श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 1

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 199 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ १॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
किम्
what
तत्
that
ब्रह्म
Brahman
किम्
what
अध्यात्मम्
Adhyatma
किम्
what
कर्म
action
पुरुषोत्तम
O best of men
अधिभूतम्
Adhibhuta
च
and
किम्
what
प्रोक्तम्
is said
अधिदैवम्
Adhidaiva
किम्
what
उच्यते
is called.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अर्जुन बोले: हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसे कहते हैं? और अधिदैव किसे कहते हैं?

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन के ये प्रश्न आध्यात्मिक जिज्ञासा के मूल हैं। कृष्ण इनका उत्तर देकर ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म आदि की व्याख्या करेंगे। Arjuna's questions are fundamental to spiritual inquiry. Krishna will answer them, explaining Brahman, Adhyatma, Karma, etc.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अर्जुन पूछते हैं: हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसे कहते हैं? और अधिदैव किसे कहते हैं? Arjuna asks: What is that Brahman? What is Adhyatma? What is action, O best of men? What is declared to be Adhibhuta? And what is called Adhidaiva?

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ये प्रश्न आध्यात्मिक साधक के मूलभूत जिज्ञासाओं को दर्शाते हैं। गुरु से सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए ऐसे प्रश्न आवश्यक हैं। These questions represent the fundamental inquiries of a spiritual seeker. Such questions are necessary to gain true knowledge from a guru.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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