मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच । परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ १॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदश्रीभगवान् उवाच
भगवान् ने कहा
परम्
परम
भूयः
फिर से
प्रवक्ष्यामि
मैं कहूँगा
ज्ञानानाम्
सब ज्ञानों में
ज्ञानम्
ज्ञान
उत्तमम्
उत्तम
यत्
जिसे
ज्ञात्वा
जानकर
मुनयः
मुनि
सर्वे
सभी
पराम्
परम
सिद्धिम्
सिद्धि
इतः
इस (लोक) से
गताः
प्राप्त हुए।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
श्रीभगवान् बोले: मैं फिर से उस परम ज्ञान को कहूँगा, जो सब ज्ञानों में उत्तम है, जिसको जानकर सब मुनि इस संसार से परम सिद्धि को प्राप्त हो गए।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान अब तीसरे अध्याय में वर्णित कर्मयोग और अठारहवें अध्याय में वर्णित ज्ञानयोग के समन्वय के रूप में तीन गुणों का ज्ञान देते हैं। यह ज्ञान सर्वोत्तम है। The Lord now reveals the knowledge of the three gunas, which synthesizes karma yoga and jnana yoga.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे पुनः उस परम ज्ञान को कहेंगे जो सभी ज्ञानों में सर्वोत्तम है। इस ज्ञान को प्राप्त करके सभी मुनि इस संसार से परम सिद्धि को प्राप्त हो गए। The Lord declares that He will again teach the supreme knowledge, the best of all, by which all sages attained perfection.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह ज्ञान भौतिक नहीं, आध्यात्मिक है। इसे प्राप्त करके मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है। This knowledge is spiritual; by attaining it one becomes free from the cycle of birth and death.