आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Krishna Bhajan

राधे ब्रज जन मन सुखकारी (श्री राधा-कृष्ण भजन) लिरिक्स | Radhe Braj Jan Man Sukhkari Shri Radha Krishna Bhajan Lyrics

417 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 राधे ब्रज जन मन सुखकारी – श्री राधा-कृष्ण भजन

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Radhe Braj Jan Man Sukhkari – Shri Radha Krishna Bhajan)

🎵 राधे श्याम श्यामा श्याम – ब्रज की सुखकारी भक्ति

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / ब्रज लोकगीत
🎶 भाव: आनंद, श्रृंगार, भक्ति, समर्पण
📍 विशेषता: राधा और कृष्ण के अभिन्न स्वरूप का वर्णन, ब्रज की रस-लीलाएँ
📀 प्रचलन: राधा-कृष्ण भक्तों में अत्यंत प्रिय, विशेषकर ब्रज क्षेत्र में

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे श्याम, राधे श्याम,
राधे श्याम, राधे श्याम
राधे श्याम, राधे श्याम,
राधे श्याम, राधे श्याम
राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम

॥ अंतरा १ ॥

मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल,
गल वैजयंती माला
राधे चरणन, राधे चरणन,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे चरणन नूपुर रसाला,
राधे श्याम श्यामा श्याम

॥ अंतरा २ ॥

सुन्दर वदन कमल-दल लोचन,
बाँकी चितवन हारी
मोहन वंशी विहारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम

॥ अंतरा ३ ॥

वृन्दावन में धेनु चरावे,
गोपीजन मन हारी
श्री गोवर्धन धारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम

॥ अंतरा ४ ॥

राधा कृष्ण मिली अब दोऊ,
गौर रूप अवतारी
कीर्तन धर्म प्रचारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम

॥ अंतरा ५ ॥

तुम बिन मेरा और ना कोई,
नाम रूप अवतारी
तेरे चरणन में बलिहारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे ब्रज जन मन सुखकारी,
राधे श्याम श्यामा श्याम
राधे श्याम, राधे श्याम,
राधे श्याम श्यामा श्याम

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / ब्रज रस भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मधुर राधा-कृष्ण भजन ब्रजवासियों और सभी भक्तों के मन को सुख देने वाला है। “राधे ब्रज जन मन सुखकारी, राधे श्याम श्यामा श्याम” – राधा ब्रज के लोगों के मन को सुख देने वाली हैं, और “श्यामा श्याम” का अर्थ है राधा (श्यामा) और कृष्ण (श्याम) का युगल।

पहले अंतरे में कृष्ण के स्वरूप का वर्णन है – मोर मुकुट, मकराकृत कुंडल, गले में वैजयंती माला। राधा के चरणों में नूपुर (घुँघरू) रसीले हैं।

दूसरे अंतरे में – सुंदर वदन, कमल-दल जैसे नेत्र, बाँकी चितवन (टेढ़ी नज़र) हारी है। वे मोहन (मोहित करने वाले) वंशी (बाँसुरी) के विहारी हैं।

तीसरे अंतरे में – वृन्दावन में गायें चराते हैं, गोपियों के मन हर लेते हैं। श्री गोवर्धन धारी (गोवर्धन पर्वत उठाने वाले) हैं।

चौथे अंतरे में – राधा और कृष्ण मिलकर गौर रूप (गोरा अवतार – श्री चैतन्य महाप्रभु) में अवतरित हुए हैं, जो कीर्तन धर्म का प्रचार करते हैं। यह भक्ति आन्दोलन की ओर संकेत है।

पाँचवें अंतरे में – “तुम बिन मेरा और ना कोई” – पूर्ण समर्पण। भक्त अपने को राधा-कृष्ण के चरणों में न्योछावर करता है।

यह भजन राधा-कृष्ण के अभिन्न प्रेम और ब्रज की लीलाओं का सुमधुर वर्णन करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप: इस भजन में बार-बार “राधे श्याम श्यामा श्याम” का जप है, जो राधा-कृष्ण की अभिन्नता को दर्शाता है।

गौर अवतार का उल्लेख: चौथे अंतरे में चैतन्य महाप्रभु का संकेत है, जो राधा-कृष्ण के संयुक्त अवतार माने जाते हैं। यह भजन गौड़ीय वैष्णव परम्परा से जुड़ा है।

ब्रज भक्ति की सहजता: भजन की भाषा सरल और भावपूर्ण है, जो आम जनता को भक्ति में लीन कर देती है।

💖 राधा-कृष्ण भक्ति का उल्लास

🎯 संदेश

राधा-कृष्ण का स्मरण मन को सुख और शांति देता है। उनके प्रति प्रेम और समर्पण ही सच्ची भक्ति है। यह भजन हमें ब्रज की रस-लीलाओं में डूबने का आमंत्रण देता है।

✨ आस्था का प्रतीक

“राधे श्याम” के नाम जप से हृदय शुद्ध होता है और जीवन में आनंद आता है। यह भजन राधा-कृष्ण के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है।

🙏 राधे-राधे ।। राधे श्याम श्यामा श्याम ।। जय श्री कृष्ण ।।

॥ इति राधा-कृष्ण भजनम् ॥
॥ राधे ब्रज जन मन सुखकारी, राधे श्याम श्यामा श्याम ॥
श्रेणियां: Krishna Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!