प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग – Hanumat Tum Mere Lao Sanjivani)
विवरण एवं मुख्य बिंदु
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ मुखड़ा ॥
हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी,
कैसी विपदा पड़ी है, लखन के लिए।
॥ अंतरा १ – राम का वचन ॥
मेरे रघुवर सुनो, मांग लो प्राण भी,
तो मैं हंसकर के दे दूं वचन के लिए।
॥ अंतरा २ – राम की व्यथा ॥
राम ने यूं कहा हनुमान से,
तन अलग हो रहा हो जैसे जान से,
अंजनीसुत सुनो, मेरा संकट हरो,
रो रहा हूं मगर, तुम नहीं जानते,
है नहीं एक आंसू, नयन के लिए।
॥ अंतरा ३ – हनुमान का प्रत्युत्तर ॥
आप की हो कृपा, मेरे राम हे,
जग में ऐसा नहीं कोई काम रे,
रघुवर, मुझ पर, इतना एहसान है,
अभी जाता हूं मैं, आप को है नहीं,
फिर जरूरत किसी भी कथन के लिए।
🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / भक्ति काव्य
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत मार्मिक भजन लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग पर आधारित है, जब शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे। भक्त राम-हनुमान के संवाद के रूप में इस भजन की रचना करता है। “हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी, कैसी विपदा पड़ी है, लखन के लिए” – राम हनुमान से संजीवनी बूटी लाने की प्रार्थना करते हैं, क्योंकि लक्ष्मण पर भारी विपदा आ पड़ी है।
राम कहते हैं कि यदि वे उनसे प्राण भी माँग लें, तो वे हँसकर दे देंगे – “मेरे रघुवर सुनो, मांग लो प्राण भी, तो मैं हंसकर के दे दूं वचन के लिए”। यह राम की लक्ष्मण के प्रति अटूट प्रेम और त्याग की भावना को दर्शाता है।
दूसरे अंतरे में राम की व्यथा का वर्णन है – “तन अलग हो रहा हो जैसे जान से”। वे कहते हैं कि वे रो रहे हैं, लेकिन हनुमान नहीं जानते, क्योंकि उनके नयनों में एक भी आँसू नहीं है – अत्यधिक दुःख में भी राम संयमित हैं।
तीसरे अंतरे में हनुमान का उत्तर है – “आप की हो कृपा, मेरे राम हे, जग में ऐसा नहीं कोई काम रे”। हनुमान कहते हैं कि आपकी कृपा से कोई भी काम असंभव नहीं। वे कहते हैं कि रघुवर ने उन पर इतना एहसान किया है कि वे बिना किसी और वचन के अभी जाते हैं। यह हनुमान की निष्ठा और तत्परता को दर्शाता है।
यह भजन सिखाता है कि सच्चे भक्त के लिए कोई काम कठिन नहीं होता, और राम-हनुमान का प्रेम अनन्य एवं अटूट है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
लक्ष्मण मूर्छा – करुण प्रसंग: रामायण का यह प्रसंग अत्यंत भावुक है। इस भजन में राम की व्यथा और हनुमान की निष्ठा का अद्भुत चित्रण है।
राम का आत्म-संयम: “है नहीं एक आंसू, नयन के लिए” – यह पंक्ति राम के अद्भुत संयम और गंभीरता को दर्शाती है। भक्त राम के दुःख को भी उनके चरित्र के अनुसार प्रस्तुत करता है।
हनुमान का समर्पण: “अभी जाता हूं मैं, आप को है नहीं फिर जरूरत किसी भी कथन के लिए” – हनुमान बिना किसी आदेश या वादे के तुरंत कार्य करने को तैयार हैं। यह उनके सेवा भाव और तत्परता का प्रतीक है।
💖 भक्ति रस का संगम
🎯 संदेश
भक्ति में समर्पण का यही उच्चतम रूप है – राम के लिए प्राण देने को तत्पर होना और हनुमान के लिए राम की एक पुकार ही पर्याप्त होना।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन हमें सिखाता है कि प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। हनुमान जी की तरह निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले को प्रभु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय श्री राम ।। जय लक्ष्मण ।।
🙏 आभार एवं स्रोत / Thanks & Acknowledgment
इस भजन लिरिक्स एवं प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार:
- 🔗 स्रोत / Source: हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी – हिंदी भजन मंजरी (Hindi Bhajan Manjari)
- ✍️ लेखक / Author Details: यह भजन परम्परागत लोक भक्ति काव्य है। प्रस्तुति एवं संकलन हिंदी भजन मंजरी (Hindi Bhajan Manjari) द्वारा। इस भजन के मूल रचयिता अज्ञात हैं, किंतु भक्ति परम्परा में यह अत्यंत लोकप्रिय है। हम हिंदी भजन मंजरी टीम के सभी योगदानकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस भजन को सुलभ बनाया।
- 📖 अतिरिक्त जानकारी: भजन मंजरी टीम द्वारा संकलित एवं प्रकाशित। सभी धार्मिक भावनाओं एवं परम्पराओं का सम्मान करते हुए यह आभार प्रस्तुत किया गया है।
🙏 हनुमान भक्ति एवं रामायण के इस अमर प्रसंग को सहेजने हेतु सभी कलाकारों एवं संकलनकर्ताओं का धन्यवाद। जय श्री राम, जय हनुमान।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी (लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग) भजन लिरिक्स | Hanumat Tum Mere Lao Sanjivani Lakshman Moorchha Bhajan Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें