Hanuman Bhajan

जन्मे हैं हनुमान प्यारें (हनुमान जन्मोत्सव) लिरिक्स | Janme Hain Hanuman Pyare Hanuman Janmotsav Lyrics in Hindi

279 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 जन्मे हैं हनुमान प्यारें – हनुमान जन्मोत्सव गीत

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

(Janme Hain Hanuman Pyare – Hanuman Janmotsav Geet)

🎵 तर्ज: “लल्ला की सुन के मैं आयी” – चैत्र पूनम, हनुमान जयंती का उल्लासपूर्ण गीत

विवरण एवं मुख्य बिंदु

🏷️ श्रेणी:हनुमान भजन / जन्मोत्सव / लोकगीत
🎶 भाव:उल्लास, आनंद, भक्ति, जयकार
📍 विशेषता:हनुमान जयंती पर गाया जाने वाला लोकप्रिय उत्सव गीत
📀 प्रचलन:चैत्र मास की पूर्णिमा, मंगलवार के विशेष संयोग पर हनुमान जन्म की खुशी में गाया जाने वाला प्रसिद्ध भजन

📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

खुशियों से झूमे मन सारे,
जन्मे है हनुमान प्यारे,
महलों में गूंजे जयकारे,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

॥ अंतरा १ – चैत्र पूनम अलबेला ॥

चैत्र मास पूनम अलबेला,
चतुर्दशी तिथि मंगल बेला,
भोर के चमके है तारे,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

॥ अंतरा २ – माँ अंजनी के लाल आए ॥

मां अंजनी के लाल है आए,
राजा केसरी अति हर्षाए,
बाजे है शंख नगाड़े,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

॥ अंतरा ३ – रेशम की डोरी, चंदन का पलना ॥

रेशम की डोरी चंदन का पलना,
जुग जुग जीवे अंजनी को ललना,
जग में करे उजियारे,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

॥ अंतरा ४ – कोटि सूर्य सा मुखड़ा चमके ॥

कोटि सूर्य सा मुखड़ा चमके,
अंग अंग से अति बल दमके,
चंचल नैना मतवाले,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

॥ अंतरा ५ – रुद्र ग्यारहवे शिव अवतारी ॥

रुद्र ग्यारहवे शिव अवतारी,
मोहक छवि पर जग बलिहारी,
रूप कपीस का धारे,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

॥ अंतरा ६ – चारों दिशाएं मंगल गावे ॥

चारों दिशाएं मंगल गावे,
सुर नर नारी दर्शन पावे,
सजे है गांव चौबारे,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

खुशियों से झूमे मन सारे,
जन्मे है हनुमान प्यारे,
महलों में गूंजे जयकारे,
जन्मे हैं हनुमान प्यारें

🎵 तर्ज : “लल्ला की सुन के मैं आयी”

🗣️ भाषा: हिन्दी – लोक भाषा मिश्रित

🙏 गीत का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध हनुमान जन्मोत्सव गीत हनुमान जी के जन्म की खुशी का वर्णन करता है। “खुशियों से झूमे मन सारे, जन्मे है हनुमान प्यारे” – सारे मन खुशी से झूम उठे क्योंकि हनुमान जी का जन्म हुआ है। महलों में जयकारे गूंज रहे हैं।

पहले अंतरे में जन्म के शुभ दिन का उल्लेख है – “चैत्र मास पूनम अलबेला, चतुर्दशी तिथि मंगल बेला”। चैत्र मास की पूर्णिमा, चतुर्दशी तिथि और मंगलवार के संयोग को हनुमान जन्म का विशेष समय माना जाता है।

दूसरे अंतरे में माता अंजनी और पिता केसरी के हर्ष का वर्णन है – “मां अंजनी के लाल है आए, राजा केसरी अति हर्षाए”। शंख-नगाड़े बज रहे हैं।

तीसरे अंतरे में बाल हनुमान के पालने का वर्णन – “रेशम की डोरी चंदन का पलना”। अंजनी को लालना (बालक) जुग-जुग जीवे, वह जगत में उजियारा करें।

चौथे अंतरे में हनुमान जी के बाल स्वरूप का सौंदर्य – “कोटि सूर्य सा मुखड़ा चमके, अंग अंग से अति बल दमके”। उनके चंचल नैन मतवाले हैं।

पाँचवें अंतरे में हनुमान जी के शिव अवतार स्वरूप का उल्लेख – “रुद्र ग्यारहवे शिव अवतारी”। वे ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं, उनका रूप कपीश (वानरराज) का है।

अंतिम अंतरे में कहा गया है कि चारों दिशाएँ मंगल गा रही हैं, देवता, मनुष्य, नारी सब दर्शन पा रहे हैं। गाँव और चौबारे सज गए हैं।

🔍 गीत का विशेष महत्त्व

हनुमान जयंती का प्रमुख गीत: यह गीत हनुमान जयंती के अवसर पर भक्तों द्वारा उल्लासपूर्वक गाया जाता है। इसमें जन्म की पूरी लीला – तिथि, माता-पिता का हर्ष, बाल हनुमान का सौंदर्य, उनका शिव अवतार रूप – सब समाहित है।

लोक संस्कृति और परम्परा: “रेशम की डोरी, चंदन का पलना”, “शंख नगाड़े”, “सजे गांव चौबारे” जैसे शब्द हनुमान जन्म को गाँव-शहर के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

शिव अवतार का उल्लेख: “रुद्र ग्यारहवे शिव अवतारी” पंक्ति हनुमान जी के शिव स्वरूप को रेखांकित करती है, जो उनकी दिव्यता और महिमा को बताती है।

💖 उल्लास और भक्ति का संगम

🎯 संदेश

हनुमान जी का जन्म पूरी सृष्टि में आनंद और उजियारा लेकर आता है। उनके जन्मोत्सव का गीत गाकर हम उनके प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह गीत साल-दर-साल हनुमान जयंती पर लाखों भक्तों के हृदय में उल्लास भरता है। हर पंक्ति भक्तों को बाल हनुमान के दर्शन कराती है और भक्ति में डुबो देती है।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय बजरंगबली ।। जन्मे हैं हनुमान प्यारें ।।

॥ इति हनुमान जन्मोत्सव गीतम् ॥
॥ खुशियों से झूमे मन सारे, जन्मे हैं हनुमान प्यारे ।।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "जन्मे हैं हनुमान प्यारें (हनुमान जन्मोत्सव) लिरिक्स | Janme Hain Hanuman Pyare Hanuman Janmotsav Lyrics in Hindi" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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