मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच | स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव | स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ||५४||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदअर्जुन
अर्जुन
उवाच
बोले
स्थितप्रज्ञस्य
स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि) की
का
क्या
भाषा
भाषा (परिभाषा)
समाधिस्थस्य
समाधि में स्थित की
केशव
हे केशव
स्थितधीः
स्थिर बुद्धि वाला
किम्
क्या
प्रभाषेत
बोलता है
किम्
कैसे
आसीत
बैठता है
व्रजेत
चलता है
किम्
कैसे।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अर्जुन बोले: हे केशव! समाधि में स्थित स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि) पुरुष की क्या पहचान है? वह स्थिरबुद्धि कैसे बोलता है, कैसे बैठता है, कैसे चलता है?
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन अब स्थितप्रज्ञ के लक्षण जानना चाहते हैं – ऐसा व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है? यह प्रश्न गीता के प्रसिद्ध वर्णन का आधार बनता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
अर्जुन बोले: हे केशव! समाधि में स्थित स्थितप्रज्ञ पुरुष की क्या पहचान है? वह स्थिरबुद्धि कैसे बोलता है, कैसे बैठता है, कैसे चलता है? Arjuna said: O Keshava, what are the marks of one who has steady wisdom and is established in samadhi? How does such a person speak, sit, and walk?
जिज्ञासा / Inquiry
अर्जुन की यह जिज्ञासा आगे के उपदेश का मार्ग प्रशस्त करती है।