श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 2

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 147 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् । अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ॥ २॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
अधिभूतम्
Adhibhuta
क्षरः
perishable
भावः
nature
पुरुषः
the spirit
च
and
अधिदैवतम्
Adhidaiva
अधियज्ञः
Adhiyajna
अहम्
I
एव
alone
अत्र
in this
देहे
body
देहभृताम्
of the embodied
वर
O best.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

कृष्ण उत्तर देते हैं: अधिभूत क्षर (नाशवान) प्रकृति है; अधिदैव पुरुष (विराट् पुरुष) है; और हे देहधारियों में श्रेष्ठ अर्जुन! इस शरीर में अधियज्ञ स्वयं मैं हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कृष्ण अब अर्जुन के प्रश्नों का उत्तर देते हैं। वह अधिभूत को क्षर भाव (नाशवान प्रकृति) बताते हैं, अधिदैव को पुरुष, और अधियज्ञ को स्वयं। Krishna now answers Arjuna's questions. He explains Adhibhuta as the perishable nature, Adhidaiva as the Cosmic Spirit, and Adhiyajna as Himself.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: अधिभूत क्षर (नाशवान) प्रकृति है; अधिदैव पुरुष (विराट् पुरुष) है; और हे देहधारियों में श्रेष्ठ अर्जुन! इस शरीर में अधियज्ञ स्वयं मैं हूँ। Krishna says: Adhibhuta is the perishable nature; Adhidaiva is the Purusha (Cosmic Spirit); and I alone am Adhiyajna (the Lord of sacrifice) in this body, O best of the embodied.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक बताता है कि सभी यज्ञों के अधिष्ठाता स्वयं भगवान हैं। शरीर में जो कुछ भी है, उसका स्वामी परमात्मा है। This verse reveals that the Lord Himself is the presiding deity of all sacrifices. Everything in the body is owned by the Supreme Self.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 2/28 7% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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