हनुमंत अनंत अगाधा।
दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
वन उपवन जल-थल गृह माहीं।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥
पायँ परौं कर जोरि मनावौं।
अपने काज लागि गुण गावौं॥
जय अंजनि कुमार बलवंता।
शंकर सुवन वीर हनुमंता॥
बदन कराल काल कुल घालक।
भूत-प्रेत पिशाच उर शालक॥
भूत-प्रेत पिशाच निशाचर।
अग्नि बैताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।
राखु नाथ मर्यादा नाम की॥
जनकसुता पति दास कहावो।
ताकी शपथ विलंब न लावो॥
जय जय जय धुनि होत आकाशा।
सुमिरत होत दुःसह दुःख नाशा॥
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई।
पायँ परौं कर जोरि मनाई॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हं हं हांक देत कपि चंचल।
ॐ सं सं सं सं सहमि पराने खल दल॥
अपने जन को तुरत उबारो।
सुमिरत होय आनंद हमारो॥
ताते विनती करौं पुकारि।
हरहु सकल दुःख विपति हमारी॥
ऐसो बल प्रभु तोर अहारा।
कास न हरहु दुःख संकट मोरा॥
हे बजरंग बाण सम धावो।
मेटहु सकल दुःख दरस दिखावो॥
जन की लाज जात एहि बारा।
धावहु हे कपि पवनकुमारा॥
जयति जयति जय हनुमाना।
जयति जयति गुण ज्ञान निधाना॥
जयति जयति जय कपिराई।
जयति जयति जय सुखदाई॥
जयति जयति जय राम पियारे।
जयति जयति जय सिया दुलारे॥
जयति जयति मुद मंगलदाता।
जयति जयति त्रिभुवन विख्याता॥

॥ दोहा ॥

उर प्रतीति दृढ़ सरन हवै , पाठ करै धरि ध्यान ।
बाधा सब हर, करै सब काम सफल हनुमान ।।

✍️ रचना – श्री गोस्वामी तुलसीदास जी (आदि काल से प्रचलित)

🙏 बजरंग बाण – हिंदी अर्थ एवं संदेश

🔹 प्रारम्भिक दोहा (अर्थ)

जो व्यक्ति निश्चय, प्रेम और श्रद्धा से हनुमान जी की विनय करता है, उसके सभी शुभ कार्य हनुमान जी अवश्य सिद्ध करते हैं।

🔹 चौपाई – संक्षिप्त भावार्थ

प्रथम चौपाइयों में हनुमान जी के विभिन्न लीलाओं का स्मरण है – सिंधु पार करना, सुरसा मुख से निकलना, लंकिनी का वध, विभीषण को सुख देना, सीता जी से भेंट, अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध, लंका दहन आदि। इसके बाद भक्त प्रार्थना करता है कि प्रभु अब विलम्ब न करें, लक्ष्मण जी के प्राणदाता, आतुर होकर दुःख दूर करें।

बीज मंत्रों (ॐ हनु-हनु-हनु आदि) से हनुमान जी की शक्ति का आह्वान किया गया है। भक्त कहते हैं – “मैं पूजा, जप, नियम कुछ नहीं जानता, केवल आपकी शरण हूँ। आपके बल से मैं कहीं नहीं डरता।”

आगे भूत-प्रेत, पिशाच, निशाचर, अग्नि-बैताल आदि सभी को मारने की प्रार्थना है – “राम की शपथ, सीता जी की शपथ, इन सबको मारो।”

अन्त में “हे बजरंग बाण समान वेग से धावो, सारे दुःख मिटाओ।” जय-जयकार से स्तोत्र समाप्त होता है। अन्तिम दोहे में कहा गया है – जो हृदय में दृढ़ प्रतीति रखकर ध्यानपूर्वक इसका पाठ करता है, हनुमान जी उसकी सब बाधाएँ हटाकर सभी कार्य सफल करते हैं।

🔹 पाठ का विशेष फल

बजरंग बाण का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, शारीरिक आरोग्य, शत्रु-बाधा नाश, भयमुक्ति, संकटों से मुक्ति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र अत्यन्त प्रभावशाली है, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को पाठ करने का विधान है।

✨ बजरंग बाण का महत्त्व एवं विधि

विधि: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा में आसन लगाकर, हनुमान जी का ध्यान करते हुए “निश्चय प्रेम प्रतीति ते” दोहे से प्रारम्भ कर पूरा स्तोत्र पढ़ें। तत्पश्चात “उर प्रतीति दृढ़” दोहा बोलकर समाप्त करें।

विशेषता: इसे “बाण” (तीर) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह स्तोत्र शत्रु, रोग, संकट रूपी कठिनाइयों को भेदता हुआ सीधा सफलता प्रदान करता है। हनुमान जी के प्रचण्ड रूप का आवाहन कर यह स्तोत्र अभय, बल, बुद्धि और विजय प्रदान करने वाला माना जाता है।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय श्री राम ।। जय बजरंगबली ।।

॥ इति श्री बजरंग बाण स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
🌺 जो पाठ करे प्रेम सहित, तेहि के कारज सिद्ध होंहि 🌺
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "श्री बजरंग बाण (निश्चय प्रेम प्रतीति ते) सम्पूर्ण पाठ और अर्थ | Bajrang Baan Complete Text with Meaning in Hindi" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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