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Sita mata Bhajan

सीता समाहित स्थल: भदोही में स्थित वह पवित्र स्थल जहां माता सीता हुई थीं धरती में विलीन (Sita Samahit Sthal, Bhadohi - The Sacred Place Where Mother Sita Merged into the Earth)

360 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 सीता समाहित स्थल: जहां धरती में समाई थीं माता सीता

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

भदोही जिले में गंगा तट पर स्थित दिव्य धाम (Sita Samahit Sthal, Bhadohi)

इलाहाबाद और वाराणसी के मध्य जानकी का पवित्र स्थल

🌟 परिचय: सीता समाहित स्थल का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में, पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है एक अद्भुत और चमत्कारिक स्थल - सीता समाहित स्थल। यह वह पवित्र धरती है, जहाँ मान्यता है कि माता सीता ने अपने पति श्रीराम से अलग होने के बाद धरती में समाधि ले ली थी। यह स्थल न केवल रामायण काल से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्मारक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का एक जीवंत केंद्र भी है।

इलाहाबाद (प्रयागराज) और वाराणसी (काशी) जैसे दो प्रमुख तीर्थस्थलों के मध्य में बसा यह मंदिर, साधकों और श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष ऊर्जा का केंद्र है। यहाँ की शांत वादियाँ और गंगा की अविरल धारा, भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है। सबसे विशेष बात, इस मंदिर परिसर में स्थापित विशाल हनुमान प्रतिमा, जो विश्व की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में गिनी जाती है, इस स्थल की गरिमा को और बढ़ा देती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

सीता समाहित स्थल उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (पूर्व में संत रविदास नगर) में स्थित है। यह स्थल पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है, जो इसे एक अलौकिक और शांत वातावरण प्रदान करता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: इलाहाबाद (प्रयागराज) और वाराणसी (काशी) के मध्य में स्थित।
  • दूरी: जंजीगंज बाजार से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
  • नदी: गंगा नदी के तट पर स्थित, यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य अद्वितीय है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 60-70 किमी) है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन जंजीगंज या भदोही स्टेशन हैं। वाराणसी और इलाहाबाद भी प्रमुख रेल जंक्शन हैं।
  • सड़क मार्ग: यह स्थल सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वाराणसी, इलाहाबाद और भदोही से बसें या टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं।
🗺️

भदोही, उत्तर प्रदेश

गंगा तट
जंजीगंज से 11 किमी

🚗

निर्देशांक: 25°N, 82°E (लगभग)

📖 पौराणिक कथा: जब धरती में समाईं माता सीता

रामायण के उत्तरकांड के अनुसार, जब प्रजा की बातों से व्यथित होकर भगवान श्रीराम ने माता सीता का परित्याग कर दिया, तब गर्भवती सीता माता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली। वहाँ उन्होंने अपने पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया और उनका पालन-पोषण किया।

वर्षों बाद, जब अश्वमेध यज्ञ के दौरान लव-कुश ने श्रीराम की सेना को परास्त किया और राम स्वयं वहाँ पहुँचे, तब वाल्मीकि जी ने सीता को उनके पास भेजने का निश्चय किया। सीता माता ने अपनी पवित्रता और पतिव्रता धर्म की अंतिम परीक्षा देने का निर्णय लिया।

भदोही में गंगा तट पर, सीता माता ने अपनी माँ, धरती (भूमि देवी) से प्रार्थना की कि यदि वे सर्वथा पवित्र और निष्कलंक हैं, तो उन्हें अपनी गोद में स्थान दें। जैसे ही उन्होंने यह प्रार्थना की, धरती फटी और माता सीता उसी समय भू-समाधि लेकर धरती में विलीन हो गईं। ऐसा माना जाता है कि यह घटना इसी स्थान पर घटित हुई थी, जिसे आज हम "सीता समाहित स्थल" के नाम से जानते हैं।

यह वही क्षण था जब सीता, जो स्वयं लक्ष्मी का अवतार थीं, पृथ्वी में समा कर अपने मूल स्वरूप में लीन हो गईं। यह स्थान उनकी तपस्या, त्याग और पवित्रता का प्रतीक है।

🌍

"जहाँ धरती ने लिया सीता को गोद में"

🙏 विश्व प्रसिद्ध: 110 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा

सीता समाहित स्थल की एक और विशेषता यहाँ स्थापित 110 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा न केवल अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसे विश्व की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में से एक होने का गौरव प्राप्त है।

  • ऊंचाई: लगभग 110 फीट (33.5 मीटर)।
  • दृश्यता: यह प्रतिमा दूर-दूर से दिखाई देती है और गंगा नदी के आस-पास के क्षेत्र में एक प्रमुख लैंडमार्क है।
  • रंग और शैली: प्रतिमा को भव्य रूप से सजाया गया है, जिसमें हनुमान जी को भक्ति भाव में दर्शाया गया है।
  • आध्यात्मिक केंद्र: इस विशाल प्रतिमा ने इस स्थल को देश-विदेश के पर्यटकों और भक्तों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

मान्यता है कि हनुमान जी स्वयं सीता माता के परम भक्त थे और उनकी इस विशाल प्रतिमा का सीता समाहित स्थल पर होना, इस स्थान के महत्व को और अधिक बढ़ा देता है। भक्त यहाँ आकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और सीता-राम के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

🙏

110 फीट

विश्व की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में से एक

🏛️ मंदिर परिसर और वास्तुकला

सीता समाहित स्थल का मंदिर परिसर बेहद विशाल और भव्य है। गंगा नदी के तट पर होने के कारण यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है। मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में बनी है, जिसमें आधुनिकता का भी समावेश है।

🌊 गंगा घाट

मंदिर से सटा हुआ गंगा जी का एक सुंदर घाट है। यहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं और गंगा की आरती में भाग लेते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय गंगा का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

🛕 मुख्य मंदिर

मुख्य मंदिर में जहाँ माता सीता की भू-समाधि का स्थान है, वहाँ एक पवित्र चबूतरा बना हुआ है। यहाँ माता के चरण चिह्नों की पूजा की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव होता है।

🙏 हनुमान प्रतिमा

विशाल हनुमान प्रतिमा परिसर के मुख्य आकर्षण के रूप में स्थित है। प्रतिमा के चारों ओर एक भव्य मंडप बना हुआ है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन-कीर्तन कर सकते हैं।

🌳 शांत वाटिका

परिसर में सुंदर बगीचे और बैठने की व्यवस्था है, जहाँ लोग ध्यान और आत्मचिंतन कर सकते हैं। पेड़-पौधों और गंगा की समीपता इस स्थान को स्वर्गिक आनंद से भर देती है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • पातिव्रत्य धर्म का प्रतीक: यह स्थल माता सीता के अटूट पतिव्रता धर्म और पवित्रता का प्रतीक है। यहाँ आकर भक्तों को वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: ऐसी मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से माता सीता का स्मरण करने और गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।
  • संतान सुख: जो दंपत्ति संतान की कामना करते हैं, वे यहाँ आकर माता सीता का आशीर्वाद लेते हैं। मान्यता है कि माता सीता, जो स्वयं माँ लक्ष्मी का अवतार थीं, भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं।
  • ग्रह दोष निवारण: यहाँ गंगा स्नान और विशेष पूजा-अर्चना करने से कुंडली के विभिन्न ग्रह दोष, विशेषकर चंद्र और शनि दोष, शांत होते हैं।
  • बजरंगबली का सान्निध्य: 110 फीट ऊंचे हनुमान जी के सान्निध्य में भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। हनुमान जी की उपासना से शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
  • त्रिवेणी का पुण्य: इलाहाबाद और काशी के मध्य स्थित होने के कारण, इसे त्रिवेणी के समान पुण्यदायी माना जाता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🚩

रामनवमी

चैत्र माह में मनाया जाने वाला यह त्योहार यहाँ विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान राम के जन्मोत्सव पर भव्य शोभा यात्रा निकलती है।

🌺

हनुमान जयंती

इस दिन विशाल हनुमान प्रतिमा पर विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है। हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होता है और प्रसाद वितरित किया जाता है।

💧

गंगा दशहरा

गंगा नदी के तट पर होने के कारण यहाँ गंगा दशहरा बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। श्रद्धालु गंगा में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं।

🪔

दीपावली

दीपावली के दिन मंदिर को हजारों दीयों से सजाया जाता है और गंगा आरती का विशेष आयोजन होता है।

🌕

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ स्नान करने आते हैं और दीपदान करते हैं।

📿

जानकी नवमी

माता सीता के प्राकट्य दिवस पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, माता का श्रृंगार किया जाता है और भंडारे का आयोजन होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): लगभग 60-70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध।
  • इलाहाबाद (प्रयागराज): लगभग 70-80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, त्रिवेणी संगम और अक्षयवट के लिए प्रसिद्ध।
  • चुनार किला: मिर्जापुर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक किला, जो अपनी वास्तुकला और इतिहास के लिए जाना जाता है।
  • विंध्याचल धाम: मिर्जापुर में स्थित माँ विंध्यवासिनी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ, यहाँ से लगभग 80-90 किमी दूर।
  • सीता कुंड: स्थानीय मान्यताओं से जुड़े अन्य छोटे-छोटे तीर्थ स्थल भी आसपास मौजूद हैं।
  • भदोही शहर: अपने हथकरघा और कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध भदोही शहर भी देखने योग्य है।
📌 यात्रा टिप: यदि आप एक साथ कई स्थानों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो वाराणसी या इलाहाबाद को बेस बनाकर सीता समाहित स्थल की एक दिवसीय यात्रा पर जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

यहाँ यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है, जिससे गंगा तट पर घूमना और दर्शन करना सुखद होता है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल-जून): गर्मी अधिक होती है, लेकिन सुबह के समय दर्शन किए जा सकते हैं।
  • वर्षा ऋतु (जुलाई-सितंबर): गंगा का जलस्तर बढ़ सकता है, यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लें।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी या शाम के समय दर्शन करना अधिक उपयुक्त रहता है।
  • गंगा स्नान अवश्य करें, इसके लिए साफ कपड़े साथ लेकर जाएं।
  • मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की अनुमति के बारे में पूछ लें।
  • पूजा सामग्री मंदिर परिसर के बाहर आसानी से मिल जाती है।
  • भीड़भाड़ से बचने के लिए सप्ताह के मध्य में यात्रा की योजना बनाएं।
  • हनुमान प्रतिमा के दर्शन के लिए अतिरिक्त समय अवश्य रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सीता समाहित स्थल कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में, पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह इलाहाबाद और वाराणसी के मध्य में स्थित है और जंजीगंज बाजार से लगभग 11 किमी दूर है।

प्रश्न 2: इस स्थान का विशेष महत्व क्या है?

उत्तर: यह वह पवित्र स्थान माना जाता है जहाँ माता सीता धरती में समा गई थीं (भू-समाधि ली थी)। यहाँ 110 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा भी स्थित है, जो विश्व की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में से एक है।

प्रश्न 3: यहाँ क्या-क्या देख सकते हैं?

उत्तर: यहाँ मुख्य रूप से माता सीता की भू-समाधि स्थल, 110 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, गंगा घाट, और शांत मंदिर परिसर दर्शनीय हैं।

प्रश्न 4: सीता समाहित स्थल जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच के महीने यहाँ आने के लिए सबसे उपयुक्त हैं, क्योंकि मौसम सुहावना रहता है।

प्रश्न 5: क्या यहाँ रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर परिसर में सीमित धर्मशाला या विश्राम गृह की सुविधा हो सकती है। अधिक विकल्पों के लिए आप निकटवर्ती शहरों भदोही, जंजीगंज या वाराणसी में ठहर सकते हैं।

प्रश्न 6: हनुमान जी की प्रतिमा कितनी ऊंची है?

उत्तर: हनुमान जी की प्रतिमा लगभग 110 फीट ऊंची है और यह विश्व की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में गिनी जाती है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: आमतौर पर मंदिरों में कोई प्रवेश शुल्क नहीं होता है। फिर भी, स्थानीय जानकारी लेना उचित रहेगा।

📝 निष्कर्ष: सीता समाहित स्थल की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

सीता समाहित स्थल केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, त्याग और पवित्रता का एक जीवंत केंद्र है। गंगा के तट पर बसा यह पवित्र धाम, जहाँ माता सीता ने अपनी अंतिम लीला का समापन किया, वहाँ की शांति और सकारात्मक ऊर्जा मन को अद्भुत सुकून प्रदान करती है।

विशाल हनुमान प्रतिमा की भव्यता और मंदिर का शांत वातावरण, भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ता है। यह स्थल हमें माता सीता के पातिव्रत्य धर्म, त्याग और सदाचार की याद दिलाता है। यदि आप कभी इलाहाबाद या वाराणसी की यात्रा पर जाएँ, तो इस पवित्र स्थल के दर्शन अवश्य करें। यहाँ की पवित्र मिट्टी और गंगा की लहरों में आपको असीम शांति और आध्यात्मिक बल का अनुभव होगा।

🙏 जय सीता-राम ।। जय हनुमान ।।

🙏 सीता समाहित स्थल, भदोही
जहाँ धरती ने लिया सीता को गोद में, वहाँ खड़े हैं हनुमान अखंड
श्रेणियां: Sita mata Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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