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मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे, नंदलाल सांवरिया मेरे (कृष्ण भजन) लिरिक्स | Mera Koi Na Sahara Bin Tere Nandlal Sawariya Mere Krishna Bhajan Lyrics

218 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे – नंदलाल सांवरिया मेरे

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Mera Koi Na Sahara Bin Tere – Nandlal Sawariya Mere) – Krishna Bhajan

🎵 करुणा सागर – दीनबंधु – शरणागति का अद्भुत भजन

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / शरणागति भजन
🎶 भाव: शरणागति, करुणा, विश्वास
📍 विशेषता: कृष्ण को एकमात्र सहारा मानने वाला मार्मिक भजन
📀 लोकप्रियता: श्रीकृष्ण भक्तों में अत्यंत प्रिय, प्रार्थना एवं आराधना का सशक्त माध्यम

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे

॥ अंतरा १ – करुणा सागर का सहारा ॥

करुणा सागर तेरा सहारा
जिसने पुकारा उसे तूने तारा
मैं आया द्वारे तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे

॥ अंतरा २ – दीनबंधु की शरण ॥

तुम दीन बंधु हितकारी
मैं दुखिया शरण तिहारी
काटो जन्म मरण के फेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे

॥ अंतरा ३ – एक आशा तेरे चरणों में ॥

हम दीन हीन संसारी
एक आशा नाथ तिहारी
तेरे चरण कमल के चेले
नंदलाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे

॥ अंतरा ४ – ध्यान और गुणगान ॥

निश्वासर ध्यान लगाऊं
तेरे पग रज शीश चढ़ाऊं
गुण गाऊं साँझ सवेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
गोपाल सांवरिया मेरे
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे
नंदलाल सांवरिया मेरे

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा (अज्ञात)

🗣️ भाषा: हिन्दी-ब्रज मिश्रित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मार्मिक कृष्ण भजन श्रीकृष्ण को एकमात्र सहारा मानने की भावना को व्यक्त करता है। “मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे, नंदलाल सांवरिया मेरे” – भक्त कहता है कि उसे तुम्हारे (कृष्ण) के अलावा कोई आश्रय नहीं है। नंदलाल (नंद जी के लाल) और गोपाल (ग्वालों के पालक) संबोधन भक्त के वात्सल्य भाव को दर्शाते हैं।

“करुणा सागर तेरा सहारा, जिसने पुकारा उसे तूने तारा” – भक्त का दृढ़ विश्वास है कि कृष्ण करुणा के सागर हैं, और जो भी उन्हें पुकारता है, वे उसकी रक्षा करते हैं। “मैं आया द्वारे तेरे” – शरणागति का यह भाव अद्भुत है।

दूसरे अंतरे में “तुम दीन बंधु हितकारी, मैं दुखिया शरण तिहारी” – कृष्ण को दीनबंधु कहा गया है, और भक्त स्वयं को दुखिया बताकर उनकी शरण में आता है। “काटो जन्म मरण के फेरे” – वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

तीसरे अंतरे में “हम दीन हीन संसारी, एक आशा नाथ तिहारी” – भक्त अपनी दीन-हीन स्थिति स्वीकार करते हुए कहता है कि उसकी एकमात्र आशा कृष्ण हैं। “तेरे चरण कमल के चेले” – वह कृष्ण के चरणों का शिष्य बनना चाहता है।

अंतिम अंतरे में भक्त कहता है कि वह “निश्वासर ध्यान लगाऊं, तेरे पग रज शीश चढ़ाऊं” – हर सांस में ध्यान करेगा, और कृष्ण के चरणों की धूलि अपने मस्तक पर लगाएगा। “गुण गाऊं साँझ सवेरे” – प्रातः-सायं उनके गुणों का गान करेगा।

यह भजन सिखाता है कि कृष्ण ही एकमात्र आश्रय हैं, और उनकी शरणागति ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

शरणागति का सशक्त भाव: यह भजन शरणागति के नौ अंगों (आत्मनिवेदन, कर्तव्यत्याग, ममता त्याग आदि) में से “एकमात्र आश्रय” के भाव को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।

करुणा सागर और दीनबंधु: कृष्ण को करुणा का सागर और दीन-दुखियों के बंधु कहकर भक्त उनकी दयालुता पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करता है।

भक्ति का माधुर्य: “नंदलाल”, “गोपाल”, “सांवरिया” जैसे संबोधन भक्ति के वात्सल्य और माधुर्य भाव को दर्शाते हैं। यह भजन कृष्ण भक्ति में लीन होने का एक सरल एवं प्रभावशाली माध्यम है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

जीवन में जब कोई सहारा न दिखे, तब केवल कृष्ण ही सच्चे सहारा हैं। उनकी शरण में जाने से सभी संकट दूर होते हैं और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो दुःख, संकट या निराशा में हैं। कृष्ण के प्रति समर्पण और उनके द्वार पर आने का विश्वास ही सबसे बड़ा सहारा है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। जय श्री कृष्ण ।। राधे-राधे ।।

॥ इति श्रीकृष्ण शरणागति भजनम् ॥
॥ तेरे चरण कमल के चेले, नंदलाल सांवरिया मेरे ॥
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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