श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 3

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 5 मिनट का पठन 119 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते । भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः ॥ ३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
अक्षरम्
imperishable
ब्रह्म
Brahman
परमम्
supreme
स्वभावः
own nature
अध्यात्मम्
Adhyatma
उच्यते
is called
भूतभावोद्भवकरः
that which causes the birth of beings
विसर्गः
creation
कर्मसंज्ञितः
is known as action.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

परम अक्षर (अविनाशी) ब्रह्म कहलाता है; जीव का स्वभाव अध्यात्म कहा जाता है; और प्राणियों के जन्म का कारण बनने वाली सृष्टि-शक्ति कर्म कहलाती है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कृष्ण अब ब्रह्म, अध्यात्म और कर्म की परिभाषा देते हैं। अक्षर ब्रह्म सर्वोच्च अविनाशी तत्त्व है, अध्यात्म जीव का मूल स्वभाव है, और कर्म वह शक्ति है जो प्राणियों को उत्पन्न करती है। Krishna now defines Brahman, Adhyatma, and Karma. Akshara Brahman is the supreme imperishable reality, Adhyatma is the individual's inherent nature, and Karma is the creative force that generates beings.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: परम अक्षर (अविनाशी) ब्रह्म कहलाता है; जीव का स्वभाव अध्यात्म कहा जाता है; और प्राणियों के जन्म का कारण बनने वाली सृष्टि-शक्ति कर्म कहलाती है। Krishna says: The Supreme Imperishable Brahman is called the Akshara; the individual self's inherent nature is called Adhyatma; the creative force that brings beings into existence is known as Karma.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक तीन मूल तत्त्वों की व्याख्या करता है: परम सत्य (ब्रह्म), जीव का स्वरूप (अध्यात्म), और क्रिया का सिद्धांत (कर्म)। इनके ज्ञान से साधक अपने लक्ष्य को समझ सकता है। This verse explains three fundamental principles: the ultimate reality (Brahman), the nature of the self (Adhyatma), and the principle of action (Karma). Understanding these helps the seeker comprehend his goal.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 3 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 3/28 11% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!