सनातन श्रेणी संग्रह · पृष्ठ 20
1,810+ पावन रचनाएँ

Krishna Stotram
पावन भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर Krishna Stotram के अंतर्गत सभी भक्ति रचनाओं, लोकप्रिय भजनों, आरतियों, चालीसा और मंत्रों का प्रामाणिक संकलन सरल हिंदी भावार्थ एवं शास्त्रीय संदर्भ सहित पढ़ें।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, व्याकरणिक स्पष्टता, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ सहित भक्ति साहित्य।

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Krishna Stotram परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में Krishna Stotram का स्थान अत्यंत पावन है। कलियुग में नाम संकीर्तन और प्रभु वंदना को समस्त क्लेशों से मुक्ति तथा आत्मिक शांति का सबसे सुलभ साधन बताया गया है।

भक्तिलोक के संपादकीय मंडल द्वारा इस संग्रह के प्रत्येक भजन, पद, स्तुति एवं कथा को शुद्धता, व्याकरणिक स्पष्टता, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि श्रद्धालुजन सुगमता से भक्ति रस का अनुभव कर सकें।

Krishna Stotram संग्रह (1810)

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Krishna Stotram

प्रेम पियाला जो पिए सिस दक्षिणा देय दोहे का अर्थ (Prem Piyala Jo Piye Dohe Ka Arth in Hindi) - Bhaktilok

प्रेम पियाला जो पिए सिस दक्षिणा देय दोहे का अर्थ और आध्यात्मिक गहराई सनातन भक्ति परंपरा में संतों, महापुरुषों और आचार्यों द्वारा र…

तू
Krishna Stotram

तू कहता कागद की लेखी मैं कहता आँखिन की देखी दोहे का अर्थ(Tu Kahata Kaagad Ki Lekhi Mai KahataAnkhin Ki Dekhi Dohe Ka Arth in Hindi)

 तू कहता कागद की लेखी मैं कहता आँखिन की देखी दोहे का अर्थ(Tu Kahata Kaagad Ki Lekhi Mai KahataAnkhin Ki Dekhi Dohe Ka Arth in…

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Krishna Stotram

ऐसी मस्ती कहाँ मिलेगी श्याम मस्ती में जी ले (Aisi Masti Kahan Milegi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

ऐसी मस्ती कहाँ मिलेगी श्याम मस्ती में जी ले -ऐसी मस्ती कहाँ मिलेगी श्याम मस्ती में जी ले (Aisi Masti Kahan Milegi) - Shyam Bhajan …

Krishna Stotram से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

भगवान कृष्ण के सबसे लोकप्रिय भजनों में "अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं", "यशोमती मैया से बोले नंदलाला", "राधे राधे जपा करो", "मीठे रस से भरोरी राधा रानी लागे", और "हरे कृष्ण महामंत्र" प्रमुख हैं।

कृष्ण भजन और ध्यान के लिए सुबह का ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) एवं संध्या काल सबसे उत्तम माना जाता है, परंतु निष्काम भक्ति और नाम संकीर्तन किसी भी समय किया जा सकता है।

अष्टछाप महाप्रभु वल्लभाचार्य और गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित आठ प्रमुख कृष्णभक्त कवियों का समूह था, जिसमें सूरदास, कुम्भनदास, परमानन्ददास आदि शामिल थे। इन्होंने ब्रजभाषा में मधुर कृष्ण पदों की रचना की।

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे” महामंत्र कलियुग में मानसिक शांति और प्रभु प्राप्ति का सबसे सरल व प्रभावशाली साधन माना गया है।