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Krishna Bhajan

अब न छुपाऊंगी सबको बताऊंगी (राधा रमण मेरा यार ओए) कव्वाली भजन लिरिक्स | Ab Na Chhupaaungi Sabko Bataaungi Radha Raman Mera Yaar Oye Qawwali Bhajan Lyrics

436 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 अब न छुपाऊंगी सबको बताऊंगी – राधा रमण मेरा यार ओए

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Ab Na Chhupaaungi Sabko Bataaungi – Radha Raman Mera Yaar Oye) – कव्वाली भजन / राधा-कृष्ण भक्ति

🎵 तर्ज: कव्वाली – बांके बिहारी, राधा रमण, प्रेम की खुली घोषणा

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कव्वाली भजन / राधा-कृष्ण भक्ति / प्रेम गीत
🎶 भाव: प्रेम की निर्भीक घोषणा, समर्पण, आशिकी
📍 विशेषता: राधा-रमण (कृष्ण) के प्रति अपने प्रेम को सबको बताने का संकल्प, कव्वाली अंदाज़
📀 प्रचलन: राधा-कृष्ण भक्तों में विशेष रूप से प्रिय, प्रेम भक्ति का उत्कट भाव

📜 कव्वाली भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

अब न छुपाऊंगी सबको बताऊंगी
अब न छुपाऊंगी सबको बताऊंगी
राधा रमण मेरा यार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक
राधा रमण मेरा यार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक
ओ बांके बिहारी मेरा यार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक
बांके बिहारी मेरा यार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक

॥ दोहा ॥

इशारों में कहेंगे, न पुकारों में कहेंगे
हमने तुझे चाहा है, ये हजारों में कहेंगे
क्या अब न छुपाऊंगी, सबको बताऊंगी
तुझको कसम से, मैं अपना बनाऊंगी

तू है सनम मेरा यार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक
तू है सनम मेरा यार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक
हाँ मैंने छुपाया कई बार ओए,
मेरा दिल तेरा आशिक
तेरे सिवा कोई दूसरा नहीं मेरा
छोड़ूंगा ना, कसके पकड़ा है दामन तेरा

तू ही मक्का, तू ही काशी, तू ही मदीना है
तू ही मक्का, तू ही काशी, तू ही मदीना है
तेरी गलियों का हूँ आशिक, तू एक नगीना है
तेरी गलियों का हूँ आशिक, तू एक नगीना है

॥ दोहा ॥

किसी के कान में हीरा, किसी के नाक में हीरा
हमें हीरों से मतलब क्या, हमारा श्याम है हीरा
तेरी गलियों का हूँ आशिक, तू एक नगीना है

चाहे दोजख में,
चाहे जन्नत में पहुँचा दो मुझको
चाहे डुबो दो, चाहे पार लगा दो मुझको
तू ही दरिया, तू ही साहिल, तू ही सफीना है
तेरी गलियों का हूँ आशिक, तू एक नगीना है

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / कव्वाली शैली में राधा-कृष्ण भक्ति

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह एक प्रेमपूर्ण कव्वाली भजन है जिसमें भक्त (राधा के भाव में) राधा-रमण (श्रीकृष्ण) के प्रति अपने प्रेम को सबके सामने घोषित करने का संकल्प लेता है। “अब न छुपाऊंगी सबको बताऊंगी” – अब वह अपने प्रेम को छिपाना नहीं चाहती, बल्कि सबको बताना चाहती है। “राधा रमण मेरा यार ओए, मेरा दिल तेरा आशिक” – वह कृष्ण को अपना यार (प्रियतम) कहती है और अपने दिल को उनका आशिक (प्रेमी) बताती है।

दोहे में कहती है – इशारों या पुकारों में नहीं, बल्कि वह हज़ारों में कहकर बताएगी कि उसने उन्हें चाहा है। वह उन्हें अपना बना लेगी। “तू है सनम मेरा यार” – वह उन्हें सनम (प्रेमी) कहती है। उसने बार-बार छुपाया, पर अब नहीं। उनके सिवा कोई दूसरा नहीं, उसने उनका दामन कसके पकड़ लिया है।

दूसरे अंतरे में – “तू ही मक्का, तू ही काशी, तू ही मदीना है” – भक्त कहता है कि उसके लिए कृष्ण ही सभी तीर्थ, सभी पवित्र स्थान हैं। उनकी गलियों का वह आशिक है, वे एक अनमोल नगीना (रत्न) हैं।

दूसरे दोहे में – किसी के कान में हीरा, किसी के नाक में हीरा, पर हमें हीरों से कोई मतलब नहीं, हमारा श्याम (कृष्ण) ही असली हीरा है।

तीसरे अंतरे में – चाहे दोज़ख (नरक) में या जन्नत (स्वर्ग) में पहुँचा दो, चाहे डुबो दो या पार लगा दो – वह कहता है कि तू ही दरिया (नदी), तू ही साहिल (किनारा), तू ही सफीना (नाव) है। यह पूर्ण समर्पण का भाव है – जहाँ भक्त की दशा और दिशा दोनों प्रभु के हाथों में हैं।

यह कव्वाली भजन सिखाता है कि सच्चे प्रेम में लज्जा नहीं होती, उसे सबके सामने घोषित करने में कोई संकोच नहीं होता। कृष्ण ही सब कुछ हैं – तीर्थ, दरिया, साहिल, नगीना।

🔍 कव्वाली भजन का विशेष महत्त्व

प्रेम की निर्भीक घोषणा: यह भजन उस प्रेम की बात करता है जो समाज के बंधनों, लोक-लाज से ऊपर है। भक्त कहता है – “अब न छुपाऊंगी” – यह आत्मविश्वास और निर्भीकता का प्रतीक है।

सार्वभौमिक ईश्वर भाव: “तू ही मक्का, तू ही काशी, तू ही मदीना” – यह पंक्ति धार्मिक सीमाओं से परे जाकर एक ही परम सत्ता की उपस्थिति को दर्शाती है। कृष्ण ही सबके लिए सब कुछ हैं।

पूर्ण समर्पण: “चाहे दोजख में, चाहे जन्नत में पहुँचा दो” – भक्त ने अपने प्रभु के हाथों में अपनी गति और अवस्था पूरी तरह सौंप दी है। यह शरणागति का उच्चतम भाव है।

💖 प्रेम भक्ति का कव्वाली रस

🎯 संदेश

जब भक्त के हृदय में सच्चा प्रेम जागता है, तो वह दुनिया की परवाह किए बिना उसे घोषित करता है। प्रभु के प्रति यह प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म है, और वह प्रभु ही सब कुछ है – तीर्थ, रत्न, सहारा।

✨ आस्था का प्रतीक

यह कव्वाली भजन राधा-कृष्ण के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। “राधा रमण मेरा यार” का उच्चारण मात्र भक्त को आनंद और उन्माद में डुबो देता है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। बांके बिहारी मेरा यार ।।

॥ इति कव्वाली भजनम् ॥
॥ अब न छुपाऊंगी सबको बताऊंगी – राधा रमण मेरा यार ओए ॥
श्रेणियां: Krishna Bhajan radha bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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