श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 1

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 4 मिनट का पठन 115 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच । परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ १॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
श्रीभगवान् उवाच
भगवान् ने कहा
परम्
परम
भूयः
फिर से
प्रवक्ष्यामि
मैं कहूँगा
ज्ञानानाम्
सब ज्ञानों में
ज्ञानम्
ज्ञान
उत्तमम्
उत्तम
यत्
जिसे
ज्ञात्वा
जानकर
मुनयः
मुनि
सर्वे
सभी
पराम्
परम
सिद्धिम्
सिद्धि
इतः
इस (लोक) से
गताः
प्राप्त हुए।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रीभगवान् बोले: मैं फिर से उस परम ज्ञान को कहूँगा, जो सब ज्ञानों में उत्तम है, जिसको जानकर सब मुनि इस संसार से परम सिद्धि को प्राप्त हो गए।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अब तीसरे अध्याय में वर्णित कर्मयोग और अठारहवें अध्याय में वर्णित ज्ञानयोग के समन्वय के रूप में तीन गुणों का ज्ञान देते हैं। यह ज्ञान सर्वोत्तम है। The Lord now reveals the knowledge of the three gunas, which synthesizes karma yoga and jnana yoga.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे पुनः उस परम ज्ञान को कहेंगे जो सभी ज्ञानों में सर्वोत्तम है। इस ज्ञान को प्राप्त करके सभी मुनि इस संसार से परम सिद्धि को प्राप्त हो गए। The Lord declares that He will again teach the supreme knowledge, the best of all, by which all sages attained perfection.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह ज्ञान भौतिक नहीं, आध्यात्मिक है। इसे प्राप्त करके मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है। This knowledge is spiritual; by attaining it one becomes free from the cycle of birth and death.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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